हरिके झील में 13 साल बाद दिखी इंडस डॉल्फिन

कोरोनावायरस से बचाव के लिए पंजाब में लगे कर्फ्यू के कारण हवा का प्रदूषण खत्म होने के साथ-साथ नदियों का पानी भी साफ हो गया है। इसी की बदौलत कभी न दिखने वाले जीव-जंतु अब उन जगहों पर भी आ रहे हैं, जहां वहां बरसों से नहीं आए थे। इसी तरह हरिके झील में दुर्लभ हो चुकी इंडस डॉल्फिन 13 साल बाद दिखाई दी। वर्ल्ड वाइड फंड और फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के अधिकारियों के अनुसार इससे पहले 2007 साल में इंडस डॉल्फिन दिखी थीं। ये करमूवाला, गगड़ेवाल, धुंधा और हरिके नोज प्वाइंट तक खेलती नजर आती थीं, मगर उसके बाद पानी में गंदगी बढ़ती गई और यह मछलियां झील के अंदरूनी भागों में चली गईं।
हरि-के-पट्टन’ के नाम से विख्यात यह विशाल आर्द्रभूमि उत्तरी भारत में सबसे बड़ी है जो पंजाब में व्यास एवं सतलुज नदियों के संगम पर स्थित है। पंजाब के तरन साहिब ज़िले में स्थित हरिके आर्द्रभूमि एवं पक्षी अभयारण्य का निर्माण 1953 में किया गया था जो अमृतसर, फ़िरोज़पुर एवं कपूरथला तक फैला हुआ है। आर्द्रभूमि के ईको-सिस्टम के अंतर्गत 4,100 हेक्टेयर क्षेत्रफल आता है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त रामसर स्थल (Ramsar site) है।
यहां मिलने वाले पक्षियों की प्रजातियों में जलकाग, कारिम, करियाहंस, सफेद पंखों वाला त्रिगुट, कलगी वाली बत्तख, सफेद आंखों वाला हंस प्रमुख होते हैं। इस आर्द्रभूमि में अनेक प्रकार के सर्प, कछुए एवं मछलियां भी पाई जाती हैं। सिंधु नदी में पाई जाने वालीं दुर्लभ डॉल्फिन भी यहां पर पाई जाती हैं।
इंडस डॉल्फिन
यहां पाई जाने वाली पाई जाने वाली इंडस डॉल्फिन (सिंधु नदी डॉल्फिन)को पंजाब राज्य का राजकीय जलीय जीव घोषित किया गया। पंजाब में पाई जाने वाली यह डॉल्फिन लुप्त होने के कगार पर पहुंच गई है।
• सिंधु नदी डॉल्फिन ताजे पानी के डॉल्फिन में दूसरा सर्वाधिक संकटापन्न प्रजाति है.
• सिंधु नदी (पाकिस्तान) में इसकी संख्या 1800 है और ब्यास नदी में इसकी संख्या महज 8 से 10 है.
• विश्व में नदी डॉल्फिन की केवल सात प्रजातियां और उपप्रजातियां पाई जाती हैं जिनमें से सिंधु नदी डॉल्फिन भी एक है.
• यह विश्व के सर्वाधिक दुर्लभ स्तनधारी जीवों में से एक है. ऐसा माना जाता है कि डॉल्फिन देख नहीं सकती है.
• ऐसा कहा जाता है इन मछलियों का उद्भव प्राचीन टेथिस सागर में हुआ था और उसके सूख जाने के पश्चात वहीं के पास की नदियों को अपना पर्यावास बना लिया.
• इसका वैज्ञानिक नाम प्लैटेनिस्ता माइनर (Platanista minor) है.

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