यूरेशियन बर्फ की चादर के पिघलने के कारण की खोज

विश्व में तेजी से पिघल रही बर्फ के जोखिमों पर चिंता जताते हुए एक अध्‍ययन का कहना है कि 14,000 वर्षों से पिघल रही यूरेशियाई बर्फ की चादर ( Eurasian ice sheet ) ने समुद्र का स्तर वैश्विक रूप से लगभग आठ मीटर तक बढ़ा दिया है। इन ग्लेशियरों पिघलाने के पीछे एक घटनाक्रम जिम्‍मेदार है जिसका पता नॉर्वेजियन सागर के तलछट में शोधकर्ताओं को मिला।
पृथ्वी का अंतिम ग्लेशियल मैक्सिम पीरियड(Glacial Maximum period)  करीब 33,000 वर्ष पहले उस समय शुरू हुआ था, जब उत्तरी गोलार्ध का ज्यादातर हिस्सा बर्फ से ढका रहता था। ग्लेशियल मैक्सिम पीरियड उस अवधि को कहा जाता है- जब पृथ्वी का अधिकतर भाग बर्फ की चादर से ढका होता है। उस काल में यूरेशियाई बर्फ की चादर (स्केंडिनेविया प्रायद्वीप) में जो पानी जमा था, वह आज की ग्रीनलैंड की बर्फ की चादर में मौजूद पानी से तीन गुना ज्यादा था।
‘नेचर जियोसाइंस’ में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि यूरेशियाई बर्फ की चादर स्केंडिनेविया प्रायद्वीप के ज्यादातर हिस्सों में फैली हुई है। लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि क्षेत्रीय तापमान में बढ़ोतरी से केवल 500 वर्षों में ही यहां रिकॉर्ड बर्फ पिघल गई है।
इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने नॉर्वेजियन सागर (Norwegian Sea) के तलछट की खोदाई कर विश्लेषण किया। इस दौरान शोध टीम ने पाया कि बर्फ की चादर के पिघलने के पीछे ‘मेल्टवाटर 1 ए’ (Meltwater 1A )नामक एक घटनाक्रम जिम्मेदार है। यह ऐसी अवधि है जिसमें 13500 से 14700 वर्ष पहले वैश्विक समुद्र के स्तर में 25 मीटर तक का अंतर आया था।
अध्ययन में बताया गया है कि यदि ग्लोबल वार्मिंग के स्तर में कमी के लिए प्रयास नहीं किए गए तो ग्रीनलैंड की बर्फ की चादर समुद्र के स्तर को छह मीटर और ऊपर उठा सकती है।
अध्ययन में पता चला है कि पूरी यूरेशियन बर्फ की चादर ने कुछ शताब्दियों में पिघलकर समुद्र का जल स्तर चार सेंटीमीटर से अधिक बढ़ाया है।

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