कोविड-19 जैसी अन्य महामारियों का आगे भी सामना करना पड़ सकता है

चर्चा में क्यों?

  • एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर पशुजनित बीमारियों ( Zoonotic Diseases) की रोकथाम के प्रयास नहीं किये गए तो कोविड-19 जैसी अन्य महामारियों का आगे भी सामना करना पड़ेगा।

महत्वपूर्ण बिंदु:

  • संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और ‘अंतर्राष्ट्रीय पशुधन अनुसंधान संस्थान’( ‘International Livestock Research Institute’) नैरोबी (कीनिया) की साझा रिपोर्ट में बढ़ती महामारियों के लिए पशुओं से मिलने वाले प्रोटीन की माँग में वृद्धि होने, सघन व ग़ैर-टिकाऊ खेती के बढ़ने, वन्यजीवों के दोहन और इस्तेमाल में वृद्धि और जलवायु संकट जैसे कारकों को ज़िम्मेदार बताया गया है।
  • हाल ही में जारी ‘प्रिवेंटिंग द नेक्स्ट पेंडेमिक: ज़ूनोटिक डिजीज़ एंड हाउ टू ब्रेक द चेन ऑफ ट्रांसमिशन’ ‘Preventing the Next Pandemic: Zoonotic diseases and how to break the chain of transmission’ नामक इस रिपोर्ट में पशुजनित बीमारियों के बढ़ते उभारों के लिए ज़िम्मेदार सात रुझानों की पहचान की गई है और वैश्विक महामारियों की रोकथाम के लिए दस सिफ़ारिशें भी पेश की गई हैं।
  • पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाली संक्रामक बीमारियों को ज़ूनॉटिक बीमारियाँ ((Zoonotic diseases) कहा जाता है जो बैक्टीरिया, परजीवियों और वायरसों के कारण होती हैं।
  • ऐसे रोग पहले जानवरों को संक्रमित करते हैं और फिर उनसे होते हुए ये बीमारियाँ इन्सानों को अपना निशाना बनाती हैं।
  • हर साल लगभग 20 लाख लोगों की मौत ऐसी पशुजनित बीमारियों से हो जाती है जिन पर ध्यान नहीं दिया जाता। अधिकाँश मौतें निम्न और मध्य आय वाले देशों में होती हैं।
  • इस रिपोर्ट का प्रकाशन 6 जुलाई को ‘विश्व ज़ूनोसिस दिवस’ (World Zoonoses Day) के अवसर पर किया गया है। 6 जुलाई, 1885 को फ्रांसीसी जीवविज्ञानी लुई पाश्चर द्वारा सफलतापूर्वक जूनोटिक बीमारी रेबीज़ के खिलाफ पहला टीका विकसित किया गया था।

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP)

  • UNEP संयुक्त राष्ट्र की एक विशिष्ट एजेंसी है।
  • इसकी स्थापना 1972 में मानव पर्यावरण पर स्टॉकहोम में आयोजित संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के दौरान की गई थी।
  • UNEP का उद्देश्य मानव पर्यावरण को प्रभावित करने वाले सभी मामलों में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाना तथा पर्यावरण सम्बन्धी जानकारी का संग्रहण, मूल्यांकन एवं पारस्परिक सहयोग सुनिश्चित करना है।
  • इसका मुख्यालय नैरोबी (केन्या) में है।

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