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भारत ने किया सिंधु आयुक्तों की बैठक टालने का अनुरोध

भारत ने पाकिस्तान से कोरोनावायरस (COVID-19) महामारी के कारण उत्पन्न स्थिति को देखते हुए सिंधु आयुक्तों की बैठक टालने का अनुरोध किया है। हालांकि, भारत के इस अनुरोध पर पाकिस्तान ने फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। उल्लेखनीय है कि दोनों देशों के बीच हुए सिंधु जल समझौते के अनुसार, हर साल 31 मार्च को सिंधु आयुक्तों की बैठक होती है। साल में कम-से-कम एक बार यह बैठक भारत और पाकिस्तान में बारी-बारी से आयोजित की जाती है। सिंधु आयुक्तों की पिछली बैठक अगस्त 2018 में लाहौर में हुई थी।
13 फरवरी 2020 को भारत के सिंधु आयुक्त पीके सक्सेना ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष सैयद मुहम्मद मेहर अली शाह के सामने मार्च के दूसरे पखवाड़े में बैठक करने का प्रस्ताव रखा था। 12 मार्च को मेहर अली शाह ने सक्सेना का अनुरोध स्वीकार करते हुए कहा था कि एजेंडे का विस्तृत विवरण निर्धारित समय पर तय कर लिया जाएगा। लेकिन बदली हुई परिस्थितियों में भारत ने इस बैठक को टालने का अनुरोध किया है।
क्या है सिंधु जल समझौता?
1947 में आज़ादी मिलने और देश विभाजन के बाद अन्य कई मुद्दों की तरह भारत और पाकिस्तान के बीच पानी के मुद्दे को लेकर भी विवाद शुरू हो गया।
जब इस मुद्दे का कोई हल नज़र नहीं आया तो 1949 में अमेरिका की टेनेसी वैली अथॉरिटी के पूर्व प्रमुख डेविड लिलियेन्थल ने इस समस्या को राजनीतिक के बजाय तकनीकी तथा व्यापारिक स्तर पर सुलझाने की सलाह दी।
उन्होंने दोनों देशों को राय दी कि वे इस मामले में विश्व बैंक से मदद भी ले सकते हैं। सितंबर 1951 में विश्व बैंक के तत्कालीन अध्यक्ष यूजीन रॉबर्ट ब्लेक ने मध्यस्थता करना स्वीकार कर लिया।
इसके बाद सालों चली बातचीत के बाद 19 सितंबर, 1960 को भारत और पाकिस्तान के बीच समझौता हुआ। इसे ही 1960 की सिंधु जल समझौताकहते हैं।
इस समझौते पर भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान ने रावलिपिंडी में दस्तखत किये थे।
12 जनवरी, 1961 से संधि की शर्तें लागू कर दी गई थीं। संधि के तहत 6 नदियों के पानी का बँटवारा तय हुआ, जो भारत से पाकिस्तान जाती हैं।
संधि की शर्तें
1. समझौते के अंतर्गत सिंधु नदी की सहायक नदियों को पूर्वी और पश्चिमी नदियों में विभाजित किया गया। सतलज, ब्यास और रावी नदियों को पूर्वी नदी बताया गया जबकि झेलम, चेनाब और सिंधु को पश्चिमी नदी बताया गया।
2. समझौते के अनुसार पूर्वी नदियों का पानीभारत बिना रोकटोक के इस्तेमाल कर सकता है जबकि पश्चिमी नदियों का पानी पाकिस्तान के लिए होगा लेकिन समझौते के भीतर कुछ इन नदियों के पानी का कुछ सीमित इस्तेमाल का अधिकार भारत को दिया गया, जैसे बिजली बनाना, कृषि के लिए सीमित पानी. अनुबंध में बैठक, साइट इंस्पेक्शन आदि का प्रावधान है।
3. समझौते के अंतर्गत एक स्थायी सिंधु आयोग की स्थापना की गई. इसमें दोनो देशों के कमिश्नरों के मिलने का प्रस्ताव था। ये कमिश्नर हर कुछ वक्त में एक दूसरे से मिलेंगे और किसी भी समस्या पर बात करेंगे।
4. अगर कोई देश किसी प्रोजेक्ट पर काम करता है और दूसरे देश को उसकी डिज़ाइन पर आपत्ति है तो दूसरा देश उसका जवाब देगा, दोनो पक्षों की बैठकें होंगी। अगर आयोग समस्या का हल नहीं ढूंढ़ पाती हैं तो सरकारें उसे सुलझाने की कोशिश करेंगी।
5. इसके अलावा समझौते में विवादों का हल ढूंढने के लिए तटस्थ विशेषज्ञ की मदद लेने या कोर्ट ऑफ़ आर्ब्रिट्रेशन में जाने का भी रास्ता सुझाया गया है।

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