श्वे तेल एवं गैस परियोजना ने निवेश को स्वीकृति

चर्चा में क्यों?

  • केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (OVL) द्वारा म्यांमार में श्वे तेल एवं गैस परियोजना (Shwe Oil & Gas Project) में अतिरिक्त निवेश को मंज़ूरी दी है।

महत्वपूर्ण बिंदु:

  • निवेश योजना के तहत श्वे तेल एवं गैस क्षेत्र के ब्लाक A-1 एवं A-3 में 121.27 मिलियन डॉलर (लगभग 909 करोड़ रुपए) का अतिरिक्त निवेश किया जाएगा।
  • ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (ONGC Videsh Ltd- OVL) दक्षिण कोरिया, भारत एवं म्यांमार की तेल एवं गैस क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के एक भाग के रूप में वर्ष 2002 से ही म्यांमार में श्वे तेल एवं गैस परियोजना के उत्खनन एवं विकास से जुड़ी हुई है।

श्वे तेल एवं गैस परियोजना:

  • श्वे गैस क्षेत्र अंडमान सागर (Andaman Sea) में एक प्राकृतिक गैस क्षेत्र है।
  • इसे वर्ष 2004 में  दक्षिण कोरियाई कंपनी दाईवू (Daewoo) ने खोजा और विकसित किया गया था।
  • म्यांमार में श्वे गैस परियोजना बंगाल की खाड़ी के रखाइन अपतटीय क्षेत्र के ब्लॉक A-1 एवं A-3 में स्थित है।
  • भारत सरकार की सार्वजनिक क्षेत्र की महारत्न कंपनी ‘गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड’ (GAIL) भी इस परियोजना में एक निवेशक के तौर पर शामिल है।
  • पूर्वी एशियाई देशों की तेल एवं गैस उत्खनन तथा विकास परियोजनाओं में भारतीय पीएसयू की भागीदारी भारत की लुक ईस्ट पॉलिसी/एक्ट ईस्ट पॉलिसी का एक हिस्सा है।

लुक ईस्ट/ एक्ट ईस्ट पॉलिसी

  • भारत की पूर्व की ओर देखो (Look East Policy) नीति वर्ष 1991 में तत्कालीन प्रधानमन्त्री पीवी नरसिम्हा राव द्वारा शुरू की गयी थी।
  • इस नीति का मुख्य लक्ष्य भारत के व्यापार की दिशा, पश्चिमी और भारत के पडोसी देशों के साथ-साथ उभरते हुए दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों (आसियान) की ओर करना था।
  • 2014 में नरेन्द्र मोदी के भारत के प्रधानमंत्री बनने के बाद अब लुक ईस्ट पॉलिसी का अगला चरण ”पूर्व की ओर काम करो नीति” (Act Eas Policy) शुरु किया है।
  • जहां ‘पूर्व की ओर देखो नीति’ का ध्यान दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के साथ केवल आर्थिक एकीकरण में वृद्धि करना था और क्षेत्र केवल दक्षिण पूर्व एशिया तक ही सीमित था वहीं ‘पूर्व की ओर काम करो नीति’ का ध्यान आर्थिक एकीकरण के साथ-साथ सुरक्षा एकीकरण भी है और इसका संकेन्द्रण दक्षिण पूर्व एशिया के साथ-साथ पूर्वी-एशिया में भी बढ़या गया है।

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