सर्विस सेक्टर के लिए पर्चेजिंग मैनेजर इंडेक्स (PMI) जारी

चर्चा में क्यों?

  • आईएचएस मार्किट की ओर से 3 जुलाई 2020 को जारी पर्चेजिंग मैनेजर इंडेक्स (Purchasing Manager’s Index,PMI) के अनुसार जून में सर्विस सेक्टर का पीएमआई जून में 33.7 रहा है। मई की तुलना में इसमें 21.1 अंक की तेजी दर्ज की गई है।
  • अप्रैल में इंडेक्स 5.4 और मई में 12.6 दर्ज किया गया था। हालांकि, यह लगातार चौथा महीना है जब इंडेक्स 50 से नीचे रहा है।

गिरावट के कारण

  • नए ऑर्डरों में कमी और कमजोर कारोबारी धारणा ।
  • मई में ऐतिहासिक छंटनी के बाद कंपनियों ने जून में भी छंटनी जारी रखी।
  • कंपनियों का कहना है कि काम नहीं होने के कारण उन्होंने छंटनी की है।

क्या है पीएमआई?

  • पीएमआई विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों (manufacturing and services sectors)में व्यावसायिक गतिविधियों या आर्थिक सेहत मापने का एक संकेतक है। यह एक सर्वेक्षण-आधारित प्रणाली है।
  • पीएमआई की गणना विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों हेतु अलग-अलग की जाती है जिसके पश्चात् एक समग्र सूचकांक का तैयार किया जाता है।
  • पीएमआई को 0 से 100 तक के सूचकांक पर मापा जाता है।
  • इंडेक्स का 50 से कम रहना पिछले महीने के की तुलना में गिरावट को और 50 से ऊपर रहना वृद्धि को दर्शाता है, जबकि 50 का अंक स्थिरता का द्योतक है।
  • पीएमआई 5 प्रमुख कारकों पर आधारित होता है। इन पांच प्रमुख कारकों में नए ऑर्डर, इन्‍वेंटरी स्‍तर, प्रोडक्‍शन,सप्‍लाई डिलिवरी और रोजगार वातावरण शामिल हैं।
  • पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्‍स को 1948 में अमेरिका स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ सप्लाई मैनेजमेंट (ISM) ने शुरू किया जो कि सिर्फ अमेरिका के लिए काम करती है।
  • जबकि आईएचएस मार्किट ग्रुप दुनिया के 30 से ज्‍यादा देशों में करती है। यह दुनिया भर में कारोबारी गतिविधियों के लिए सबसे ज्यादा देखा जाने वाला सूचकांक है।
  • कंपनी अपनी पीएमआई आंकड़ों को स्‍पांसर के नाम के साथ प्रदर्शित करती है। फिलहाल निक्‍केई पीएमआई आंकड़ों के आधार पर भारत में इकोनॉमी की दिशा का अनुमान लगाया जाता है।
  • इससे पहले यही आंकड़ें एचएसबीसी पीएमआई के नाम से जारी होते थे।

पीएमआई का महत्व

  • कई देशों के केंद्रीय बैंक ब्याज दरों पर फैसला करने के लिए इस सूचकांक की मदद लेते हैं। क्योंकि अच्छे पीएमआई आंकड़े बताते हैं कि देश में आर्थिक हालात सुधर रहे हैं और अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ रही है, जिसकी वजह से कंपनियों को ज्यादा सामान बनाने के ऑर्डर मिलते हैं।
  • अगर कंपनियों का उत्पादन बढ़ता है तो लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं। इसका देश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए अर्थशास्त्री भी पीएमआई आंकड़ों को मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ का अच्छा संकेतक मानते हैं।
  • वित्तीय बाजार में भूमिका वित्तीय बाजार में भी पीएमआई की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि, परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स कंपनियों की आय का संकेत देता है।
  • बांड बाजार और निवेशक दोनों ही इस सूचकांक पर नजर रखते हैं। इसके आधार पर ही निवेशक प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं में निवेश करने का फैसला करते हैं।

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