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Daily Current Affairs: September 3, 2021

अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य

चीन का नया समुद्री कानून

चर्चा में क्यों?

  • चीन ने अपनी समुद्री सुरक्षा का हवाला देते हुए 1 सितंबर से नया कानून लागू किया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • इस कानून के अनुसार, चीन के समुद्री क्षेत्रों से निकलने वाले दूसरे देशों के जहाजों को चीनी अधिकारियों के पास अपना कॉल साइन, पोजिशन, डेस्टिनेशन, जहाज में लोड सामान की जानकारी, स्पीड, लोडिंग कैपेसिटी की जानकारी देनी होगी। ऐसा नहीं करने पर चीन अपने कानून के हिसाब से कार्रवाई कर सकेगा।
  • ये कानून किन जहाजों पर लागू होगा, अभी ये पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
  • कहा जा रहा है कानून पनडुब्बियों, न्यूक्लियर जहाजों, रेडियोएक्टिव मटेरियल से लोड जहाजों, ऑइल, गैस और केमिकल ले जा रहे जहाजों पर लागू होगा।
  • साथ ही चीन ने ये भी कहा है कि ऐसे जहाज जो चीन की सुरक्षा के लिए खतरा साबित हो सकते हैं, उन पर भी इस कानून के तहत कार्रवाई की जा सकेगी। यानी चीन लगभग सभी तरह के विदेशी जहाजों को इस कानून के दायरे में ले आया है।

इस कानून पर विवाद क्यों छिड़ गया है?

  • चीन समुद्र में अपना दखल लगातार बढ़ा रहा है। वह इस कानून के जरिए साउथ और ईस्ट चाइना सी से गुजरने वाले विदेशी जहाजों की आवाजाही बाधित करना चाहता है।
  • अभी तक ये स्पष्ट नहीं है कि चीन इस कानून का उल्लंघन करने वालों पर किस तरह की कार्रवाई करेगा। अगर सख्त कार्रवाई होती है तो इससे समुद्री यातायात प्रभावित होगा और देशों के बीच विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है।
  • इसी साल फरवरी में चीन ने एक कानून के जरिए कोस्ट गार्ड को ये अधिकार दिया था कि वे किसी भी विदेशी जहाज पर संदेह होने पर हमला कर सकते हैं। एक के बाद एक दो विवादास्पद कानूनों के जरिए चीन समुद्री सुरक्षा के बहाने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पर गैरकानूनी रूप से अतिक्रमण कर रहा है।

भारत पर प्रभाव

  • जापान, साउथ कोरिया और ASEAN देशों के साथ व्यापार के लिए साउथ चाइना सी भारत के लिए बेहद अहम है। भारत के कुल समुद्री व्यापार का करीब 55% साउथ चाइना सी के जरिए ही होता है।
  • अक्टूबर 2011 में भारत ने वियतनाम के साथ साउथ चाइना सी में ऑयल और गैस एक्सप्लोरेशन के लिए एक एग्रीमेंट किया था। चीन ने इस कदम का खासा विरोध किया था। 2019 में चीन ने वियतनाम के समुद्री क्षेत्र में 30 से ज्यादा जंगी जहाजों को तैनात कर दिया था।

समुद्री सीमा पर क्या है अंतरराष्ट्रीय कानून?

  • समुद्री यातायात को लेकर चीन, भारत समेत 100 से भी ज्यादा देशों में एक समझौता साइन किया गया है। इसे यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी (UNCLOS) कहा जाता है।
  • इसके अनुसार, किसी भी देश की जमीन से 12 नॉटिकल मील (2 किलोमीटर) तक उस देश की समुद्री सीमा मानी जाती है।
  • इस कानून के अनुसार 12 नॉटिकल मील की दूरी के बाद का समुद्री क्षेत्र कोई भी देश ट्रेड के लिए इस्तेमाल कर सकता है। इस दूरी के बाद किसी भी देश की समुद्री सीमा लागू नहीं होती। चीन का ये नया कानून UNCLOS की इस संधि का भी उल्लंघन करता है।
  • चीन इस कानून का गलत तरीके से फायदा उठाता है। दरअसल चीन ने साउथ और ईस्ट चाइना सी में अलग-अलग आइलैंड पर कब्जा कर रखा है।
  • चीन इन आइलैंड को अपना बताता है और अपनी समुद्री सीमा का आकलन भी इन्हीं आइलैंड की दूरी के हिसाब से करता है। इससे समुद्र में चीन का दखल बढ़ता जा रहा है।
  • साल 2016 में एक अंतरराष्ट्रीय अदालत ने साउथ चाइना सी में चीन के दखल को गैरकानूनी बताते हुए फिलीपींस के पक्ष में फैसला सुनाया था। चीन ने फैसले को मानने से ही इनकार कर दिया था।

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खेल परिदृश्य

अवनि लेखरा ने पैरालिंपिक्स में रचा इतिहास

चर्चा में क्यों?

  • राजस्थान की अवनि लेखरा ने पैरालिंपिक्स में इतिहास रच दिया है। अवनि ने 50 मीटर एयर राइफल में ब्रॉन्ज मेडल जीता है। इससे पहले वो 10 मीटर एयर राइफल में गोल्ड जीता था।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • एक ही ओलिंपिक या पैरालिंपिक्स में दो मेडल जीतने वाली वो पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गई हैं।
  • अवनि के अलावा प्रवीण कुमार ने भी हाईजम्प में नए एशियन रिकॉर्ड के साथ सिल्वर मेडल जीता। ये मेडल उन्हें टी-64 कैटेगिरी की हाईजंप में मिला।
  • टोक्यो पैरालिंपिक में देश के लिए पहला गोल्ड जीतने वाली जयपुर की अवनि 50 मीटर एयर राइफल में ब्रॉन्ज मेडल जीता।
  • देवेंद्र झाझरिया पैरालिंपिक में तीन मेडल जीत चुके हैं, वहीं ओलिंपिक में कुश्ती में सुशील कुमार और बैडमिंटन में पीवी सिंधु दो मेडल जीते हैं।

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भारत एवं विश्व

भारत और अमेरिका ने मानव रहित विमानों के सम्बंध में परियोजना-समझौते पर हस्ताक्षर किये

चर्चा में क्यों?

  • भारत और अमेरिका के रक्षा मंत्रालयों ने मानव रहित विमानों Air-Launched Unmanned Aerial Vehicle (ALUAV) के सम्बंध में एक परियोजना-समझौते (पीए) पर हस्ताक्षर किये हैं।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • उल्लेखनीय है कि मानव रहित विमानों में ड्रोन आदि शामिल हैं।
  • यह समझौता रक्षा प्रौद्योगिकी और व्यापार पहल (डीटीटीआई) के हवाले से संयुक्त वायु प्रणाली कार्य समूह के तहत 30 जुलाई, 2021 को किया गया।
  • भारत और अमेरिका के रक्षा मंत्रालयों के बीच हुये अनुसंधान, विकास, परीक्षण और मूल्यांकन (RDT & E) समझौता-ज्ञापन के दायरे में एएलयूएवी को रखा गया है।
  • इस समझौता-ज्ञापन पर सबसे पहले जनवरी 2006 में हस्ताक्षर किये गये थे और जनवरी 2015 को उसका नवीनीकरण किया गया था।
  • यह समझौता रक्षा उपकरणों को मिलकर विकसित करने की दिशा में दोनों देशों के बीच रक्षा प्रौद्योगिकी सहयोग को और गहन बनाने की एक महत्त्वपूर्ण पहल है।
  • डीटीटीआई का मुख्य लक्ष्य है कि सहयोगात्मक प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान तथा भारत और अमेरिकी सेना के लिये भावी प्रौद्योगिकियों के सह-उत्पादन और सह-विकास पर लगातार जोर देना।
  • डीटीटीआई के अंतर्गत थल, जल, वायु और विमान वाहक पोतों की प्रौद्योगिकियों के सम्बंध में एक संयुक्त कार्य समूह का गठन किया गया है, ताकि इन क्षेत्रो में आपसी चर्चा के बाद मंजूर होने वाली परियोजनाओं पर ध्यान दिया जा सके।

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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

ब्लू स्ट्रैगलर का पहला  व्यापक विश्लेषण

चर्चा में क्यों?

  • ब्लू स्ट्रैगलर का पहला व्यापक विश्लेषण करते हुए भारतीय शोधकर्ताओं ने पाया है कि उनके द्वारा देखे गए नमूनों में से आधे ब्ल्यू (नीले) स्ट्रैग्लर एक करीबी द्वि-ध्रुवीय (बाइनरी)  साथी तारे से बड़े पैमाने पर द्रव्य स्थानांतरण के माध्यम से बनते हैंI

महत्वपूर्ण बिंदु

  • ब्लू स्ट्रैगलर्स (Blue stragglers) खुले या गोलाकार समूहों में सितारों का एक ऐसा वर्ग जो अलग ही दिखाई देते हैं क्योंकि वे बाकी सितारों की तुलना में अपेक्षाकृत बड़े और नीले रंग के होते हैंI ये उन वैज्ञानिकों को चिंतित करते हैं जिन्होंने लंबे समय से इन तारों की उत्पत्ति का अध्ययन किया है।
  • तारा मंडल में विद्यमान एक ही बादल से एक ही निश्चित अवधि में जन्मे तारों का कोई एक समूह अलग से दूसरा समूह बना लेता है।
  • जैसे-जैसे समय बीतता है, प्रत्येक तारा अपने द्रव्यमान के आधार पर अलग-अलग विकसित होने लगता है।
  • इनमें सबसे विशाल और चमकीले तारे विकसित होने के बाद मुख्य अनुक्रम से हट जाते हैं, जिससे उनके मार्ग में एक ऐसा विपथन आ जाता है जिसे टर्नऑफ़ के रूप में जाना जाता है।
  • इस मार्ग परिवर्तन के बाहर की परिधि में जा चुके गर्म और चमकीले तारों के फिर उसी समूह में बने रहने की अपेक्षा नहीं की जाती है, क्योंकि इसके बाद वे लाल दानव बनने के लिए मुख्य धारा को छोड़ देते हैं।
  • अध्ययन में पहचाने गए दिलचस्प समूहों और ब्लू स्ट्रैगलरर्स का अनुसरण भारत की पहली समर्पित अंतरिक्ष वेधशाला, एस्ट्रोसैट पर पराबैंगनी इमेजिंग (अल्ट्रा-वायलेट इमेजिंग) टेलीस्कोप के साथ-साथ नैनीताल स्थित 6 मीटर के देवस्थल ऑप्टिकल टेलीस्कोप के साथ किया जाएगा।

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पुरस्कार/सम्मान

एसोसिएशन फॉर टैलेंट डेवलपमेंट (एटीडी) 2021 बेस्ट अवार्ड

चर्चा में क्यों?

  • पॉवरग्रिड ने प्रतिष्ठित एसोसिएशन फॉर टैलेंट डेवलपमेंट (ATD) 2021 बेस्ट अवार्ड जीता है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • पावरग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (PGCIL) भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के तहत एक महारत्न सीपीएसयू है।
  • इस कंपनी को प्रतिष्ठित “एसोसिएशन फॉर टैलेंट डेवलपमेंट (एटीडी) 2021 बेस्ट अवार्ड” से सम्मानित किया गया है। इसने दुनिया भर के 71 संगठनों में 8वां स्थान हासिल किया है। इस प्रकार यह पुरस्कार जीतने वाला एकमात्र सार्वजनिक उपक्रम बन गया है और यह शीर्ष 20 कंपनियों में भारत की केवल दो कंपनियों में से एक है।
  • एसोसिएशन फॉर टैलेंट डेवलपमेंट (एटीडी, पूर्व में एएसटीडी) दुनिया की सबसे बड़ी एसोसिएशन है जो संगठनों में प्रतिभा विकसित करने के लिए समर्पित है।
  • एटीडी के बेस्ट अवार्ड को कौशल विकास उद्योग में सबसे प्रतिष्ठित सम्मान माना जाता है। वैश्विक कार्यक्रम उन संगठनों पर केंद्रित है जो प्रतिभा विकास के माध्यम से प्रतिष्ठान की सफलता को प्रदर्शित करते हैं।
  • पावरग्रिड को यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्रतिभा विकास विधियों और कार्यक्रमों के पोषण में अपने अथक प्रयासों के लिए मिला है। पावरग्रिड में प्रतिभा विकास पहल पावरग्रिड एकेडमी ऑफ लीडरशिप (PAL) द्वारा संचालित है।
  • पीएएल पावरग्रिड का प्रबंधन और प्रौद्योगिकी में अत्याधुनिक शिक्षण संस्थान है, जो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों ग्राहकों की जरूरतों की पूर्ति करता है। पीएएल में कर्मचारियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने, कर्मचारी उत्पादकता को बढ़ावा देने, कंपनी की संस्कृति को बेहतर एवं मजबूत बनाने के प्रशिक्षण और पहलों का आयोजन किया जाता है।

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अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य

ब्रिक्स के न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) में जुड़े नए सदस्य

चर्चा में क्यों?

  • ब्रिक्स सदस्य देशों के न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) ने विस्तार योजना के तहत नये सदस्यों के रूप में संयुक्त अरब अमीरात, उरूग्वे और बांग्लादेश को स्वीकृति दी है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • यह पहला अवसर है, जब दूसरे देशों को एनडीबी के सदस्य के रूप में मंजूरी दी गयी है।
  • ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका (ब्रिक्स) ने 2015 में एनडीबी का गठन किया।
  • बैंक का मुख्यालय शंघाई में है और इसका काम संबंधित देशों और अन्य विकासशील देशों में बुनियादी ढांचा और सतत विकास से जुड़ी परियोजनाओं के लिये संसाधन जुटाना है।
  • यानी वैश्विक वृद्धि और विकास के लिये बहुपक्षीय और क्षेत्रीय वित्तीय संस्थानों के मौजूदा प्रयासों को आगे बढ़ाना है।
  • एनडीबी के अध्यक्ष मार्कोस ट्रॉयजो हैं।
  • एनडीबी के पास 100 अरब डॉलर की अधिकृत पूंजी है। गठन के बाद से एनडीबी ने अपने सदस्य देशों की कुल 30 अरब डॉलर की 80 परियोजनाओं को मंजूरी दी।

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