जर्मनी ने हिजबुल्लाह को घोषित किया आतंकी संगठन

जर्मनी ने 30 अप्रैल को लेबनान के आतंकी संगठन हिजबुल्लाह (Hizbullah) पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। यूरोपीय संघ (EU) की तरह अब तक जर्मनी ने केवल इस संगठन की सैन्य गतिविधियों पर ही रोक लगा रखी थी। राजनीतिक रूप से यह अब भी देश में सक्रिय था। अमेरिका और इस्राएल ने पहले से ही हिजबुल्लाह को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया था और बाकी देशों से भी ऐसा करने की अपील करते आए हैं।
क्या है हिजबुल्लाह?
हिजबुल्लाह लेबनान का एक राजनीतिक संगठन है। जिसका अर्थ है “अल्लाह की पार्टी”। इसकी स्थापना 1892 में की गई। माना जाता है कि ईरान  इसे इस्राएल के खिलाफ आर्थिक मदद देता है। 1985 में इसने अपना घोषणापत्र जारी किया जिसमें लेबनान से सभी पश्चिमी ताकतों को निकाल बाहर करने का ऐलान किया गया। तब तक यह फ्रांस और अमेरिका के सैनिकों और दूतावास पर कई हमले भी कर चुका था।
हिजबुल्लाह देश की राजनीति में भी सक्रिय हुआ और 1992 के चुनावों में इसने संसद में आठ सीटें हासिल की। इसके बाद भी हिजबुल्लाह के हमले जारी रहे। 90 के दशक ने अंत तक यह अलग अलग हमलों में सैकड़ों लोगों की जान ले चुका था और 1997 में अमेरिका ने इसे आतंकी संगठन घोषित कर दिया था।
आज यह देश की एक अहम राजनीतिक पार्टी है। लेकिन दुनिया के कई देश इसे आतंकी संगठन घोषित कर चुके हैं। 2016 में सऊदी अरब भी इस सूची में शामिल हो गया। वहीं यूरोपीय संघ ने लंबी चर्चा के बाद 2013 में इसके सैन्य अंग को आतंकी घोषित किया था। अब जर्मनी के पूर्ण प्रतिबंध के बाद माना जा रहा है कि ईयू पर भी ऐसा करने का दबाव बढ़ेगा।
अमेरिका ने रखा है इसके प्रमुख पर एक करोड़ का ईनाम
अमेरिका ने हिजबुल्ला कमांडर मुहम्मद कावथरानी की गतिविधियों, नेटवर्क और सहयोगियों के बारे में कोई भी जानकारी देने पर एक करोड़ डॉलर के इनाम की घोषणा की है। कमांडर पर इराक में ईरान समर्थक समूहों को समन्वित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आरोप है।

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