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खोलोंगछु जलविद्युत परियोजना

चर्चा में क्यों?

  • भारत और भूटान ने 600 मेगावाट की खोलोंगछु जलविद्युत परियोजना (Kholongchhu hydroelectric Project) समझौते पर हस्‍ताक्षर किए हैं।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • 600 मेगावाट की रन-ऑफ-द- रिवर परियोजना पूर्वी भूटान में त्राश्यांगत्से जिले (Trashiyangtse District) में खलोंगछु (Kholongchhu) नदी के निचले हिस्से पर स्थित है।
  • परियोजना में 95 मीटर की ऊंचाई पर कंक्रीट बांध से पानी के साथ चार 150 मेगावाट टरबार्इन के भूमिगत बिजलीघर को बनाया जाएगा।
  • इसे भूटान के ड्रुक ग्रीन पावर कॉर्पोरेशन (DGPC) और भारत के सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड (SJVNL) के बीच गठित एक संयुक्त उद्यम कंपनी खोलोंगछु हाइड्रो एनर्जी लिमिटेड द्वारा पूरा किया जाएगा।
  • इससे पहले भारत और भूटान के प्रधानमंत्रियों द्वारा अगस्त 2019 में 720 मेगावाट की मंगदेछु पनबिजली परियोजना (Mangdechhu hydroelectric project) का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया गया था।
  • इसके साथ द्विपक्षीय सहयोग की चार पनबिजली परियोजनाएं 336 मेगावाट की चूका एचईपी (Chukha HEP), 60 मेगावाट कुरिचू एचईपी (Kurichhu HEP), 1,020 मेगावाट ताला एचईपी (Tala HEP) और 720 मेगावाट मंगडछू एचईपी (Mangdechhu HEP), कुल मिलाकर 2,100 मेगावाट है, जो भूटान में पहले से ही चालू हैं।

रन ऑफ द रिवर प्रोजेक्ट क्या है?

  • रन ऑफ द रिवर’ जल-विद्युत परियोजना से तात्पर्य ऐसी परियोजना से है, जिसमें वादियों के जल प्रवाह में बिना बाधा डाले जल-विद्युत का उत्पादन किया जाता है।
  • इसमें नदी मार्ग में बिना बड़े बांध बनाए प्रवाहित जल का उपयोग किया जाता है।

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