मन्नार की खाड़ी में दुर्लभ प्रजाति की मछली की खोज

सेंट्रल मरीन फिशरीज़ रिसर्च इंस्टीट्यूट (CMFRI) के शोधकर्त्ताओं ने मन्नार की खाड़ी में के सेतुकराई तट पर एक दुर्लभ प्रजाति की मछली की खोज की है। ऐसा पहली बार हुआ है कि जब इस खाड़ी के भारतीय जल क्षेत्र में कोई विशेष जलीय प्रजाति जीवित अवस्था में खोज़ी गई हो।
शोधकर्ताओं के अनुसार छिपकर रहने वाली और ज़हरीले काँटों वाली यह मछली ‘बैंड-टेल स्कॉर्पियन फिश’ की एक दुर्लभ प्रजाति है।इसका जूलॉजिकल नाम स्कोर्पेनोसप्सिस नेगलेक्टा (Scorpaenopsis neglecta) है। यह अपना रंग बदलने में भी सक्षम है।
मछली को ‘स्कोर्पियन फ़िश’ कहे जाने का प्रमुख कारण इसकी रीढ़ में न्यूरोटॉक्सिक (Neurotoxic Venom) नामक विषैले सायन की उपस्थिति है।
मन्नार की खड़ी:
मन्नार की खाड़ी दक्षिण-पूर्वी भारत और पश्चिमी श्रीलंका के बीच हिंद महासागर का प्रवेश मार्ग है। इसकी सीमा पर पूर्वोत्तर में रामेश्वरम आदम का पुल और मन्नार द्वीप है। यह खाड़ी 130 से 275 किमी चौड़ी और 160 किमी लंबी है। इसमें ताम्रपर्णी (भारत) और अरुवी (श्रीलंका) नदी सहित अनेक नदियाँ मिलती है।मन्नार की खाड़ी श्रीलंका तट के पास मिलने वाले मोतियों के लिए जानी जाती है।
यह इलाका समुद्री जैव विविधता के मामले में दुनिया के सबसे धनी क्षेत्रों में से एक है।यूनेस्को के मुताबिक मन्नार की खाड़ी में 4,223 समुद्री प्रजातियों का वास है तथा यह जैव विविधता के मामले में भारत के सबसे संपन्न तटीय क्षेत्रों में से एक है। 1989 में इसे बयोस्फेयर रिजर्व का दर्जा दिया गया था।

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