Follow Us On

Daily Current Affairs: September 7, 2021

स्वास्थ्य एवं पोषण

कोरोना का म्यूवैरियंट

चर्चा में क्यों?

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने जनवरी में कोलंबिया में मिले 1.621 वैरिएंट को ग्रीक अल्फाबेट के आधार पर ‘म्यू’ नाम दिया है। साथ ही इस वैरिएंट को ‘वैरिएंट्स ऑफ इंटरेस्ट’ की सूची में शामिल कर लिया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • WHO का कहना है कि वैरिएंट में ऐसे म्यूटेशंस हैं जो वैक्सीन के असर को कम करते हैं। इस संबंध में और स्टडी करने की जरूरत है।
  • WHO की नए वैरिएंट बुलेटिन में कहा गया है कि म्यू वैरिएंट में ऐसे म्यूटेशंस हुए हैं, जो इम्यून एस्केप की आशंका बताते हैं।
  • इम्यून एस्केप का मतलब है कि यह वैरिएंट आपके शरीर में वायरस के खिलाफ बनी इम्यूनिटी को धोखा दे सकता है। इसके अलावा एक और वैरिएंट 1.2 दक्षिण अफ्रीका में मिला है। इसे फिलहाल WHO ने ग्रीक नाम नहीं दिया है, पर यह भी इम्यूनिटी को चकमा देने की क्षमता रखता है।
  • अब तक भारत में अल्फा और डेल्टा वैरिएंट ही हावी रहे हैं। दूसरी लहर के लिए तो डेल्टा वैरिएंट को ही जिम्मेदार ठहराया गया है। अच्छी और राहत की बात यह है कि देश में अब तक म्यू और 1.2 वैरिएंट का एक भी केस नहीं मिला है।
  • वायरस को आमतौर पर दो भागों में बांटा जाता है। पहला वेरियंट ऑफ कंसर्न यानि चिंताजनक वेरियंट और दूसरा वेरियंट ऑफ इंटरेस्ट।
  • म्यू वेरियंट को वेरियंट ऑफ इंटरेस्ट कहा गया है, इसका मतलब है कि कोरोना का यह वेरियंट अधिक खतरनाक हो सकता है। हालांकि अभी इस वेरियंट को लेकर वैज्ञानिकों द्वारा अध्ययन जारी है।

……………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………

केरल में निपाह वायरस

चर्चा में क्यों?

  • केरल के कोझ‍िकोड़ में निपाह वायरस (Nipah Virus (NiV) से 12 साल के एक किशोर की मौत दर्ज की गई है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • बच्‍चे में लक्षण नजर आने के बाद सैम्‍पल्‍स पुणे स्थित नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरलॉजी (NIV) भेजे गए थे।

क्‍या है निपाह वायरस? कैसे फैलता है?

  • विश्व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) के अनुसार, निपाह एक जूनॉटिक वायरस (जानवरों से इंसानों में फैलने वाला) है। केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय (MoHFW) के मुताबिक, यह वायरस मेगा बैट्स (फ्रूट बैट्स) के सलाइवा से फैलता है।
  • 2018 में कोझिकोड़ में पहले निपाह केस का पता लगाने वाले डॉ अनूप कुमार कहते हैं कि वायरस तीन तरीकों से फैल सकता है। पहला- चमगादड़ों से इंसानों में, दूसरा- इंसानों से इंसानों में या फिर तीसरा- चमगादड़ों से जानवरों में और फिर इंसानों में।
  • संक्रमण मुख्‍यत: संक्रमित खाना खाने से होता है। डॉ कुमार के अनुसार, ‘यह एक ड्रॉपलेट इन्‍फेक्‍शन है इसलिए सुअरों, बिल्लियों और कुत्‍तों के जरिए भी फैल सकता है। चमगादड़ों की ज्‍यादा आबादी के बीच ऐसे जानवरों के संपर्क में रहने वालों को खासा खतरा है।’

शुरुआती मामले कब सामने आए? भारत में कब?

  • इंसानों के बीच निपाह वायरस का पहला मामला 1999 में मलेशिया में सामने आया था।
  • वायरस का नाम उस जगह के नाम पर है जहां रहने वाले शख्‍स की इसके संक्रमण से मौत हुई थी। उसी साल सिंगापुर में भी यह वायरस फैला। मलेशिया में उसके बाद से यह वायरस नहीं फैला है।

भारत में निपाह कब मिला?

  • भारत में निपाह वायरस का पहला मामला 2001 में पश्चिम बंगाल के भीतर आया। 2007 में भी बंगाल से वायरस के मामलों का पता चला।
  • केरल में वायरस का पहला मामला 19 मई, 2018 को कोझिकोड़ ज‍िले से ही मिला था।

निपाह वायरस के लक्षण क्‍या हैं?

  • निपाह संक्रमण के लक्षण कोव‍िड-19 से मिलते-जुलते हैं। शुरुआत में लोगों को बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, उलटी आने और गले में खराश की शिकायतें आती हैं। इसके बाद चक्‍कर आना, थकान, होश न रहना और एक्‍यूट इंसेफेलाइटिस जैसे न्‍यूरोलॉजिकल लक्षण दिखते हैं।
  • कुछ लोगों में असामान्‍य निमोनिया और सांस की अन्‍य गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर मामलों में इंसेफेलाइटिस और दौरे पड़ते हैं, 24 से 48 घंटों के भीतर मरीज कोमा में पहुंच जाता है।

निपाह वायरस का टेस्‍ट कैसे होता है? इलाज क्‍या है?

  • निपाह संक्रमण का पता बीमारी के एक्‍यूट और कॉन्‍वलसेंट फेज के दौरान क्लिनिकल हिस्‍ट्री देखकर लगाया जा सकता है।
  • निपाह संक्रमण की पुष्टि के लिए कोविड-19 की तरह ही RT-PCR टेस्‍ट कराया जाता है। इसके अलावा ELISA टेस्‍ट से एंटीबॉडी भी चेक कर सकते हैं।
  • निपाह वायरस के लिए फिलहाल कोई खास दवा या वैक्‍सीन उपलब्‍ध नहीं है। WHO गंभीर मामलों को आईसीयू में भर्ती रखने की सलाह देता है।

……………………………………………………………………………………………………..

निधन

सदाशिव राव साठे

चर्चा में क्यों?

  • भारत के प्रसिद्ध मूर्तिकार सदाशिव राव साठे सदाशिव राव साठे का हाल ही में मुंबई में निधन हो गया। वे 95 साल के थे।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • सदाशिव राव साठे ने देश के महापुरुषों की अनेक अप्रतिम प्रतिमाएं बनाईं हैं।
  • महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, छत्रपति शिवाजी, विनोबा भावे आदि की प्रतिमाएं इनमें प्रमुख हैं।
  • उन्होंने ही गेटवे ऑफ इंडिया पर छत्रपति शिवाजी और ग्वालियर में रानी लक्ष्मी बाई की भी जीवंतप्राय: मूर्तियां बनाईं।

……………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………

रक्षा-प्रतिरक्षा

सिम्बेक्स 2021

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में भारत और सिंगापुर की नौसेनाओं के मध्य सिंगापुर-भारत द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास (Singapore-India Maritime Bilateral Exercise- SIMBEX) का 28वां संस्करण आयोजित किया गया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • यह अभ्यास वर्ष 1994 में शुरू किया गया था। यह अभ्यास किसी भी विदेशी नौसेना के साथ भारतीय नौसेना का सबसे लंबा निर्बाध द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास है।
  • SIMBEX का 28वां संस्करण दक्षिण चीन सागर के दक्षिणी किनारे पर एक विशाल नौसैनिक युद्ध अभ्यास था, जो रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण क्षेत्र में हितों की बढ़ती समानता को दर्शाता है।

……………………………………………………………………………………………………..

चर्चित स्थान

ओरंग नेशनल पार्क

चर्चा में क्यों?

  • असम मंत्रिमंडल ने हाल ही में ‘राजीव गांधी नेशनल पार्क’ का नाम बदलकर ‘ओरंग नेशनल पार्क’ करने का निर्णय लिया है।

चर्चा में क्यों?

  • ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी तट पर स्थित ‘ओरंग राष्ट्रीय उद्यान’ असम का सबसे पुराना ‘गेम रिज़र्व’ है। इसे वर्ष 1915 में अंग्रेज़ों द्वारा ‘गेम रिज़र्व’ के रूप में अधिसूचित किया गया था।
  • वर्ष 1999 में इसे राष्ट्रीय उद्यान में अपग्रेड किया गया था और वर्ष 2016 में इसे टाइगर रिज़र्व के रूप में मान्यता दी गई थी।
  • गुवाहाटी से तकरीबन 140 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ‘ओरंग राष्ट्रीय उद्यान’ एक-सींग वाले गैंडों, बाघों, हाथियों, जंगली सूअर, पिग्मी हॉग और विभिन्न प्रकार की मछलियों के लिये प्रसिद्ध है।
  • इसे अक्सर ‘मिनी काजीरंगा’ भी कहा जाता है। उल्लेखनीय है कि असम में वर्तमान में सात राष्ट्रीय उद्यान हैं: काजीरंगा, मानस, ओरंग, नामेरी, डिब्रू-सैखोवा, रायमोना और देहिंग पटकाई।

…………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………..

 

राष्ट्रीय परिदृश्य

कार्बी आंगलोंग समझौता

चर्चा में क्यों?

  • असम में कार्बी आंगलोंग को लेकर दिल्ली में 4 सितंबर 2021 को उग्रवादियों के साथ ऐतिहासिक समझौता हुआ। इसके तहत 5 से अधिक संगठनों के लगभग 1000 कैडर ने हथियार डालकर मुख्यधारा में आने की शुरुआत की है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कैबिनेट मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और कई विद्रोही समूहों के प्रतिनिधि कार्बी आंगलोंग समझौते पर हस्ताक्षर के लिए बैठक में शामिल हुए।
  • समझौते के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि कार्बी आंगलोंग के संबंध में असम सरकार 5 साल में इस क्षेत्र के विकास के लिए 1000 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

क्या है कर्बी जनजातीय समस्या?

  • कार्बी एक प्रमुख जातीय समुदाय है, जो कई साल से असम में कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद (KAAC) की मांग करता आ रहा है और अलग-अलग हिंसक घटनाओं में लिप्त थे।
  • कई गुटों में बिखरे असम के प्रमुख जातीय समुदाय कार्बी के विद्रोह का लंबा इतिहास रहा है, जो 1980 के दशक के उत्तरार्ध से हत्याओं, जातीय हिंसा, अपहरण और कराधान में शामिल रहा है।
  • लगभग 200 कार्बी उग्रवादी उन 1,040 उग्रवादियों का हिस्सा हैं, जिन्होंने इस साल 25 फरवरी को पूर्व मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल की उपस्थिति में गुवाहाटी के एक कार्यक्रम में औपचारिक रूप से हथियार डाल दिए थे।
  • आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों में इंग्ती कथार सोंगबिजित भी शामिल था, जो राज्य में उग्रवाद और जातीय हिंसा के कई मामलों में शामिल रहा है।
  • इन उग्रवादियों ने कुल 338 हथियार जमा किए, जिनमें 11,203 गोलियों के साथ 8 लाइट मशीनगन, 11 एम-16 राइफल और 58 एके-47 राइफल भी थी।
  • पांचों संगठनों के उग्रवादी एक साल बाद तब अपने हथियार के साथ आत्मसमर्पण करने आए थे जब भाजपा ने बोडोलैंड में लंबे समय से चल रही हिंसा को समाप्त करने के लिए बोडो शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

समझौते की मुख्य विशेषताएं-

  • यह समझौता असम की क्षेत्रीय और प्रशासनिक अखंडता को प्रभावित किए बिना, कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद को और अधिक स्वायत्तता का हस्तांतरण, कार्बी लोगों की पहचान, भाषा, संस्कृति आदि की सुरक्षा और परिषद क्षेत्र में सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करेगा।
  • समझौते के तहत, पहाड़ी जनजाति के लोग भारतीय संविधान की अनुसूची 6 के तहत आरक्षण के हकदार होंगे। कार्बी सशस्त्र समूह हिंसा को त्याग ने और देश के कानून द्वारा स्थापित शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होने के लिए सहमत हुए हैं।
  • समझौते में सशस्त्र समूहों के कैडरों के पुनर्वास का भी प्रावधान है। असम सरकार कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद क्षेत्र से बाहर रहने वाले कार्बी लोगों के विकास पर ध्यान केंद्रित करने के लिए एक कार्बी कल्याण परिषद की स्थापना करेगी।
  • कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद के संसाधनों की पूर्ति के लिए राज्य की संचित निधि को बढ़ाया जाएगा।
  • वर्तमान समझौते में कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद को समग्र रूप से और अधिक विधायी, कार्यकारी, प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां देने का प्रस्ताव है।

Related Posts

Quick Connect

Whatsapp Whatsapp Now

Call +91 8130 7001 56