25 अप्रैल: विश्व मलेरिया दिवस

हर साल 25 अप्रैल को “विश्व मलेरिया दिवस”( World Malaria Day) मनाया जाता है। इसे सबसे पहले 2008 में मनाया गया था। इस साल “विश्व मलेरिया दिवस” का थीम“Zero malaria starts with me” है। इसके लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने RBM से हाथ मिलाया है। मलेरिया मादा मच्छर एनोफिलीज के काटने से फैलता है। इन मच्छरों में प्लास्मोडियम पैरासाइट पाया जाता है जो आपके रक्त से होकर शरीर में फ़ैल जाता है। खासकर लीवर में पहुंचकर यह स्थायी हो जाता है। इसके बाद वह लाल रक्त कोशिकाओं को संक्रमित करने लगता है।मलेरिया इन चार तरह के पैरासाइट से फैलता है
1. प्लासमोडियम वाइवेक्स (P. vivax): भारत में लगभग 60 प्रतिशत मलेरिया के मामले प्लासमोडियम वाइवेक्स की वजह से सामने आते हैं। इसमें शरीर में बुखार, जुकाम, थकान और डायरिया जैसी मुश्किलें सामने आती हैं।
2. प्लासमोडियम ओवाले (P.ovale):यह पैरासाइट ज्यादातर पश्चिमी अफ्रीका में पाया जाता है और यह इंसान को काटने के बाद भी काफी लंबे समय तक उसके शरीर में ज़िंदा बना रहता है।
3. प्लासमोडियम फेल्किपेरम (P. falciparum):मलेरिया का यह पैरासाइट सबसे खतरनाक और जानलेवा होता है। इसमें उल्टी, बुखार, पीठ दर्द, कमर दर्द, सिर दर्द, चक्कर, बॉडी पेन, थकान लगना और पेट दर्द जैसे लक्षण होते हैं।
4. प्लासमोडियम मलेरिया (P. malaria):इस पैरासाइट से पीड़ित मरीज में ठिठुरन के साथ तेज बुखार के लक्षण दिखाई देते हैं। हालांकि यह जानलेवा नहीं होता।
2027 तक भारत को मलेरिया मुक्त करने का लक्ष्य
भारत में हर साल करीब 3 लाख से ज्यादा लोगों की मौत मलेरिया से हो जाती है। मलेरिया से बचने के लिए भारतीय चिकित्सा चिकित्सा अनुसंधान (ICMR)ने इसे पूरी तरह से खत्म करने का लक्ष्य रखा है। भारत ने 2027 तक मलेरिया मुक्त और 2030 तक मलेरिया को जड़ से खत्म करने का लक्ष्य रखा है।
भारत में मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम
1953 में भारत सरकार ने राष्ट्रीय मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम (NMCP) शुरु किया जो घरों का भीतर डीडीटी का छिडकाव करने पर केन्द्रित था। पाँच सालों में ही कार्यक्रम की वजह से मलेरिया की घटनाओं में आशचर्यजनक कमी देखने में आई। इससे उत्साहित होकर एक अधिक महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम (NMEP) 1958 में शुरु किया गिया। इससे मलेरिया में और भी कमी आई और उसका मृत्यु की वजह बनना थम गया।
लेकिन 1967 के बाद अति-आत्मसंतोष तथा मच्छरों द्वारा कीटनाशकों के तथा मलेरिया-रोधी दवाओं के प्रति प्रतिकार क्षमता उत्पन्न कर लेने के कारणों की वजह से देश भी में मलेरिया ने फिर सर उठा लिया।1997 में भारत सरकार ने अपना लक्ष्य रोग के उन्मूलन से हटा कर उसके नियंत्रण पर केन्द्रित किया और कीटनाशकों के सार्वत्रिक छिडकाव को रोक कर चुनिंदा भीतरी जगहों पर छिडकाव शुरु किया। 2005 में भारत सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन भी शुरु किया, जिसके उद्देश्यों में शामिल है मलेरिया सहित ज्ञात-कारण बीमारियों पर नियंत्रण।

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