क्रूड ऑयल बेंचमार्क WTI में ऐतिहासिक गिरावट

20 अप्रैल 2020 को अमेरिकी क्रूड ऑयल बेंचमार्क डब्ल्यूटीआइ करीब 35 वर्षो के निचले स्तर तक गिर गया। सिंगापुर बाजार में डब्ल्यूटीआइ (West Texas Intermediate) क्रूड की जून के लिए वायदा कीमत एक समय 11 डॉलर प्रति बैरल के करीब तक उतर आई। वहीं, ब्रेंट क्रूड(Brent Crude)की कीमत भी छह फीसद घटकर 26.91 डॉलर प्रति बैरल रह गई।हालांकि इस गिरावट के बावजूद भारतीय ग्राहकों को पेट्रोल व डीजल की कीमतों में कोई राहत मिलने के आसार नहीं है। एक महीने से भी ज्यादा समय से देश में पेट्रोल व डीजल की कीमतें कमोवेश एक ही स्तर पर कायम हैं।
कारण क्या हैं इस गिरावट के?
लॉकडाउन की वजह से पेट्रोल व डीजल की मांग एकदम घट गई है। कोरोना वायरस संकट के कारण कच्चे तेल की मांग में कमी आई है और तेल की सभी भंडारण सुविधाएं भी अपनी पूर्ण क्षमता पर पहुंच चुकी हैं। ऊपर से कच्चे तेल बाजार के चिर-परिचित प्रतिद्वंदी सऊदी अरब और रूस के बीच दाम पर नई तनातनी शुरु हो गई है जिसका प्रभाव कच्चे तेल की कीमतों में पतन के रुप में देखा जा रहा है।
डब्ल्यूटीआइ और ब्रेंट क्रूड क्या हैं?
डब्ल्यूटीआइ उत्तर अमेरिका में उत्पादित क्रूड ऑयल का ग्रेड है और यह ब्रेंट क्रूड के साथ दुनियाभर में कच्चे तेल के दो प्रमुख बेंचमार्क के तौर पर स्थापित है। ब्रेंट क्रूड अफ्रीका, यूरोप और पश्चिम एशियाई देशों में उत्पादित कच्चे तेल की कीमतों के लिए बेंचमार्क के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। दुनिया की दो-तिहाई कच्चे तेल की कीमत ब्रेंट क्रूड बेंचमार्क के तहत तय होती है। भारतीय कंपनियों के लिए ब्रेंट क्रूड का ज्यादा महत्व है, क्योंकि इनकी ज्यादातर खरीदारी इसी आधार पर होती है।
भारत पर प्रभाव
हालांकि भारत की निर्भरता ब्रेंट क्रूड की सप्लाई पर है, ना कि डब्ल्यूटीआई पर। इसलिए भारत पर अमेरिकी क्रूड के नेगेटिव होने का विशेष असर नहीं पड़ेगा। ब्रेंट का दाम अब भी 20 डॉलर के ऊपर बना हुआ है और यह गिरावट सिर्फ WTI के मई वायदा में दिखाई दी, जून वायदा अब भी 20 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर है। अमेरिकी कच्चा तेल की जून डिलीवरी में 14.8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, फिलहाल इसकी कीमत 21.32 डॉलर प्रति बैरल है। यानी अंतरराष्ट्रीय बाजार में डब्ल्यूटीआई की कीमत भले ही सस्ती हो जाए, लेकिन आपको पेट्रोल की कीमत ज्यादा ही चुकानी होगी।

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