सौर तूफानों के अध्ययन के लिए नासा भेजेगा सनराइज मिशन

अमेरिकी अन्तरिक्ष एजेंसी नासा ने 30 मार्च, 2020 को सन रेडियो इंटरफेरोमीटर स्पेस एक्सपेरिमेंट (SunRISE) मिशन की घोषणा की। इस मिशन के द्वारा सूर्य के विशालकाय सौर तूफान का अध्ययन किया जाएगा। इसके तहत छह क्यूबसैट (Cubesats) प्रक्षेपित किए जाएंगे। ये छह सैटेलाइट पृथ्वी की भू-स्थिर कक्षा (Geostationary orbit) में स्थापित किए जाएंगे। नासा के हेलियोफिजिक्स (Heliophysics) प्रोग्राम के लिए यह मिशन “मिशन ऑफ अपोर्चिनिटी” के तौर पर चुना गया है। इस मिशन के तहत क्यूबसैट जुलाई 2023 को प्रेक्षेपित किए जाएंगे और इसकी लागत 62.6 मिलियन यूएस डॉलर होगी।
सौर तूफान क्या है?
सूर्य की सतह पर कभी-कभी बेहद चमकदार प्रकाश दिखने की घटना को सन फ्लेयर (Sun Flare) कहा जाता है और पृथ्वी से ऐसा रोज़ नहीं दिखाई पड़ता। कभी-कभार होने वाली इस घटना के दौरान सूर्य के कुछ हिस्से असीम ऊर्जा छोड़ते हैं और इस ऊर्जा से एक विशेष प्रकार की चमक पैदा होती है जो आग की लपटों जैसी नज़र आती है।अगर यह असीम ऊर्जा लगातार कई दिनों तक निकलती रहे तो इसके साथ सूर्य से अति सूक्ष्म नाभिकीय कण भी निकलते हैं। यह ऊर्जा और कण ब्रह्मांड में फैल जाते हैं। दरअसल, यह बहुत ज़बरदस्त नाभिकीय विकिरण होता है, जिसे सौर तूफान भी कहा जाता है।
सौर तूफान अपने राह में आने वाली हर चीज़ पर असर डालता है। यह वैज्ञानिकों को सूर्य को समझने का मौका भी देता है। अब तक यह पता चला है कि सौर तूफान की वज़ह से ब्रह्मांड में मौजूद कण इतने गर्म हो जाते हैं कि वे भी प्रकाश की गति से यात्रा करने लगते हैं।सूर्य से लगातार आते आवेशित (Charged) कणों से पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र इसकी रक्षा करता है। ये चुंबकीय शक्तियाँ वायुमंडल के आस-पास कवच का काम करती हैं और आवेशित कणों का रुख मोड़ देती हैं, लेकिन सौर तूफान के दौरान कई आवेशित कण इस चुंबकीय कवच को भेद देते हैं।

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