ग्रीनलैंड में 60 हजार टन बर्फ पिघलकर समुद्र में समाई

जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र का जल स्तर लगातार बढ़ रहा है। पूरी दुनिया इसके खतरों को लेकर आशंकित है। हाल ही में हुए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने ग्रीनलैंड में बर्फ की बदलती स्थिति पर चिंता जताई है। इसमें बताया गया है कि 2019 की गर्मी के मौसम में ग्रीनलैंड से 600 बिलियन यानी 60 हजार टन बर्फ पिघलकर कर समुद्र में समा गई है। हैरानी की बात यह है कि केवल दो महीने में ही इस बर्फ के कारण समुद्र का जलस्तर 2.2 मिलीमीटर पर बढ़ गया है।
शोध के अनुसार कि ग्रीनलैंड में साल 2002 से साल 2018 के बीच हर साल औसत जितनी बर्फ पिघली है, उससे कहीं ज्यादा बर्फ केवल पिछले वर्ष पिघली है। जियोफिजिकल रिसर्च नामक जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि वर्ष 2019 में ही ग्रीनलैंड के विपरीत दक्षिणी ध्रुव में स्थित अंटार्कटिका के अमुंडसेन सागर और अंटार्कटिक प्रायद्वीप में भी बड़े पैमाने पर बर्फ पिघली, लेकिन महाद्वीप के पूर्वी हिस्से, क्वीन माउड लैंड में बर्फबारी के बढ़ने से यहां कुछ राहत जरूर देखी गई।
ग्रेस-एफओ’ के डाटा से मिली जानकारी
इसाबेल ने कहा कि इस अध्ययन के लिए शोधकरताओं ने अमेरिका और जर्मनी के संयुक्त अंतरिक्ष अभियान ‘ग्रेस-एफओ’ (The Gravity Recovery and Climate Experiment Follow-On (GRACE-FO) के डाटा का उपयोग किया। डाटा का विश्लेषण करने पर यह बात सामने आई कि अंटार्कटिका के पश्चिम में बड़े पैमाने पर बर्फ को नुकसान पहुंच था, जो समुद्र के स्तर में वृद्धि के लिए बहुत बुरी खबर है, लेकिन, पूर्वी क्षेत्र कुछ राहत भी देता है। ग्रेस एफओ के माध्यम से जल भंडारों की निगरानी की जाती है। इस मिशन के तहत पहला यान 2002 में तैनात किया गया था और अगले 15 वर्षो तक इससे प्राप्त डाटा का विश्लेषण किया।
ग्रीनलैंड
ग्रीनलैंड विश्व का सबसे बड़ा द्वीप है। एक स्व-शासित देश है लेकिन इस पर पर डेनमार्क की संप्रभुता है।यह आर्कटिक और अटलांटिक महासागर के बीच कनाडा आर्कटिक द्वीपसमूह के पूर्व में स्थित है। हालांकि भौगोलिक रूप से यह उत्तर अमेरिका महाद्वीप का एक हिस्सा है, लेकिन 18 वीं सदी के बाद से यूरोप (डेनमार्क) से राजनीतिक रूप से जुड़ा हुआ है।
1979 में डेनमार्क ने ग्रीनलैंड को स्वशासन प्रदान कर किया और 2008 में ग्रीनलैंड ने स्थानीय सरकार को अधिक दक्षता हस्तांतरण के पक्ष में मत दिया। जो अगले वर्ष प्रभावी बन गई, इसके साथ ही डैनिश शाही सरकार केवल विदेशी मामलों, सुरक्षा और आर्थिक नीति तक ही सीमित रह गई। ग्रीनलैंड क्षेत्रफल के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है, जो अपने आप में एक महाद्वीप नहीं है। इसके अलावा यह दुनिया का सबसे विरल जनसंख्या वाला देश है। यहां की कुल जनसंख्या 56 हजार है।

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