शनि के वातावरण में गर्म गैसों के रहस्य से पर्दा उठाया

हमारे सौरमंडल के अन्य ग्रह- शनि, बृहस्पति, यूरेनस और नेप्च्यून के वायुमंडल की ऊपरी सतह पृथ्वी की तरह ही गर्म गैसों से बनी है। सूर्य से काफी दूर स्थित होने के बावजूद भी इन ग्रहों के वायुमंडल का तापमान ज्यादा होना हमेशा से ही वैज्ञानिकों की उत्सुकता का विषय रहा है। अब वैज्ञानिकों ने शनि के वातावरण में गर्म गैसों के रहस्य से पर्दा उठा लिया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी समेत अन्य ग्रहों के ऊपरी वातावरण के गर्म रहने का एक कारण इनके ध्रुवों पर मौजूद इलेक्ट्रिक करंट (विद्युत प्रवाह) है। इसी कारण लगभग सभी ग्रहों के ऊपरी वायुमंडल में विशाल गैसों का झुंड नजर आता है।शनि के रहस्यों से पर्दा उठाने के लिए अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के शोधकर्ताओं ने अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अंतरिक्ष यान कैसिनी के आंकड़ों के अध्ययन किया।
तापमान और मौसम की मिलेगी जानकारी : कैसिनी की अल्ट्रावॉयलेट इमेजिंग स्पेक्टोग्राफ टीम के सदस्य टॉमी कोस्कि ने कहा, ‘ये नतीजे ग्रहों के ऊपरी वायुमंडल को समझने के लिए बहुत अहम हैं। इससे हमें सौरमंडल के अन्य ग्रहों के वायुमंडल के ऊपरी हिस्से के तापमान और मौसम को समझने में भी मदद मिलेगी।
कैसिनी मिशन (Cassini Mission) : कैसिनी को 1997 में 15 अक्टूबर को लांच किया गया था और 2004 में 30 जून को इसने शनि की कक्षा में प्रवेश किया था। कैसिनी का मिशन चार साल का निर्धारित किया गया था। लेकिन इसके काम को देखते हुए इसका मिशन दो बार बढ़ाया गया था। उसके बाद वैज्ञानिकों का मानना था कि ईंधन खत्म हो चुके इस यान को अगर शनि के वातावरण में यूं ही छोड़ दिया जाता तो उसके शनि के चंद्रमा टाइटन और पॉलीड्यूसेस से टकराने की आशंका थी। लेकिन वे ऐसा नहीं चाहते थे क्योंकि शनि के इन दोनों चंद्रमाओं पर जीवन की प्रबल संभावनाएं हैं, जिसे किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाने का खतरा वे नहीं उठाना चाहते थे। इसके बाद वैज्ञानिकों ने इसे शनि के वातावरण में ही नष्ट करने का फैसला किया था। मिशन 15 सितंबर 2017 को समाप्त हो गया था।जनवरी 2005 में इस मिशन के द्वारा शनि के सबसे बड़े चंद्रमा टाइटन पर जानकारी एकत्र करने के लिये ह्यूजेंस प्रोब (Huygens probe) को भी उतारा गया था।

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