नेपाल की संसद के निचले सदन ने पारित किया नया राजनीतिक मानचित्र

नेपाल की संसद के निचले सदन (प्रतिनिधि सभा) ने एकमत से नेपाल ने अपने नए राजनीतिक नक्शे को पारित कर दिया है। नेपाल के नए नक्शे को पारित करने के लिए संविधान संशोधन प्रस्ताव लाया गया था। इस प्रस्ताव को नेपाल की संसद में मौजूद 258 सदस्यों ने मंजूरी दी है। इसके बाद यही प्रक्रिया नेपाल की संसद के उच्च सदन (राष्ट्रीय सभा) में दोहराई जाएगी। दोनों सदनों से पारित होने के बाद इसे मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। नेपाल की संसद के इस फ़ैसले पर भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी है कि दावे ऐतिहासिक तथ्य और सबूतों पर आधारित नहीं हैं और ना ही इसका कोई मतलब है।
उल्लेखनीय है कि नेपाल ने जो अपना नया राजनीतिक नक्शा जारी किया है उसमें उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित लिम्पियाधुरा कालापानी और लिपुलेख को नेपाल की सीमा का हिस्सा दिखाया गया है। कालापानी भारत और नेपाल की सीमा निर्धारित करने वाली नदी महाकाली का उद्गगम स्थल है लेकिन अब  नेपाल सरकार महाकाली (शारदा) नदी का स्रोत  लिम्पियाधुरा को बता रही है।
विवाद की शुरुआत
दरअसल नवंबर 2019 में भारत ने अपना नया राजनीतिक नक़्शा जारी किया था जिसमें जम्मू और कश्मीर राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख़ के रूप में दिखाया गया था। इसी मानचित्र में लिम्पियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को भारत का हिस्सा बताया गया था। नेपाल इन इलाक़ों पर लंबे समय से अपना एकतरफा दावा जताता रहा है।इनमें से लिपुलेख दर्रा चीन, नेपाल और भारत की सीमाओं से लगता है। 8 मई 2020 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जब लिपुलेख तक जाने वाली सड़क शुभारंभ किया तो उसके बाद नेपाल ने यह कदम उठाया।
विवाद की वजह
नेपाल और भारत के बीच क़रीब 1880 किलोमीटर सीमा खुली हुई है। दोनों देशों ने 98 फ़ीसदी सीमा को कवर करने वाले नक़्शे को अंतिम रूप दिया है, लेकिन पश्चिमी भाग में  लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा वो क्षेत्र हैं जिन पर नेपाल विवाद बढ़ा रहा है। उल्लेखनीय है कि भारत और नेपाल के बीच सुगौली की संधि (1816) के तहत सीमा निर्धारित की गई थी। सुगौली की संधि ये स्पष्ट रूप से कहती है कि महाकाली नदी का पूरब का भाग नेपाल का है और पश्चिम का भारत का, लेकिन विवाद की जड़ महाकाली नदी का उद्गम है। गुंजी गांव के पास, जहां लिपुलेख जाने वाली सीमा सड़क खोली गई थी, वहां दो छोटी नदियां आकर मिलती है। एक धारा दक्षिण पूर्व में लिम्पियाधुरा की पहाड़ियों से निकलकर आती है तो दूसरी धारा दक्षिण में लिपुलेख से आती है।नेपाल  का कहना है कि महाकाली नदी लिम्पियाधुरा से निकलकर उत्तर पश्चिम में भारत के उत्तराखंड की ओर बढ़ती है।
लेकिन इसके ठीक उलट भारतीय पक्ष का कहना है कि महाकाली नदी का रुख़ नेपाल की ओर उत्तर पूर्व में है और लिपुलेख से निकलने वाली जलधारा ही दरअसल, महाकाली नदी का स्रोत है और इसी से दोनों पड़ोसी देशों की सीमाओं का निर्धारण होता है। नेपाल की प्रतिक्रिया पर भारत ने स्पष्ट कहा कि किसी भी नेपाली क्षेत्र का अतिक्रमण नहीं किया गया है और ये सीमा सड़क कैलाश मानसरोवर की पारंपरिक धार्मिक यात्रा के रूट पर ही बनाई गई है।कालापानी में भारत-चीन युद्ध के दौरान 1950 में आईटीबीपी ने अपनी चौकी भी स्थापित की थी। इसके अलावा सुदूर पश्चिम में स्थित लिम्पियाधुरा को लेकर भी दोनों देशों के बीच विवाद है।

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