संयुक्त राष्ट्र आर्थिक व सामाजिक परिषद के नए सदस्यों का चुनाव

17 जून 2020 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के 4 अस्थाई सदस्यों के निर्वाचन के साथ ही संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक व सामाजिक परिषद ( Economic and Social Council,ECOSOC)के 18 सदस्य देशों का भी चुनाव हुआ जो तीन वर्ष का अपना कार्यकाल 1 जनवरी 2021 को शुरू करेंगे।
ये नव निर्वाचित 18 देश हैं – अर्जेण्टीना, ऑस्ट्रिया, बोलीविया, बुलगारिया, फ्रांस, जर्मनी, गुआटेमाला, इण्डोनेशिया, जापान, लाईबेरिया, लीबिया, मेडागास्कर, मैक्सिको, नाईजीरिया, पुर्तगाल, सोलोमन आइलैंड्स, ब्रिटेन और ज़िम्बाब्वे।
आर्थिक व सामाजिक परिषद
आर्थिक व सामाजिक परिषद (ECOSOC) संयुक्त राष्ट्र तथा उसकी विशिष्ट एजेंसियों व संस्थाओं द्वारा सम्पन्न किये जाने वाले आर्थिक एवं सामाजिक कार्यों में समन्वय करने वाली प्रमुख एजेंसी है।
उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 55 में संयुक्त राष्ट्र को स्थिरता एवं समृद्धि की ऐसी दशाएं निर्मित करने का निर्देश दिया गया है, जो राष्ट्रों के मध्य मित्रवत तथा शांतिपूर्ण संबंधों के लिए जरूरी हो तथा लोगों के आत्मनिर्णय व समान अधिकारों के सिद्धांत पर टिकी हुई हों। इसी के तहत इन विशेष एजेंसियों का गठन किया गया है।
ECOSOC सामान्य सभा को अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक एवं सामाजिक सहयोग एवं विकास कार्यक्रमों में सहायता करती है। यह परिषद सामाजिक समस्याओं के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय शांति को प्रभावी बनाने में प्रयासरत है। इसके अनुसार विश्व में शांति बनाये करने का एकमात्र हल राजनीतिक नहीं है। इसकी स्थापना 1945 की गयी थी।
परिषद की वर्तमान में कुल सदस्य संख्या 54 है, जिनमें से 18 सदस्य (1/3) प्रतिवर्ष महासभा द्वारा निर्वाचित किये जाते हैं। सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष होता है।
सदस्यों के निर्वाचन भौगोलिक वितरण पर आधारित एक प्रणाली के माध्यम से किया जाता है। अध्यक्ष का कार्यकाल वार्षिक होता है। अध्यक्ष एवं अन्य सदस्य सेवामुक्ति के तुरंत बाद पुनः चुने जा सकते हैं। इसकी वर्तमान अध्यक्ष मोना जुलू हैं।
परिषद की बैठक वर्ष में दो बार होती है तथा विशेष सत्रों का आयोजन भी किया जा सकता है। प्रत्येक सदस्य को एक मत देने का अधिकार होता है तथा निर्णय साधारण बहुमत द्वारा किये जाते हैं।
आर्थिक व् सामाजिक परिषद् की गतिविधियाँ 9 कार्यात्मक आयोगों, 5 क्षेत्रीय आयोगों अनेक स्थायी समितियों एवं आयोगों (जैसे-मानव अधिवासन पर आयोग तथा नवीन एवं पुनर्नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के द्वारा विकास हेतु आयोग) द्वारा सम्पन्न की जाती हैं।

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