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जलवायु परिवर्तन पर एक्‍शन को लेकर चौथी वर्चुअल मंत्रिस्तरीय वार्ता

चर्चा में क्यों?

  • 7 जुलाई 2020 के जलवायु परिवर्तन पर एक्‍शन को लेकर चौथी वर्चुअल मंत्रिस्तरीय वार्ता (virtual Ministerial on Climate Action) हुई।
  • इसका आयोजन संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (UNFCCC) के तहत पेरिस समझौते के कार्यान्वयन पर चर्चा के लिए किया गया था।
  • इसकी सह-अध्यक्षता यूरोपीय संघ, चीन और कनाडा द्वारा की गई थी।
  • इसे संबोधित करते हुए केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि विकासशील देशों में जलवायु एक्‍शन को और मजबूत करने के लिए 2020 तक एक ट्रिलियन डॉलर का वादा पूरा नहीं हुआ है।

क्या है पेरिस समझौता?

  • 30 नवंबर से लेकर 11 दिसंबर, 2015 तक 195 देशों ने वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के उद्देश्य से वार्ता कर जलवायु परिवर्तन पर एक नए वैश्विक समझौता किया जिसे पेरिस समझौता कहा जाता है।
  • इस समझौते का उद्देश्य वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को इतना कम करना है, ताकि वैश्विक तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तर (Pre-Industrial level) से 2 डिग्री सेल्सियस कम रखा जा सके।
  • इसके साथ ही तापमान वृद्धि को और 1.5 डिग्री सेल्सियस रखने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
  • वर्तमान में पेरिस समझौते में कुल 197 देश हैं।
  • 2017 में सीरिया इस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाला आखिरी देश था।
  • जून 2017 में उन्होंने अमेरिका के इस समझौते से अलग होने की घोषणा की।
  • इनमें से 179 देशों ने इस समझौते को औपचारिक रूप से अपनी अनुमति दी है, जबकि रूस, तुर्की और ईरान जैसे कुछ प्रमुख देश अभी तक समझौते में औपचारिक रूप से शामिल नहीं हुए हैं।

पेरिस समझौते के प्रमुख बिंदु

  • ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती के अलावा पेरिस समझौते में प्रत्येक पाँच वर्ष में उत्सर्जन में कटौती के लिये प्रत्येक देश के योगदान की समीक्षा करने की आवश्यकता का उल्लेख किया गया है ताकि वे संभावित चुनौती के लिये तैयार हो सकें।
  • विकसित देशों को ‘जलवायु वित्त’ के माध्यम से जलवायु परिवर्तन से निपटने और नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने में विकासशील और अल्पविकसित देशों की मदद करनी होगी।
  • कार्बन उत्सर्जन की कटौती के उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु वैश्विक उत्सर्जन के 90 प्रतिशत से अधिक के लिये ज़िम्मेदार 186 देशों ने कार्बन कटौती के लक्ष्य निर्धारित किये हैं, जिन्हें ‘राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान’ (INDC) के रूप में जाना जाता है।
  • पेरिस समझौते में कार्बन उत्सर्जन की कटौती के लक्ष्यों की प्रगति की निगरानी, ​​सत्यापन और रिपोर्टिंग हेतु अनिवार्य उपाय भी सुझाए गए हैं।

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