दीया मिर्जा बनी रहेंगी UNEP की सद्भावना राजदूत

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की सद्भावना दूत सिने आभिनेत्री दीया मिर्जा का कार्यकाल और बढ़ा दिया गया है। दिया अब साल 2022 के अंत तक इस पद को संभाले रहेंगी। दीया सतत विकास लक्ष्य (SDG) की प्राप्ति के लिए संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत भी हैं। उनका कहना है कि कार्यकाल का बढ़ना पर्यावरण के लिए बदलती चीजों की दिशा काम करने के लिए एक मौका मिलने जैसा है।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी है। इसकी स्थापना वर्ष 1972 में मानव पर्यावरण पर स्टॉकहोम में आयोजित संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के दौरान हुई थी।
इस संगठन का उद्देश्य मानव पर्यावरण को प्रभावित करने वाले सभी मामलों में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाना तथा पर्यावरण संबंधी जानकारी का संग्रहण, मूल्यांकन एवं पारस्परिक सहयोग सुनिश्चित करना है।
UNEP पर्यावरण संबंधी समस्याओं के तकनीकी एवं सामान्य निदान हेतु एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य करता है। UNEP अन्य संयुक्त राष्ट्र निकायों के साथ सहयोग करते हुए सैकड़ों परियोजनाओं पर सफलतापूर्वक कार्य कर चुका है।
इसका मुख्यालय नैरोबी (केन्या) में है।
सतत विकास लक्ष्य (SDG)
अंतर्राष्‍ट्रीय समुदाय ने संयुक्‍त राष्‍ट्र के माध्‍यम से 17 सतत् विकास लक्ष्‍यों की ऐतिहासिक योजना शुरू की है जिसका उद्देश्‍य वर्ष 2030 तक अधिक संपन्‍न, अधिक समतावादी और अधिक संरक्षित विश्‍व की रचना करना है।
17 सतत् विकास लक्ष्‍य और 169 उद्देश् सतत् विकास के लिए 2030 एजेंडा के अंग हैं जिसे सितम्‍बर, 2015 में संयुक्‍त राष्‍ट्रमहासभा की शिखर बैठक में 193 सदस्‍य देशों ने अनुमोदित किया था।
यह एजेंडा पहली जनवरी 2016 से प्रभावी हुआ है। इन लक्ष्‍यों को निर्धारित करने के लिए हुई अभूतपूर्व परामर्श प्रक्रिया में राष्‍ट्रीय सरकारों और दुनिया भर के लाखों नागरिकों ने मिलकर बातचीत की और अगले 15 वर्ष के लिए सतत् विकास हासिल करने का वैश्विक मार्ग अपनाया।
उल्लेखनाय है कि‘पर्यावरण तथा विकास पर विश्व आयोग’ (1983) के अंतर्गत बर्टलैंड कमीशन द्वारा जारी रिपोर्ट (1987) के सतत विकास की संकल्पना दी थी।
संयुक्त राष्ट्र का एजेंडा 2030 (17 विकास लक्ष्य)
1-गरीबी के सभी रूपों की पूरे विश्व से समाप्ति।
2-भूख की समाप्ति, खाद्य सुरक्षा और बेहतर पोषण और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा।
3-सभी आयु के लोगों में स्वास्थ्य, सुरक्षा और स्वस्थ जीवन को बढ़ावा।
4-समावेशी और न्यायसंगत गुणवत्तायुक्त शिक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही सभी को सीखने का अवसर देना।
5-लैंगिक समानता प्राप्त करने के साथ ही महिलाओं और लड़कियों को सशक्त करना।
6-सभी के लिये स्वच्छता और पानी के सतत् प्रबंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
7-सस्ती, विश्वसनीय, टिकाऊ और आधुनिक ऊर्जा तक पहुँच सुनिश्चित करना।
8-सभी के लिये निरंतर समावेशी और सतत् आर्थिक विकास, पूर्ण और उत्पादक रोज़गार तथा बेहतर कार्य को बढ़ावा देना।
9-लचीले बुनियादी ढाँचे, समावेशी और सतत् औद्योगीकरण को बढ़ावा।
10-देशों के बीच और भीतर असमानता को कम करना।
11-सुरक्षित, लचीले और टिकाऊ शहर और मानव बस्तियों का निर्माण।
12-स्थायी खपत और उत्पादन पैटर्न को सुनिश्चित करना।
13-जलवायु परिवर्तन और उसके प्रभावों से निपटने के लिये तत्काल कार्रवाई करना।
14-स्थायी सतत् विकास के लिये महासागरों, समुद्रों और समुद्री संसाधनों का संरक्षण और उपयोग।
15-सतत् उपयोग को बढ़ावा देने वाले स्थलीय पारिस्थितिकीय प्रणालियों, सुरक्षित जंगलों, भूमि क्षरण और जैव-विविधता के बढ़ते नुकसान को रोकने का प्रयास करना।
16-सतत् विकास के लिये शांतिपूर्ण और समावेशी समितियों को बढ़ावा देने के साथ ही साथ सभी स्तरों पर इन्हें प्रभावी, जवाबदेहपूर्ण बनाना ताकि सभी के लिये न्याय सुनिश्चित हो सके।
17-सतत् विकास के लिये वैश्विक भागीदारी को पुनर्जीवित करने के अतिरिक्त कार्यान्वयन के साधनों को मजबूत बनाना।

Related Posts

Leave a Reply