नंदा देवी नेशनल पार्क में मिला दुर्लभ हिम तेंदुआ

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क में पहली बार दुर्लभ हिम तेंदुओं का जोड़ा दिखा है। इसकी धुंधली तस्वीर वहां लगाए गए कैमरा ट्रैप में कैद हुई है। पार्क प्रशासन के अनुसार देश में पहली बार हिम तेंदुओं के जोड़े की तस्वीर मिली है। इसके अलावा कुछ अलग हिम तेंदुए और कस्तूरी मृग भी कैमरा ट्रैप में आए हैं। इससे इस दुर्लभ वन्यजीव की संख्या बढ़ने की संभावना जगी है। ये पहली बार है जब देश में हिम तेंदुओं का जोड़ा किसी कैमरा ट्रैप में दिखा हो। अब तक कुछ जगह अकेले ही तेंदुए दिखे हैं।
हिम तेंदुआ 
हिम तेंदुआ ( पैंथेरा अनिसया सिंक. अनिसया अनिसया) एक बड़ी बिल्ली है जो मध्य और दक्षिण एशिया के पहाड़ी क्षेत्र में पाई जाती है। यह आईयूसीएन की लाल सूची में विलुप्तप्राय प्रजातियों में सूचिबद्ध है। वर्ष 2013 में लगाए गए अनुमानों के अनुसार इन तेंदुओं की वैश्विक आबादी 4,080 से 6,590 के बीच थी, जिनमें से 2,500 से कुछ कम तेंदुओं द्वारा जंगल में प्रजनन करने का अनुमान भी लगाया गया था। ये तेंदुए 50 फीट (15 मीटर) तक छलांग लगा सकते हैं।
हिम तेंदुआ उच्च हिमालयी और ट्रांस-हिमालयी क्षेत्र के पाँच राज्यों जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम तथा अरुणाचल प्रदेश के भूभाग में पाया जाता है।यह क्षेत्र वैश्विक हिम तेंदुआ रेंज में लगभग 5% योगदान देता है।इसे IUCN की सुभेद्य (Vulnerable) तथा भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की अनुसूची 1 में रखा गया है।इसे CITES और प्रवासी प्रजातियों पर सम्मेलन (CMS) के परिशिष्ट I में  भी सूचीबद्ध किया गया है।
यह हिमाचल प्रदेश का राजकीय पशु है।
हिम तेंदुए की संख्या का आकलन करने के लिए प्रथम राष्ट्रीय प्रोटोकॉल
केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने हिम तेंदुओं की रक्षा और संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में प्रमुख पहल करते हुए अंतर्राष्ट्रीय हिम तेंदुआ दिवस के अवसर पर 23 अक्टूबर 2019 को भारत में हिम तेंदुए की संख्या का आकलन करने के लिए प्रथम राष्ट्रीय प्रोटोकॉल का शुभारंभ किया।
देश में हिम तेंदुओं की गणना का अपने किस्म का पहला कार्यक्रम वैज्ञानिक विशेषज्ञों द्वारा उन राज्यों/संघ शासित प्रदेशों, के सहयोग से विकसित किया गया है, जहां हिम तेंदुए पाए जाते हैं। इन राज्यों/संघ शासित प्रदेशों में लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA), जो केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय का हिस्सा है, सर्वेक्षण के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।इस अवसर पर वैश्विक हिम तेंदुआ और पारिस्थितिक तंत्र संरक्षण (Global Snow Leopard and Ecosystem Protection -GSLEP) कार्यक्रम की 4वीं संचालन समिति की बैठक के उद्घाटन सत्र को भी चिन्हित किया गया।
प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड- यह तेंदुए के संरक्षण के लिये समावेशी और भागीदारीपूर्ण दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है जिसमें पूरी तरह से स्थानीय समुदाय शामिल होता है।
सिक्योर हिमालय- GEF तथा UNDP द्वारा जैव विविधता के संरक्षण और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र पर स्थानीय समुदायों की निर्भरता को कम करने के लिये इस परियोजना का वित्तपोषण किया जा रहा है।यह परियोजना अब चार हिम तेंदुए रेंज राज्यों, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, और सिक्किम में चालू है।

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