कार्बन उत्सर्जन की मात्रा में आ सकती है अब तक की सबसे बड़ी गिरावट: GCP

विश्व भर में प्रदूषण के स्तर पर नजर रखने वाले वैज्ञानिकों के एक समूह ग्लोबल कार्बन प्रोजक्ट (Global Carbon Project,GCP) ने कहा है कि कोरोना वायरस के कारण द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कार्बन उत्सर्जन की मात्रा में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट आ सकती है। दरअसल कोरोना वायरस के तेजी से फैलते संक्रमण के कारण दुनियाभर में औद्योगिक कार्य लगभग बंद हैं। वहीं वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी भारी नुकसान पहुंचा है। सालाना कार्बन उत्सर्जन के अनुमानों की घोषणा करने वाली एजेंसी ग्लोबल कार्बन प्रोजक्ट के अध्यक्ष रॉब जैक्सन ने कहा कि वैश्विक स्तर पर कार्बन का उत्सर्जन प्रतिवर्ष पांच प्रतिशत की दर से घट सकता है।
कार्बन उत्सर्जन में पहली बार कमी 2008 के वित्तीय संकट के दौरान देखी गई थी। कैलिफॉर्निया में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के अर्थ सिस्टम साइंस के प्रोफेसर जैक्सन ने भी कार्बन उत्सर्जन में पांच प्रतिशत की कमी आने का अनुमान व्यक्त किया है।प्रोफेसर जैक्सन ने कहा कि कार्बन डाई ऑक्साइड के उत्सर्जन की मात्रा में इतनी बड़ी कमी न तो सोवियत संघ के विघटन के बाद आई न ही किसी तेल संकट या ऋण संकट के बाद देखी गई जबकि, यह काम एक छोटे से वायरस ने कर दिखाया है।
भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा कार्बन उत्सर्जक देश
ग्लोबल कार्बन प्रोजेक्ट द्वारा पूर्व में किये गये अध्ययन के अनुसार भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा कार्बन डाइऑक्साइड उत्पादक देश है, वर्ष 2017 में भारत ने विश्व का कुल 7% कार्बन  डाइऑक्साइड उत्सर्जन किया। 2018 में भारत के कार्बन उत्सर्जन में 6.3% की वृद्धि हुई, इसमें कोयला (7.1%), तेल (2.9%) तथा गैस (6%) प्रमुख है।
विश्व के दस सबसे बड़े कार्बन उत्सर्जन देश हैं : चीन, अमेरिका, यूरोपीय संघ, भारत, रूस, जापान, जर्मनी, ईरान, सऊदी अरब तथा दक्षिण कोरिया। इस अध्ययन में यह सामने आया है कि भारत और चीन अभी भी काफी हद तक कोयले पर निर्भर हैं, जबकि अमेरिका और यूरोपीय संघ धीरे-धीरे कम कार्बन उत्सर्जन कर रहे हैं।
ग्लोबल कार्बन प्रोजेक्ट
ग्लोबल कार्बन प्रोजेक्ट एक ग्लोबल रिसर्च प्रोजेक्टर है जो वर्ल्ड क्लाइमेट रिसर्च प्रोग्राम का रिसर्च पार्टनर है। यह अंतरराष्ट्रीय विज्ञान समुदाय के साथ काम करने के लिए और वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों की वृद्धि को रोकने के लिए एक  ज्ञान आधार स्थापित करने के लिए बनाया गया था। ग्लोबल कार्बन प्रोजेक्ट की स्थापना 2001 में इंटरनेशनल जियोस्फीयर-बायोस्फीयर प्रोग्राम (IGBP), ग्लोबल एन्वायर्नमेंटल चेंजेस (IHDP), वर्ल्ड क्लाइमेट रिसर्च प्रोग्राम (WCRP)  के बीच अंतर्राष्ट्रीय मानव आयाम कार्यक्रम International Human Dimensions Programme on Global Environmental Change (IHDP) के बीच एक साझा साझेदारी द्वारा की गई थी। इस साझेदारी ने अर्थ सिस्टम साइंस पार्टनरशिप (ESSP) का गठन किया जो बाद में फ्यूचर अर्थ के रुप में विकसित हुआ।

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