सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) की परिभाषा में व्यापक बदलाव

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1 जून 2020  को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) की परिभाषा को और व्यापक करते हुए घोषणा की कि 250 करोड़ रुपये तक के कारोबार (टर्नओवर) या 50 करोड़ रुपये तक के निवेश वाली संस्थाएं मध्यम उद्यम की श्रेणी में होंगी।
इसके अलावा MSME के लिए कारोबार मानदंड में निर्यात से राजस्व को शामिल नहीं किया जाएगा, जो अपने कार्यों का विस्तार करने और विदेशी बिक्री को आगे बढ़ाने के लिए क्षेत्र को लचीलापन प्रदान करेगा।
नए परिवर्तनों के अनुसार

  • एक करोड़ रुपये से कम के निवेश और पांच करोड़ रुपये के कारोबार वाले व्यवसायों को सूक्ष्म  उद्यमों (Micro Enterprises) के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा।
  • 10 करोड़ रुपये निवेश और 50 करोड़ रुपये के कारोबार वाले उद्योग लघु  उद्यमों (Small Enterprises) के अंतर्गत आएंगे।
  •  20 करोड़ रुपये निवेश और 250 करोड़ रुपये कारोबार वाले उद्यम मध्यम उद्यम (Medium Enterprises) की श्रेणी में आएंगे।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों का भारतीय अर्थव्यवस्था में योगदान

  • MSME भारत के कुल निर्यात में करीब 48% योगदान देते हैं.
  • देश के सकल मूल्य वर्धन (Gross Value Added (GVA) में एमएसएमई क्षेत्र का योगदान 31 % का है
  • 11 करोड़ लोगों को यह सेक्टर सीधे रोजगार देता है

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