चर्चा में क्यों?

  • दुधवा नेशनल पार्क में अत्यंत दुर्लभ प्रजाति की वनस्पति ‘ग्राउंड आर्किड’ की प्रजाति खोजी गई है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • उत्तर प्रदेश के दुधवा टाइगर रिजर्व में घास के मैदानों में एक शोध टीम ने अत्यंत दुर्लभ प्रजाति की वनस्पति ‘ग्राउंड आर्किड’ को खोज निकाला है।
  • इसका वानस्पतिक नाम ‘यूलोफिया ऑब्ट्यूस’ ((Eulophia obtusa) है जो आर्किड की एक प्रजाति है और आर्किडेसी परिवार की सदस्य है।
  • यह वनस्पति बांग्लादेश में वर्ष 2008 व 2014 में देखी गई लेकिन, वहां इसके फूलों का रंग अलग था।
  • इस प्रजाति को आखिरी बार पीलीभीत में 1902 में देखा गया था। इंग्लैंड में क्यू हर्बेरियम के दस्तावेजों में यह बात दर्ज है।
  • 19वीं सदी में गंगा नदी के मैदानी इलाकों से वनस्पति वैज्ञानिक इस प्रजाति को यहां ले आए थे। लेकिन पिछले 100 सालों से इसे फिर कभी नहीं देखा गया।
  • इस प्रजाति को IUCN की रेड लिस्ट में ‘गंभीर रूप से संकटग्रस्त’ (Critically Endangered) श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया है।

ऑर्किड (Orchid)

  • ऑर्किड वनस्पति जगत के सुंदर पुष्प हैं जिनमें अदभुत रंग-रूप, आकार एवं आकृति तथा लंबे समय तक ताज़ा बने रहने का गुण होता है।
  • अनूठे आकार और अलंकरण के साथ ऑर्किड में जटिल पुष्प संरचना होती है।
  • यह जैव-परागण में सहायता प्रदान करती है तथा इसे अन्य पौधों के समूहों से क्रमिक रूप से श्रेष्ठ बनाती है।
  • आर्किड परिवार को CITES (Convention on International Trade on Endangered Species of Wild Fauna and Flora) के परिशिष्ट II के अंतर्गत सूचीबद्ध किया गया है और इसलिये किसी भी जंगली ऑर्किड के विश्व स्तर पर व्यापार पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
  • भारत में आर्किड की लगभग 1300 प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
  • डेंड्रोबियम (Dendrobium), फेलेनोप्सिस (Phalaenopsis), ऑन्किडियम (Oncidium) और सिंबिडियम (Cymbidium), जैसे ऑर्किड फूलों की खेती हेतु काफी लोकप्रिय हैं।

दुधवा नेशनल पार्क

  • यह उत्तर प्रदेश के खीरी जिले में स्थित है।
  • एक फ़रवरी 1977 को इसकी स्थापना की गई।
  • 1987-88 में यहां टाईगर रिजर्व की स्थापना की गई।
  • टाईगर रिजर्व बनाने के लिए किशनपुर वन्य जीव विहार को दुधवा राष्ट्रीय उद्यान में शामिल कर लिया गया ।
  • इस संरक्षित क्षेत्र का क्षेत्रफ़ल 884 वर्ग कि०मी० है।
  • यहां पक्षियों की लगभग 400 प्रजातियों के अलावा, हिरन, बाघ, तेन्दुए, और 1984-85 में पुनर्वासित किए गये गैंडे की प्रजातियां पाई जाती हैं।