ओपेक प्लस देश कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती पर सहमत

कच्चे तेल के शीर्ष उत्पादक देश कीमतों में तेजी लाने के लिए उत्पादन में कटौती करने पर सहमत हो गए हैं। पेट्रोलियम निर्यातक देशों के समूह (OPEC) और दूसरे तेल उत्पादक देश प्रतिदिन 9.7 मिलियन बैरल उत्पादन कम करने पर सहमत हुए हैं। इसका मकसद तेल की कीमतों को बढ़ाना है।रूस और सऊदी अरब के विवाद तथा कोरोना वायरस महामारी के कारण गिरी मांग से कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें 30 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई हैं। इस समझौते के अनुसार एक मई से ओपेक प्लस देश (15 OPEC और 10 गैर ओपेक देश ) तेल उत्पादन में हर दिन लगभग एक करोड़ बैरल की कटौती करेंगे। इसके साथ ही ओपेक प्लस समूह से अलग अमरीका, कनाडा, ब्राज़ील और नॉर्वे 50 लाख बैरल की कटौती करेंगे। इसी साल जुलाई से दिसंबर के बीच कटौती को कम कर हर दिन 80 लाख बैरल किया जाएगा। इसके बाद जनवरी 2021 से अप्रैल 2022 तक 60 लाख बैरल तक लाया जाएगा।
सऊदी और रूस की ऑइल वॉर क्यों शुरु हुआ?
दरअसल दिसंबर 2016 में रूस और सऊदी अरब ने वियना (ऑस्ट्रिया) स्थित ओपेक मुख्यालय में 11 ग़ैर-ओपेक देशों (अब 10) और 15 ओपेक देशों के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते का उद्देश्य था कि तेल की क़ीमतों को स्थिर रखा जाए और कम नहीं होने दिया जाए। शुरुआत में यह डील छह महीने के लिए थी लेकिन बाद में समय सीमा बढ़ती गई। इसे ओपेक प्लस (OPEC PLUS) कहा गया था। इसमें तय था कि ओपेक और रूस के नेतृत्व वाले ग़ैर-ओपेक तेल उत्पादक देश तेल उत्पादन को लेकर संतुलन बनाए रखने पर काम करेंगे। दिसंबर 2019 में इस समझौते को अप्रैल 20 तक बढ़ा दिया गया था और उम्मीद की जा रही थी कि यह आगे भी जारी रहेगा।
इस बीच रूस और सऊदी अरब ने अपने-अपने आर्थिक हितों के हिसाब से कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए, लेकिन 6 मार्च को अप्रत्याशित घटनाक्रम में सऊदी अरब ने रूस के सामने विएना में तेल उत्पादन में कटौती का प्रस्ताव रखा ताकि मांग के हिसाब से क़ीमत को स्थिर रखा जा सके। रूस ने न केवल इस मांग को ख़ारिज कर दिया बल्कि उसने घोषणा कर दी कि अब वो पहले की तरह वियना समझौते से बंधा नहीं रहेगा।
इसका परिणाम यह हुआ कि ओपेक प्लस समाप्त हो गया। यहीं से रूस और सऊदी अरब में तेल को लेकर विवाद शुरू हुआ जिसे ऑइल वॉर तक कहा जा रहा है। जिसकी वजह से तेल की क़ीमतें और गिरी हैं।
ओपेक (Organization of the Petroleum Exporting Countries-OPEC)
ओपेक में एशिया, अफ्रीका तथा दक्षिण अमेरिका के प्रमुख तेल उत्पादक व निर्यातक देश शामिल हैं, जिनकी दुनिया के कुल कच्चे तेल उत्पादन में लगभग 77 प्रतिशत की हिस्सेदारी है।
ओपेक की स्थापना 14 सितंबर, 1960 को इराक की राजधानी बगदाद में हुई थी।
पेक का सचिवालय ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में है।
ओपेक के पाँच संस्‍थापक देशों में ईरान, इराक, कुवैत, सऊदी अरब व वेनेजुएला शामिल हैं, बाद में इसमें कतर, इंडोनेशिया, लीबिया, संयुक्‍त अरब अमीरात, अल्‍जीरिया, नाइजीरिया, इक्‍वाडोर, गैबोन व अंगोला शामिल हुए।
इंडोनेशिया जनवरी 2009 में ओपेक से हट गया और कुल मिलाकर अभी इसके 15 सदस्‍य देश हैं।
ओपेक प्रतिदिन लगभग तीन करोड़ बैरल कच्चे तेल का उत्‍पादन करता है और सऊदी अरब इसका सबसे बड़ा उत्‍पादक देश है तथा भारत के लिये सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्त्ता भी है।

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