प्रो. अमर्त्य सेन को 2020 का शांति पुरस्कार

चर्चा में क्यों?

  • जर्मनी के प्रकाशकों और पुस्तक विक्रेताओं के संगठन, जर्मन बुक ट्रेड (German Book Trade) ने भारतीय अर्थशास्त्री और दार्शनिक अमर्त्य सेन को 2020 के शांति पुरस्कार के लिए चुना है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • इस पुरस्कार को जीतने वाले वह दूसरे भारतीय हैं, उनसे पहले 1961 में यह पुरस्कार भारत के द्वितीय राष्ट्रपति औऱ महान दार्शनिक डा. एस राधाकृष्णन को दिया गया था।
  • अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अमर्त्य सेन को 1998 में कल्याण अर्थशास्त्र की अवधारणा के लिए अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
  • प्रो. अमर्त्य सेन का जन्म 3 नवंबर, 1933 को पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन में हुआ था।
  • साल 2004 से वह अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र और दर्शन की शिक्षा दे रहे हैं।
  • प्रो.सेन ने लोक कल्याणकारी अर्थशास्त्र की अवधारणा दी और समाज कल्याण और विकास के कई पहलुओं पर अनेक किताबें लिखीं।
  • जर्मन बुक ट्रेड के बोर्ड ने सेन के काम को ‘पहले के मुकाबले अब और भी ज्यादा प्रासंगिक’ बताया।

जर्मन बुक ट्रेड शांति पुरस्कार

  • यह पुरस्कार समारोह हर साल फ्रैंकफर्ट बुक फेयर के समापन पर होता आया है। इस साल इस समारोह के 18 अक्टूबर को फ्रैंकफर्ट में होने की उम्मीद है, जिसका सीधा प्रसारण भी किया जाएगा।
  • साल 1950 से ही हर साल जर्मन बुक ट्रेड का शांति पुरस्कार दिया जाता रहा है।
  • इसमें उपाधि के अलावा विजेता को 25,000 यूरो (यानि करीब 21 लाख रुपये) का नकद पुरस्कार भी दिया जाता है।
  • इसका लक्ष्य उन हस्तियों को सम्मानित करना है, जो साहित्य, विज्ञान और कला के क्षेत्र में अपने उत्कृष्ट काम से शांति के विचारों को सच करने में बड़ा योगदान देते हों।
  • 2019 में यह पुस्कार ब्राजील के मशहूर फोटोग्राफर और फोटो पत्रकार सेबास्तियाओ सालगादो को दिया गया था। उससे पहले 2017 में कनाडा की प्रसिद्ध लेखिका मार्गेट एटवुड को भी यह पुरस्कार दिया जा चुका है।

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