महाराष्ट्र के स्कूलों में पहली से छठी तक मराठी अनिवार्य

महाराष्ट्र के स्कूलों में कक्षा पहली से छठीं के लिए शैक्षणिक वर्ष 2020-21 से मराठी भाषा एक अनिवार्य विषय बन जाएगी। स्कूल का अध्यापन माध्यम अंग्रेजी, हिंदी या मराठी कोई भी हो लेकिन यह नियम अनिवार्य रुप से लागू होगा। महाराष्ट्र सरकार ने 4 जून 2020 को इस संबंध में आदेश दिए गए हैं।उल्लेखनीय है कि फरवरी, 2020 में ‘महाराष्ट्र कंपलसरी टीचिंग एंड लर्निंग ऑफ मराठी लैंग्वेज़ इन स्कूल बिल, 2020 को राज्य विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित किया गया था। इस बिल के प्रावधानों के अनुसार, इस नियम का पालन नहीं करने पर स्कूलों पर जुर्माना लगाया जा सकता है। वर्तमान में महाराष्ट्र में अधिकांश शिक्षा बोर्ड मराठी को केवल एक विषय के रूप में कक्षा 8 तक ही पढ़ाते हैं।
मराठी भाषा के बारे में
मराठी भारतीय संविधान में आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 22 भाषाओं में से एक है। इस भाषा की उत्पत्ति पहली-दूसरी शताब्दी ईस्वी में संस्कृत की महाराष्ट्री प्राकृत बोली से हुई मानी जाती है। 15वीं एवं 16वीं शताब्दी में आधुनिक महाराष्ट्री का विकास शुरु हुआ। आरंभ में इसे मोड़ी लिपि मे लिखा जाता था, लेकिन लिखावट कठिन होने के कारण 1950 के बाद से मराठी भाषा लेखन में देवनागरी लिपि का ही प्रयोग हो रहा है। ऐतिहासिक रुप से इसका प्रथम अभिलेख 1012 ईस्वी का मिला है। संत ज्ञानेश्वर की ज्ञानेश्वरी (1290 ) विद्वानों द्वारा प्रशंसित मराठी का पहला उत्कृष्ट ग्रन्थ है।

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