सतत् विकास लक्ष्यों पर स्वैच्छिक राष्ट्रीय समीक्षा

चर्चा में क्यों?

  • नीति आयोग ने हाल ही में सतत विकास 2020 के लिए संयुक्त राष्ट्र उच्च स्तरीय राजनीतिक फोरम (United Nations High-level Political Forum-HLPF) में भारत की दूसरी स्वैच्छिक राष्ट्रीय समीक्षा (Voluntary National Review-VNR) पेश की।
  • यह फोरम एक अंतरराष्ट्रीय मंच हैं जो 17 सतत विकास लक्ष्यों (SDG) की प्रगति की समीक्षा करता है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत, अध्यक्ष डॉ वीके पॉल और एसडीजी सलाहकार संयुक्ता समद्दर द्वारा ‘डीकेड ऑफ एक्शन: टेकिंग एसडीजी फ्रॉम ग्लोबल टू लोकल’ शीर्षक से जारी समीक्षा रिपोर्ट को HLPF के समक्ष पेश किया।
  • 10 से 16 जुलाई तक वर्चुअल प्लेटफार्म पर हुए इस फोरम में 47 सदस्य देशों ने अपनी अपनी समीक्षा रिपोर्ट पेश की।
  • यह रिपोर्ट एजेंडा- 2030  को लागू करने और प्रगति की समीक्षा को लेकर बेहद महत्वपूर्ण होती है।
  • नीति आयोग ने 2017 में सबसे पहले वीएनआर पेश की थी।

सतत् विकास क्या है?

  • सतत् विकास से तात्पर्य आने वाली पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता से समझौता किये बिना वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करना है।

सतत् विकास लक्ष्य?

  • वर्ष 2015 में संयुक्त राष्ट्र महासभा की 70वीं बैठक के दौरान आगामी 15 वर्षों के लिये अर्थात् वर्ष 2030 तक के लिये सतत् विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goals-SDG) निर्धारित किये गए थे।
  • इससे पूर्व वर्ष 2000 से वर्ष 2015 तक की अवधि के लिये सहस्त्राब्दि विकास लक्ष्यों (Millennium Development Goals-MDG) की प्राप्ति की योजना बनाई गई थी जिनकी समयावधि वर्ष 2015 में पूरी हो चुकी थी।

संयुक्त राष्ट्र का एजेंडा 2030 (17 विकास लक्ष्य)
1-गरीबी के सभी रूपों की पूरे विश्व से समाप्ति।
2-भूख की समाप्ति, खाद्य सुरक्षा और बेहतर पोषण और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा।
3-सभी आयु के लोगों में स्वास्थ्य, सुरक्षा और स्वस्थ जीवन को बढ़ावा।
4-समावेशी और न्यायसंगत गुणवत्तायुक्त शिक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही सभी को सीखने का अवसर देना।
5-लैंगिक समानता प्राप्त करने के साथ ही महिलाओं और लड़कियों को सशक्त करना।
6-सभी के लिये स्वच्छता और पानी के सतत् प्रबंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
7-सस्ती, विश्वसनीय, टिकाऊ और आधुनिक ऊर्जा तक पहुँच सुनिश्चित करना।
8-सभी के लिये निरंतर समावेशी और सतत् आर्थिक विकास, पूर्ण और उत्पादक रोज़गार तथा बेहतर कार्य को बढ़ावा देना।
6-लचीले बुनियादी ढाँचे, समावेशी और सतत् औद्योगीकरण को बढ़ावा।
10-देशों के बीच और भीतर असमानता को कम करना।
11-सुरक्षित, लचीले और टिकाऊ शहर और मानव बस्तियों का निर्माण।
12-स्थायी खपत और उत्पादन पैटर्न को सुनिश्चित करना।
13-जलवायु परिवर्तन और उसके प्रभावों से निपटने के लिये तत्काल कार्रवाई करना।
14 स्थायी सतत् विकास के लिये महासागरों, समुद्रों और समुद्री संसाधनों का संरक्षण और उपयोग।
15-सतत् उपयोग को बढ़ावा देने वाले स्थलीय पारिस्थितिकीय प्रणालियों, सुरक्षित जंगलों, भूमि क्षरण और जैव-विविधता के बढ़ते नुकसान को रोकने का प्रयास करना।
16-सतत् विकास के लिये शांतिपूर्ण और समावेशी समितियों को बढ़ावा देने के साथ ही साथ सभी स्तरों पर इन्हें प्रभावी, जवाबदेहपूर्ण बनाना ताकि सभी के लिये न्याय सुनिश्चित हो सके।
17-सतत् विकास के लिये वैश्विक भागीदारी को पुनर्जीवित करने के अतिरिक्त कार्यान्वयन के साधनों को मजबूत बनाना।

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