ओडिशा: स्थानीय मोटा अनाज आईसीडीएस और पीडीएस में शामिल

चर्चा में क्यों?

  • ओडिशा सरकार ने स्थानीय मोटे अनाज रागी को ‘एकीकृत बाल विकास सेवा’ (Integrated Child Development Services- ICDS) योजना तथा ‘सार्वजनिक वितरण प्रणाली’ (Public Distribution System-PDS) में शामिल करने का निर्णय लिया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • यह पहल उड़ीसा राज्य द्वारा वर्ष 2017 में शुरु की गई मिलेट मिशन (Millet Mission) का हिस्सा है।
  • मिलेट मिशन के तहत ओडिशा सरकार द्वारा मोटे अनाज की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
  • नई पहल के तहत अब रागी को राज्य में ICDS, PDS, मिड-डे मील और सरकार द्वारा संचालित छात्रावासों में भोजन के रूप में शामिल किया जाएगा।

क्यों शुरु की गई यह पहल?

  • मोटे अनाज प्रोटीन, वसा, खनिज तत्त्व, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, ऊर्जा कैलोरी, कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, कैरोटीन, फोलिक ऐसिड, जिंक तथा एमिनो एसिड आदि के बेहतर स्रोत माने जाते हैं।
  • अत: बेहतर आहार विविधता तथा पोषण संबंधी समस्याओं का समाधान करने की दृष्टि से मोटे अनाजों का बहुत महत्त्व है।
  • इस पहल से सरकार की रागी की जैविक खेती को बढ़ावा देने की पहल को भी बल मिलेगा।

रागी:

  • रागी शुष्क प्रदेशों में उगाई जाने वाली प्रमुख फसल है।
  • यह लाल, काली, बलुआ, दोमट और उथली काली मिट्टी में अच्छी तरह उगाई जाती है।
  • रागी के प्रमुख उत्पादक राज्य कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, सिक्किम, झारखंड और अरुणाचल प्रदेश हैं।
  • रागी में प्रचुर मात्रा में लोहा, कैल्शियम, तथा अन्य सूक्ष्म पोषक तत्त्व होते हैं।
  • यह कैल्शियम का सबसे बड़ा स्रोत है।

Related Posts

Leave a Reply