कोरोना वायरस के उपचार में कारगर मिलीं हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और एजिथ्रोमाइसिन

कोरोनावायरस के इलाज के लिए दो दवाओं की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। इनका नाम हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (Hydroxychloroquine) और एजिथ्रोमाइसिन (Azithromycin)है। इस दवा से ही फ्रांस, चीन, भारत समेत अधिकांश देशों में इलाज हो रहा है और मरीज तेजी से ठीक भी हो रहे हैं। भारत में यह दवा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। यही वजह है कि अमेरिका सहित दुनिया के कई देश भारत से इसकी मांग कर रहे हैं। फ्रांस में कोरोना के 1061 मरीजों पर लगातार 3 दिनों तक इन दोनों दवाओं के जरिए इलाज किया गया। नौंवे दिन जब जांच की गई तो 973 मरीज (91.7%) पूरी तरह संक्रमणमुक्त हो गए। नतीजों में यह भी पता चला कि इस इलाज से किसी भी तरह का कार्डियक खतरा नहीं है और इसके सेवन से 98% पूरी तरह ठीक हो गए।
हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन को दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इजाद किया गया था। ये दवा मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल की जाती है। इसके अलावा इसे जोड़ों के दर्द के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। अमरीका की जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के लुपस सेंटर के मुताबिक ये दवा मांसपेशियों और जोड़ों के दर्द को कम करती है।
ऐसे काम करती है हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन
शोध में सामने आया कि क्लोरोक्वीन मानव शरीर के भीतर कोशिका के ऊपर एक परत बना देता है। इस परत के कारण वायरस मानव कोशिका से जुड़ नहीं पाता है। परिणाम यह होता है कि वायरस को पनपने और कई गुना बढ़ने के लिए कोशिका से जरूरी प्रोटीन नहीं मिल पाता। इस कारण वायरस का प्रभाव सीमित हो जाता है।चूंकि कोविड-19 की कोई निश्चित दवा नहीं है, इसीलिए इससे पीड़ित मरीजों के इलाज के कई दवाओं का एक साथ प्रयोग किया जाने लगा।

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