अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की राष्ट्रीय सूची

संस्कृति मंत्रालय ने अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage-ICH) की राष्ट्रीय सूची जारी की है। उल्लेखनीय है कि अमूर्त संस्कृति किसी समुदाय, राष्ट्र, समाज आदि की वह विरासत है जो सदियों से उस समुदाय या राष्ट्र की चेतना व कौशल से समृद्ध होती रहती है। भारत में अनोखी अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (ICH) की लंबी सूची है,जिसमें 100 से सांस्कृतिक विरासतें, परंपराएं और पर्व, त्यौहर को शामिल किया गया है, जिनमें से 13 को यूनेस्को (UNESCO Intangible Cultural Heritage) द्वारा मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में भी मान्यता दी है।

इस साल राष्ट्रीय सूची में हिमाचल प्रदेश के सोलन, शिमला और सिरमौर जिले का करियाला लोक रंगमंच,मंडी का लुड्डी डांस और बौद्ध धर्म की प्राचीन भारतीय चिकित्सा प्रणाली सोवा रिंग्पा शामिल किए गए हैं। इसके अलावा हिमाचल सहित लगभग समस्त उत्तर भारत में फैले जंगम समुदाय के लोगों का जंगम ज्ञान भी इस सूची में दर्ज किया गया है।

उत्तराखंड के विशेषकर कुमाऊं मंडल की सुविख्यात एपण कला, हरिद्वार का कुंभ मेला, पिथौरागढ़ का मुखौटों के साथ होने वाला हिल जात्रा उत्सवऔर चमोली जिले के चमोली जिले के दर्दखंडा घाटी के सालूर डुंगरा गांव में स्थित भुमियाल देवता के मंदिर के प्रांगण में हर साल मनाया जाने वाला पारंपरिक अनुष्ठान थियेटर का एक रूप रम्माण भी शामिल किया गया है।

यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त अमूर्त सांस्कृतिक विरासतों की सूची में शामिल भारतीय अमूर्त विरासतें

(1) वैदिक जप की परंपरा
(3) रामलीला, रामायण का पारंपरिक प्रदर्शन
(3)कुटियाट्टम, संस्कृत थिएटर
(4) राम्माण, गढ़वाल हिमालय के धार्मिक अनुष्ठान, भारत
(5) मुदियेट्टू, अनुष्ठान थियेटर और केरल का नृत्य नाटक
(6) कालबेलिया लोक गीत और राजस्थान के नृत्य
(7) छऊ नृत्य
(8) लद्दाख का बौद्ध जप: हिमालय के लद्दाख क्षेत्र, जम्मू और कश्मीर, भारत में पवित्र बौद्ध ग्रंथों का पाठ
(9) मणिपुर का संकीर्तन, पारंपरिक गायन, नगाडे और नृत्य
(10) पंजाब के ठठेरों द्वारा बनाए जाने वाले पीतल और तांबे के बर्तन
(11) योग
(12) नवरोज़, नोवरूज़, नोवरोज़, नाउरोज़, नौरोज़, नौरेज़, नूरुज़, नोवरूज़, नवरूज़, नेवरूज़, नोवरूज़
(13) कुंभ मेला।

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