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रुस-भारत-चीन (RIC) सम्मेलन

चर्चा में क्यों?

  • लद्दाख में तनाव के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर 23 जून को अपने चीनी और रूसी समकक्षों के साथ रूस-भारत-चीन त्रिपक्षीय वर्चुअल सम्मेलन में शामिल हुए।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • बैठक रूस की तरफ से बुलाई गई थी और रूसी विदेशी मंत्री ने आधिकारिक तौर पर यही कहा है कि भारत व चीन के बीच के मुद्दे को सुलझाने के लिए किसी तीसरे देश की मदद नहीं चाहिए। भारत व चीन भी नहीं चाहते कि कोई तीसरा पक्ष मध्यस्थता करे।
  • भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने परोक्ष तौर पर भारत की चिंताओं पर कहा कि ‘जो देश दुनिया में अपने आपको अग्रणी मानते हैं उन्हें हर क्षेत्र में मिसाल बनना चाहिए। साथ ही इन देशों को अपने साझेदारों के हितों का ध्यान रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों का भी पालन करना चाहिए।
  • 1938 के चीन-जापान युद्ध में भारतीय चिकित्सक डॉक्‍टर कोटणीस के योगदान की चर्चा करते हुए भारत ने चीन को उन पांच डॉक्टरों की याद दिलाई, जिन्हें चीनी सिपाहियों की मदद के लिए भारत ने भेजा था।

कौन थे डॉ कोटणीस?

  • महाराष्ट्र के सोलापुर के रहने वाले डॉ. द्वारकानाथ कोटणीस 1938 में बम्बई के जेजे अस्पताल में काम करते थे। तब उन्हें एक मेडिकल मिशन के तहत चीन-जापान(1937-1945)  युद्ध के दौरान घायल चीनी सैनिकों के इलाज के लिए चीन भेजा गया था।
  • डॉक्टर कोटणीस को युद्ध के दौरान उनकी सेवाओं के लिए चीन में बहुत सम्मान के साथ याद किया जाता है।
  • चीन में रहने के दौरान मरीजों की सेवा करने वाली एक नर्स गुओ क्विंग लांग से डॉ कोटनिस ने शादी की थी।
  • युद्ध के विनाश के उस माहौल में भी उन दोनों का प्यार परवान चढ़ा और उन्होंने दिसंबर 1941 में विवाह कर लिया। चीन में ही उनके पुत्र ‘यिनहुआ’ पैदा हुए।
  • डॉ कोटणीस बिना सोए कई दिनों तक चीनी सैनिकों का इलाज करते रहे। जिसके कारण उन्हें मिर्गी का दौरा पड़ा और 1942 में उनकी सिर्फ 32 साल की उम्र में मौत हो गई।
  • कोटणीस की मौत के बाद उनकी पत्नी कई बार कोटनिस के परिजनों से मिलने भारत आईं।
  • डॉक्टर कोटणीस की याद में उन्होंने ‘माई लाइफ विद कोटणीस’ भी लिखी, साल 2011 में उनका देहांत हो गया।

RIC समूह

  • RIC समूह के निर्माण का विचार BRICS समूह से बहुत पहले वर्ष 1998 में तत्कालीन रूसी विदेश मंत्री द्वारा दिया गया था। हालाँकि RIC समूह को उतना महत्त्व नहीं दिया गया जितना BRICS समूह को दिया गया है।
  • यद्यपि तीनों देशों के नेताओं द्वारा बहुपक्षीय सम्मेलनों के दौरान बैठक का आयोजन किया जाता रहा है।
  • तीनों देश बहुपक्षीय संस्थानों जैसे संयुक्त राष्ट्र, विश्व व्यापार संगठन, वैश्विक वित्तीय संस्थानों में सुधार का समर्थन करते हैं।

 

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