परिसंपत्तियों के मौद्रिकरण को बढ़ावा देने के लिए अनोखी पहल

चर्चा में क्यों?

  • खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) ने अपने प्रकार की पहली पहल के रूप में, अपनी परिसंपत्तियों के मौद्रिकरण को बढ़ावा देने के लिए चंदन और बांस के वृक्षारोपण की शुरुआत की है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • चंदन और बांस के व्यवसायिक वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करने के लिए, केवीआईसी ने 262 एकड़ जमीन में फैले हुए अपने नासिक प्रशिक्षण केंद्र में चंदन और बांस के 500 पौधे लगाने की मुहिम की शुरुआत कर दी है।
  • केवीआईसी के लिए परिसंपत्तियों का निर्माण करने के उद्देश्य के साथ, चंदन के वृक्षारोपण की योजना भी बनाई गई है क्योंकि अगले 10 से 15 वर्षों में इसके माध्यम से 50 करोड़ से 60 करोड़ रुपये के बीच आय का अनुमान है।
  • चंदन का एक पेड़ 10 से 15 साल में परिपक्व हो जाता है और वर्तमान दर के अनुसार, 10 लाख रुपये से 12 लाख रुपये तक बिकता है।
  • इसी प्रकार, असम से लाई गई अगरबत्ती की लकड़ी बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाले बांस की एक विशेष किस्म, बम्बुसा तुलदा (Bambusa Tulda) को महाराष्ट्र में लगाया गया है, जिसका उद्देश्य स्थानीय अगरबत्ती उद्योग को समर्थन प्रदान करना और प्रशिक्षण केंद्रों के लिए नियमित आय उत्पन्न करना है।

खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (Khadi and Village Industries Commission):

  • यह ‘खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग अधिनियम, 1956’ के तहत एक सांविधिक निकाय (Statutory Body) है।
  • यह भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (Ministry of MSME) के अंतर्गत आने वाली एक मुख्य संस्था है।
  • इसके वर्तमान अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना हैं।

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