1 अप्रैल, 2020 से प्रभावी होगा बैंकों का विलय

1 अप्रैल 2020 से दस बैंकों के विलय के बाद यह चार बैंक में बदल जाएंगे। इसके साथ ही भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की संख्या 18  से घटकर 12 हो जाएगी। इन बैंकों को 55,250 करोड़ रुपये दिये जाएंगे। इसके बारे में रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से अधिसूचना जारी हो गई हैं। अधिसूचना में कहा गया है –

  • 1 अप्रैल 2020 से इलाहाबाद बैंक की सभी शाखाएं इंडियन बैंक की शाखाओं के रूप में काम करेंगी।
  • ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स व यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की शाखाएं पंजाब नैशनल बैंक (PNB) की शाखाओं के रूप मेंकाम करेंगी।
  • सिंडिकेट बैंक की शाखाएं केनरा बैंक की शाखाओं के रूप में काम करेंगी।
  •  आंध्रा बैंक व कॉर्पोरेशन बैंक की शाखाएं यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की शाखाओं के रूप में काम करेंगी।

भारत में बैंकों के विलय का इतिहास
बैंकों की स्थिति को सुधारने और ग्राहकों के हितों की रक्षा करने के लिये भारत में बैंक विलय की प्रक्रिया 1960 के दशक में शुरू हुई थी।वर्ष 1969 को भारतीय बैंकिंग प्रणाली में एक महत्त्वपूर्ण वर्ष माना जाता है, क्योंकि इसी वर्ष इंदिरा गांधी की सरकार ने देश की बैंकिंग प्रणाली को पूर्णतः बदलते हुए देश के 14 निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया था। वर्ष 1969 के बाद वर्ष 1980 में भी देश के 6 निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया।
भारतीय बैंक संघ के अनुसार वर्ष 1985 से अब तक देश में छोटे-बड़े कुल 49 बैंकों का विलय हो चुका हैं।

  • देश के कुछ महत्त्वपूर्ण बैंक विलय
    वर्ष 1993-94 में पंजाब नेशनल बैंक और न्यू इंडिया बैंक का विलय किया गया था, उल्लेखनीय है कि यह देश का पहला दो राष्ट्रीय बैंकों का विलय था।
  • वर्ष 2004 में ओरिएण्टल बैंक ऑफ कॉमर्स और ग्लोबल ट्रस्ट बैंक का विलय।
    वर्ष 2008 में स्टेट बैंक ऑफ सौराष्ट्र और SBI का विलय।
  • वर्ष 2017 में SBI और उसके 5 सहयोगी बैंकों का विलय।
  • वर्ष 2019 में देना बैंक और विजया बैंक का विलय बैंक ऑफ बड़ौदा में ।

नरसिंहम समिति ने की थी सिफारिश
बैंकिंग क्षेत्र में सुधार के लिये सरकार ने वर्ष 1991 में एम. नरसिंहम की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि बैंकिंग क्षेत्र में चार स्तरीय ढाँचे की व्यवस्था की जाए जिसमें तीन या चार बड़े बैंक होंगे। SBI इसमें शामिल होगा और इसे शीर्ष स्थान प्राप्त होगा तथा यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अपना कार्य कर सकेगा।
इसके अलावा वर्ष 1998 में भी सरकार द्वारा एम. नरसिंहम की अध्यक्षता में एक अन्य समिति का गठन किया गया था। इस समिति का मुख्य कार्य भारत के बैंकिंग सुधारों की समीक्षा करना और उसके लिये उपर्युक्त सुझाव देना था। समिति ने अप्रैल 1998 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कई अन्य सिफारिशों के साथ बड़े बैंकों के विलय की सिफारिश भी की थी।

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