लद्दाख की गलवान घाटी में भारत-चीन के बीच हिंसक संघर्ष

केन्द्र शासित प्रदेश लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC)पर 15 जून 2020 को भारत और चीनी सेना के बीच जारी लंबे समय तनाव के दौरान हिंसक झड़प हो गई जिसमें भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए। चीन की सेना को भी संघर्ष में नुकसान उठाना पड़ा है।
गलवान घाटी (Galwan Valley) लद्दाख का क्षेत्र है। यहीं पर गलवान नदी का संगम श्योक नदी से होता है।1962 के युद्ध में भी गलवान घाटी में भारत-चीनी सैनिकों के बीच टकराव हुआ था।
गलवान घाटी भारत के लिए रणनीतिक रुप बहुत महत्वपूर्ण है और चीन इस बात को समझता है, तभी वह यहां से पीछे हटने को राजी नहीं हो रहा।
45 वर्षों बाद हिंसक संघर्ष
भारत-चीन सीमा पर 45 साल बाद हिंसक संघर्ष में सैनिकों की शहादत हुई है। माना जाता है कि LAC बॉर्डर पर अंतिम फायरिंग (दोनों तरफ से) 1967 में हुई थी। 1967 की इस जंग में भारत के 80 जवान शहीद हुए थे। वहीं चीन के करीब 400 सैनिकों ने अपनी जान गंवाई थी।
1975 में चीन ने फिर किया था हमला
दोनों देशों की तरफ से अंतिम गोलीबारी 1967 में जरूर हुई थी लेकिन इसके 8 साल बाद भी चीन ने घात लगाकर हमला किया था। 1975 में अरुणाचल के तुलुंग ला में हुए हमले में चार भारतीय सैनिक शहीद हुए थे।
गलवान घाटी में विवाद क्यों?
गलवान घाटी लद्दाख और अक्साई चीन के बीच भारत-चीन सीमा के नजदीक स्थित है। यहां पर वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) अक्साई चिन को भारत से अलग करती है। चीन यहां पहले ही सैन्य संरचनाओं का विकास कर चुका है और अब वह इसी स्थिति बनाए रखने की बात करता है।
वहीं, अपनी सामरिक स्थिति मजबूत करने के लिए अब भारत भी वहां पर निर्माण करना चाहता है। इसी को लेकर चीन आशंकित है।
उल्लेखनीय है कि गलवान घाटी में सेना द्वारा बनाई जा रही दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी रोड (DSDBO रोड) भारत को इस पूरे इलाके में बढ़त देगी। यह रोड काराकोरम पास के नजदीक तैनात जवानों तक रसद पहुंचाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
लगभग 255 किमी. लंबी यह सड़क दारबुक (Darbuk)से लद्दाख अंतिम भारतीय ग्राम श्योक (Shyok)तक जाती है।
बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (BRO)को उम्मीद है कि इस साल के अंत तक 255 किलोमीटर लंबे इस सड़क का निर्माण संपन्न कर लिया जाएगा।
इसलिए महत्वपूर्ण है यह सड़क

  • इस सड़क के बन जाने से लेह और दौलत बेग ओल्डी के बीच की दूरी महज छह घंटे में पूरी हो सकती है।
  • उल्लेखनीय है कि दौलत बेग ओल्डी लद्दाख में भारतीय क्षेत्र का सबसे उत्तरी सीमांत इलाका है, जिसे सेना के बीच सब-सेक्टर नॉर्थ (Sub-Sector North) के नाम से जाना जाता है।
  • यह सड़क भारत-चीन LAC के लगभग समानांतर लेह को काराकोरम दर्रे से जोड़ती है तथा चीन के शिनजियांग (Xinjiang) प्रांत से लद्दाख को अलग करती है।

दौलत बेग ओल्डी (DBO)

  • DBO विश्व की सबसे ऊँचाई पर स्थित हवाई पट्टी थी, जिसे मूल रूप से 1962 के युद्ध के दौरान बनाया गया था लेकिन बाद में बंद कर दिया गया।
  • वर्ष 20O8 में भारतीय वायु सेना (IAF) ने इसे फिर से प्रारंभ किया गया। अगस्त 2013 में यहां सैन्य परिवहन विमान की लैंडिंग कराई गई।
  • पूर्वी लद्दाख का दौलत बेग ओल्डी क्षेत्र का पहला विस्तृत उल्लेख मुगल बादशाह हुमायूँ की शाही फ़ौज में कमांडर के पद पर नियुक्त मिर्ज़ा हैदर दोगलत द्वारा रचित तारीख-ए-रशीदी में मिलता है।

Related Posts

Leave a Reply