हिमालयन आईबैक्स के संरक्षण की अनोखी पहल

विश्व में केवल 6 हजार संख्या वाले विलुप्तप्राय हिमालयन आईबैक्स (Himalayan Ibex) की संख्या अब हिमाचल के कबाईली क्षेत्र लाहौल-स्पीति में धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। इस दुर्लभ प्राणी को बचाने के लिए लाहौल-स्पीति जिला की कई पंचायतों ने कड़े कदम उठाए हैं। 3500 से 6500 मीटर तक की उंचाई पर पाए जाने वाले इस दुर्लभ प्राणी आईबैक्स का शिकार करता हुए यदि कोई व्यक्ति पकड़ा जाता है तो पंचायत की ओर से उस व्यक्ति का सामाजिक बहिष्कार किया जाता है। इसी का नतीजा है कि वन विभाग के रिकार्ड में पिछले 7 सालों में एक आईबैक्स के शिकार का एक भी मामला दर्ज नहीं किया गया है। जिसके चलते अब लाहौल-स्पीति घाटी में आईबैक्स के झुंडों को प्रायः विचरते देखा जा रहा है।
जंगली बकरे की प्रजाति है हिमालयन आईबैक्स
हिमाचल और केन्द्रशासित जम्मू -कश्मीर लद्दाख में पाए जाने वाले हिमालयन आईबैक्स को जंगली बकरे के नाम से भी जाना जाता है। इनके लंबे-लंबे और मुड़े हुए सींग होते हैं। इस हिमालयन आईबैक्स को साइबेरियन आईबैक्स की उपप्रजाति कहा जाता है। एक स्वस्थ मेल आईबैक्स का वजन150 किलो तक होता है और मेल का वजन फिमेल के मुकाबले अधिक होता है। आईबैक्स छोटे-छोटे झुंडों में रहते हैं और एक झुंड में इनकी संख्या 50-60 तक हो जाती है। आईबैक्स घास खाते हैं। ये बर्फानी तेंदुओं के आसान शिकार होते हैं। दुनिया में केवल 6 हजार बचे हैं बेहद कठिन परिस्थितियों और खड़ी चट्टानों में रहने वाले हिमालयन आईबैक्स पूरी दुनिया में केवल 6 हजार के करीब बचे हुए हैं।
आईबैक्स को इंटरनेशनल यूनियन फार कंजरवेशन आफ नेचर (IUCN) की ओर से रेड लिस्ट में डाला गया है। यह अफगानिस्तान, चाइना, कजाकिस्तान, मंगोलिया, पाकिस्तान, रूस और उज्बेकिस्तान के साथ भारत में जम्मू एंड कश्मीर और हिमाचल के लाहौल-स्पीति जिला में पाए ही पाए जाते हैं। जहां दुनिया भर में इनकी घटती संख्या के लिए वन्य जीव प्रेमी चिंतित हैं वहीं दूसरी ओर हिमाचल सरकार की ओर से अभी तक इन दुर्लभ प्रजाति के इनकी संख्या को लेकर गणना तक नहीं की गई है।

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