जियो फेंसिंग से करवाया जा रहा है सोशल डिस्टेंसिंग का पालन

स्मार्ट सिटी परियोजना में शामिल देश के 12 से ज्यादा शहर कोरोना के खिलाफ जारी जंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) से अब तक चिकित्सा सहायता में स्वास्थ्य विभाग की मदद कर रहे थे। अब इन शहरों में लॉकडाउन के दौरान एआई से ही सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन करवाया जा रहा है। ऐसा ‘जियो फेंसिंग'(Geofencing) से संभव हो पा रहा है। स्मार्ट सिटी के तहत स्थापित किए गए इंटीग्रेटिड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) द्वारा शहर में भीड़ जुटने से रोकने के लिए ‘जियो फेंसिंग’ का सहारा लिया जा रहा है।
भोपाल, कानपुर, मंगलुरु और चेन्नई सहित 16 शहरों में जीपीएस की मदद से संदिग्ध मरीजों की निगरानी करने, स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा चिन्हित हॉटस्पॉट इलाकों में हीट मैपिंग की मदद से लॉकडाउन का पालन कराने और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति वाले स्थानों में जियो फेंसिंग की सहायता से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है। मध्य प्रदेश की सर्वाधिक छह स्मार्ट सिटी (भोपाल, जबलपुर, उज्जैन, ग्वालियर, सतना और सागर) के अलावा उत्तर प्रदेश में कानपुर, अलीगढ़ एवं वाराणसी के अलावा तमिलनाडु में चेन्नई और वेल्लोर, महाराष्ट्र में नागपुर, कर्नाटक में मंगलुरु, गुजरात में गांधीनगर, राजस्थान में कोटा और पश्चिम बंगाल में न्यू टाउन कोलकाता में लॉकडाउन के दौरान लोगों तक चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच को स्मार्ट सिटी की तकनीक की मदद से आसान बना दिया है।
क्या है जियो फेंसिंग ?
जियो फेंसिंग एक लोकेशन आधारित सर्विस है जिसकी मदद से कई दूसरे सॉफ्टवेयर और एप्स जीपीएस का प्रयोग करते हैं। इसके तहत साफ्टवेयर की मदद से एक तरह की वर्चुअल बाउंड्री बनाई जाती है। इसके अलावा वाई-फाई, सेल्युलर डेटा और पहले से तय किए गए कई प्रोग्राम में भी इसका प्रयोग होता है।क्‍यूआर कोड स्‍कैन करते समय लोकेशन के साथ कई दूसरे जानकारी फोन पर सेवा प्रदाता को मिल जाती है ये सब जियो फेंसिंग की मदद से ही होता है।ये निर्भर करता है जिओ फेंस किस सर्विस के लिए सेट किया गया है। जैसे यदि यूजर लोकेशन बेस खबरें अपने फोन में सेट करते हैं तो ‘जिओ फेंसिंग’ की मदद से फोन उसी लोकेशन से जुड़ी खबरें फोन में देता रहेगा।

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