हाइड्रोक्‍सीक्‍लोरोक्विन आवश्‍यक दवा घोषित

केन्द्रीय स्वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने हाइड्रोक्‍सीक्‍लोरोक्विन (Hydroxychloroquine) को आवश्‍यक दवा घोषित करते हुए इसकी बिक्री को नियंत्रित करने संबंधी अधिसूचना जारी कर दी है। इस दवा को कोविड-19 महामारी के इलाज में उपयोगी पाया गया है, जिस कारण इसे आवश्‍यक औषधि घोषित किया गया है। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने एक गजट अधिसूचना में कहा है कि हाइड्रो-ऑक्‍सी-क्‍लोरोक्विन या इससे बनाई जाने वाली किसी भी खुदरा दवा की बिक्री 1945 की औषधि तथा सौंदर्य प्रसाधन नियमावली की अनुसूची एच-1 की शर्तों के अनुसार विनियमित की जायेगी।अधिसूचना में कहा गया है कि केन्‍द्र सरकार इस बात से आश्‍वस्‍त है कि कोविड-19 महामारी की आपात आवश्‍यकताओं को देखते हुए हाइड्रो-ऑक्‍सी-क्‍लोरोक्विन को जनहित में इस सूची में रखा जाना जरूरी है।
ऐसे काम करती है हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन
शोध में सामने आया कि क्लोरोक्वीन मानव शरीर के भीतर कोशिका के ऊपर एक परत बना देता है। इस परत के कारण वायरस मानव कोशिका से जुड़ नहीं पाता है। परिणाम यह होता है कि वायरस को पनपने और कई गुना बढ़ने के लिए कोशिका से जरूरी प्रोटीन नहीं मिल पाता। इस कारण वायरस का प्रभाव सीमित हो जाता है।चूंकि कोविड-19 की कोई निश्चित दवा नहीं है, इसीलिए इससे पीड़ित मरीजों के इलाज के कई दवाओं का एक साथ प्रयोग किया जाने लगा।
सार्स वायरस के खिलाफ क्लोरोक्वीन के कारगर होने के कारण कोविड-19 के इलाज में इसे भी शामिल किया गया। लेकिन अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि यह क्लोरोक्वीन कोविड-19 वायरस से ग्रसित होने के पहले काम करता है या फिर उसके बाद भी काम करता है। इसे लेकर अमेरिका से लेकर यूरोप तक में जांच शुरू हो गई है।
ध्यान देने की बात यह है कि क्लोरोक्वीन केवल कोरोना वायरस के खिलाफ कारगर साबित नहीं हो रही है। दूसरी बीमारियों के इलाज में यह कारगर साबित हो चुकी है। आर्थराइटिस और लीवर की एक प्रकार की बीमारी के इलाज में भी इसका इस्तेमाल लंबे समय से हो रहा है।

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