लड़कियों के विवाह और मातृत्व की आयु पुन: तय करने के लिए कार्यबल गठित

देश में लड़कियों के विवाह और मातृत्व की आयु पुन: तय करने पर विचार शुरू हो गया है। केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार ने मातृ मृत्यु दर ( Maternal Mortality Ratio) कम करने के उद्देश्य से मातृत्व प्रवेश आयु की समीक्षा के लिए टास्क फोर्स (कार्य दल) का गठन किया है।
पूर्व समता पार्टी अध्यक्ष जया जेटली की अध्यक्षता में गठित 10 सदस्यीय कार्य दल विवाह और मातृत्व की आयु से जुड़े सभी पहलुओं पर विचार करेगा। टास्क फोर्स को 31 जुलाई 2020 तक अपनी रिपोर्ट देनी है।
बजट 2020-21 में की गई थी घोषणा
मातृत्व प्रवेश आयु समीक्षा से संकेत मिलता है कि एक बार फिर लड़कियों के विवाह की न्यूनतम आयु बढ़ाई जा सकती है जो अभी 18 वर्ष है। उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2020-21 का बजट पेश करते समय ही मातृत्व प्रवेश आयु की समीक्षा के लिए टास्क फोर्स गठित करने की घोषणा की थी।
वित्त मंत्री  ने अपने बजट भाषण में कहा था कि 1978 में शारदा एक्ट में संशोधन करके लड़कियों की शादी की उम्र 15 वर्ष से बढ़ा कर 18 वर्ष की गई थी। जैसे-जैसे भारत तरक्की कर रहा है, महिलाओं की शिक्षा और करियर के क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर बन रहे हैं। इसलिए मातृत्व मृत्यु दर में कमी लाना तथा पोषण के स्तर में सुधार आवश्यक है। इसके लिए मातृत्व में प्रवेश की उम्र से जुड़े पहलुओं पर गौर और समीक्षा की आवश्यकता है।
ये कार्य भी करने होंगे कार्य दल को

  • कार्य दल लड़कियों के बीच उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के सुझाव के साथ उपयुक्त विधायी उपायों और मौजूदा कानूनों में संशोधन पर भी अपनी सिफारिश देगा।
  • कार्य दल सिफारिशों को तय समयसीमा में लागू करने की विस्तृत योजना भी तैयार करेगा।
  • कार्य दल इस पर भी विचार करेगा कि लड़कियों के विवाह की आयु का सीधा संबंध मातृत्व में प्रवेश की आयु, माता और व बच्चे की सेहत के अलावा जनसंख्या नियंत्रण वलड़कियों की शिक्षा और करियर से है।

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