आरबीआई का ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO)

चर्चा में क्यों

  • भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्तीय प्रणाली में तरलता बढ़ाने के लिए 2 जुलाई को विशेष ओपन मार्केट ऑपरेशंस (Open Market Operations) चलाया।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • इस विशेष ओएमओ सत्र में 10,000 करोड़ रुपये की सरकारी सिक्युरिटीज की एक साथ खरीद और बिक्री की गई।
  • यह अभियान अमेरिका के फेडरल रिजर्व के ऑपरेशन ट्विस्ट (Operation Twist) के जैसा है, जिसके तहत 2011-12 में दीर्घकालिक सरकारी कर्ज के लिए अल्पकालिक ट्रेजरी सिक्युरिटीज की अदला-बदली की गई थी।
  • ओएमओ के तहत 2 जुलाई 2020 को आरबीआई ने 2021 साल परिपक्व हो रही 10,000 करोड़ रुपये मूल्य की अल्पकालिक सिक्युरिटीज की बिक्री की जबकि 2027 और 2033 के बीच परिपक्व हो रही समान राशि की दीर्घकालिक सिक्युरिटीज खरीदीं।

क्या है ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO)?

  • ओपन मार्केट ऑपरेशंस या खुले बाजार की गतिविधियां भारतीय रिज़र्व बैंक या किसी भी देश के केंद्रीय बैंक द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों और ट्रेज़री बिलों की बिक्री एवं खरीद प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति को विनियमित करना है।
  • ओपन मार्केट ऑपरेशन के माध्यम से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) किसी वर्ष के दौरान तरलता यानी नकदी की स्थिति को बनाये रखता है और ब्याज दर एवं मुद्रास्फीति की दर पर इसके प्रभाव को कम करता है।
  • ओपन मार्केट ऑपरेशन की प्रक्रिया के तहत बाजार में जब नकदी की कमी होती है, तब आरबीआई बांड खरीदकर बाजार में नकदी पहुंचाता है।
  • इसके विपरीत जब बाजार में अधिक नकदी हो जाती है, तब वह बांड बेचकर बाजार से नकदी सोख लेता है।
  • ओपन मार्केट ऑपरेशन के तहत रिजर्व बैंक लोगों से प्रत्यक्ष रूप न जुड़कर वाणिज्यिक बैंकों के माध्यम से ओपन मार्केट का संचालन करता है।

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