ओज़ोन परत का आर्कटिक के उपर बना छिद्र बंद हुआ

यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट (ECMWF)द्वारा कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (C3S) और कोपरनिकस एटमॉस्फियर मॉनिटरिंग सर्विस (CAMS) ने पुष्टि की है कि ओज़ोन परत पर बना सबसे बड़ा छिद्र बंद हो गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, आर्कटिक के ऊपर बना 10 लाख वर्ग किलोमीटर की परिधि वाला छिद्र बंद हो गया है,उल्लेखनीय है कि यह ओज़ोन परत का सबसे बड़ा छिद्र था। वैज्ञानिकों के अनुसार यह छिद्र उत्तरी ध्रुव पर कम तापमान के परिणामस्वरूप बना था और इसकी खोज वैज्ञानिकों द्वारा इसी वर्ष मार्च माह में की गई थी।
ओज़ोन (Ozone-O3) ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से मिलकर बनने वाली एक गैस है जो वायुमंडल में बेहद कम मात्रा में पाई जाती हैं। पृथ्वी की सतह से 30-32 किमी. की ऊँचाई पर इसकी सांद्रता अधिक होती है। यह हल्के नीले रंग की तीव्र गंध वाली विषैली गैस है। ओज़ोन गैस समतापमंडल (Stratosphere) में अत्यंत पतली एवं पारदर्शी परत के रूप में पाई जाती है। वायुमंडल में ओज़ोन परत हमारे लिए रक्षाकवच का काम करती है क्योंकि यह सूर्य से आने वाले अल्ट्रा-वॉयलेट रेडिएशन यानी पराबैंगनी विकिरण को सोख लेती है। पराबैंगनी विकिरण मनुष्य, जीव जंतुओं और वनस्पतियों के लिये अत्यंत हानिकारक है। सबसे पहले 1970 के दशक में, वैज्ञानिकों ने पाया कि ओजोन परत मानव निर्मित गतिविधियों के कारण समाप्त हो रही है, जिससे पृथ्वी पर जीवन के लिए खतरा पैदा हो गया है।

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