हाइड्रोक्‍सीक्‍लोरोक्विन के उत्पादन और निर्यात में भारत का शीर्ष स्थान

दुनिया में हाइड्रोक्‍सीक्‍लोरोक्विन (Hydroxychloroquine- HCQ) के उत्‍पादन और निर्यात में भारत शीर्ष स्थान पर है। आँकड़ों के अनुसार, वैश्विक आपूर्ति में भारत की हिस्‍सेदारी तकरीबन 70 प्रतिशत है। फार्मास्‍क्‍युटिकल्‍स विभाग (Department of Pharmaceuticals) के अनुसार, हाइड्रोक्‍सीक्‍लोरोक्विन की उत्‍पादन क्षमता देश की आवश्‍यकता और निर्यात की मांग को पूरा करने के लिये पर्याप्‍त है।
हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन को दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इजाद किया गया था। ये दवा मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल की जाती है। इसके अलावा इसे जोड़ों के दर्द के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। अमरीका की जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के लुपस सेंटर के मुताबिक ये दवा मांसपेशियों और जोड़ों के दर्द को कम करती है।
मार्च, 2020 में प्रकाशित एक फ्राँसीसी वैज्ञानिक के शोध के अनुसार, COVID-19 से संक्रमित 20 मरीज़ों में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन के प्रयोग से अन्य मरीज़ो की तुलना में बेहतर परिणाम पाए गए। हालाँकि, विश्व की किसी भी स्वास्थ्य संस्था द्वारा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन को COVID-19 के उपचार के लिये प्रमाणित नहीं किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन एक रोग प्रतिरोधक है और यह इलाज नहीं है
ऐसे काम करती है हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन
शोध में सामने आया कि क्लोरोक्वीन मानव शरीर के भीतर कोशिका के ऊपर एक परत बना देता है। इस परत के कारण वायरस मानव कोशिका से जुड़ नहीं पाता है। परिणाम यह होता है कि वायरस को पनपने और कई गुना बढ़ने के लिए कोशिका से जरूरी प्रोटीन नहीं मिल पाता। इस कारण वायरस का प्रभाव सीमित हो जाता है।चूंकि कोविड-19 की कोई निश्चित दवा नहीं है, इसीलिए इससे पीड़ित मरीजों के इलाज के कई दवाओं का एक साथ प्रयोग किया जाने लगा।
 

Related Posts

Leave a Reply