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Daily Current Affairs: September 28, 2021

आर्थिक एवं वाणिज्यिक परिदृश्य

विभिन्न उत्पादों को जीआई टैग

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही भारत सरकार की भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री ने कई उत्पादों को जीआई टैग दिया है।

इन उत्पादों में शामिल हैं-

  • मणिपुर की सबसे प्रसिद्ध हाथी मिर्च और तामेंगलोंग संतरा
  • असम की जुडिमा राइस वाइन
  • राजस्थान से सोजत मेहंदी
  • नगालैंड से मीठी नगा ककड़ी
  • उत्तराखंड के सात उत्पाद
  • उत्तराखंड के सात उत्पादों कुमांऊ च्यूरा ऑयल, मुनस्यारी राजमा, उत्तराखण्ड का भोटिया दन, उत्तराखण्ड ऐंपण, उत्तराखण्ड रिंगाल क्राफ्ट, उत्तराखण्ड ताम्र उत्पाद एवं उत्तराखण्ड थुलमा

  क्या है जीआई टैग’ (GI Tag)?    

  • भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication) का इस्तेमाल ऐसे उत्पादों के लिये किया जाता है, जिनका एक विशिष्ट भौगोलिक मूल क्षेत्र होता है। इन उत्पादों की विशिष्ट विशेषता एवं प्रतिष्ठा भी इसी मूल क्षेत्र के कारण होती है।
  • जीआई टैग औद्योगिक संपत्ति के संरक्षण के लिये पेरिस कन्वेंशन (Paris Convention) के तहत बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) का एक भाग है।

कौन करता है इसका विनियमन?

  • अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर GI का विनियमन विश्व व्यापार संगठन (WTO) के बौद्धिक संपदा अधिकारों के व्यापार संबंधी पहलुओं (TRIPS) पर समझौते के तहत किया जाता है।

भारत में किस कानून के तहत दिया जाता है जीआई टैग?

  • राष्ट्रीय स्तर पर यह कार्य ‘वस्तुओं का भौगोलिक सूचक’ (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 (Geographical Indications of goods ‘Registration and Protection’ act, 1999) के तहत किया जाता है, जो सितंबर 2003 से लागू हुआ।
  • वर्ष 2004 में ‘दार्जिलिंग टी’ जीआई टैग प्राप्त करने वाला पहला भारतीय उत्पाद है।
  • भौगोलिक संकेतक का पंजीकरण 10 वर्ष के लिये मान्य होता है।

भारत में कौन जारी करता है जीआई टैग?

  • भारत में जीआई टैग ‘भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री’(चेन्नई) द्वारा जारी किया जाता है, जो कि उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कौन देता है जीआई टैग?

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर (World Intellectual Property Organization,WIPO) की तरफ से जीआई टैग जारी किया जाता है। इस टैग वाली वस्तु ओं पर कोई और देश अपना दावा नहीं ठोंक सकता है।

  • भारत को अब तक 365 जीआई टैग्स मिल चुके हैं।
  • जर्मनी के पास सबसे ज्यादा जीआई टैग्स हैं और उसने 9,499 वस्तुवओं के लिए इस टैग को हासिल किया है।
  • इसके बाद 7,566 जीआई टैग्स के साथ चीन दूसरे नंबर पर, 4,914 टैग्स के साथ यूरोपियन यूनियन तीसरे नंबर है।
  • इसके अलावा 3,442 टैग्स के साथ मोल्डोवा चौथे नंबर पर और 3,147 जीआई टैग्स के साथ बोस्निया और हेरजेगोविना पांचवें नंबर पर हैं।

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 चर्चित व्यक्तित्व

 महाराजा मिहिर भोज

चर्चा में क्यों?

  • उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर के दादरी में सम्राट मिहिर भोज प्रतिमा का अनावरण होने के बाद विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है।
  • दादरी के मिहिर भोज पीजी कॉलेज में 22 सितंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा का अनावरण किया था।
  • दरअसल विवाद महराज मिहिर भोज को राजपूत बताने पर हो रहा है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो प्रतिहार वंश की स्थापना आठवीं शताब्दी में नागभट्ट (730-756 ईस्वी) ने की थी और गुर्जरों की शाखा से संबंधित होने के कारण इतिहास में इन्हें गुर्जर प्रतिहार कहा जाता है।
  • केसी श्रीवास्तव अपनी पुस्तक ‘प्राचीन भारत का इतिहास तथा संस्कृति’ में लिखते हैं, “इस वंश की प्राचीनता पांचवीं शती तक जाती है।”
  • पुलकेशिन द्वितीय के ऐहोल अभिलेख में गुर्जर जाति का उल्लेख सर्वप्रथम हुआ है। बाण के हर्षचरित में भी गुर्जरों का उल्लेख हुआ है।
  • हर्षकाल में चीनी यात्री हुएनसांग ने भी गुर्जर देश का उल्लेख किया है।
  • उत्तर भारत के एक बड़े हिस्से में क़रीब तीन शताब्दियों तक इस वंश का शासन रहा और सम्राट हर्षवर्धन के बाद प्रतिहार शासकों ने ही उत्तर भारत को राजनीतिक एकता प्रदान की।
  • मिहिरभोज के ग्वालियर अभिलेख के मुताबिक, “नागभट्ट ने अरबों को सिंध से आगे बढ़ने से रोक दिया लेकिन राष्ट्रकूट शासक दंतिदुर्ग से उसे पराजय का सामना करना पड़ा।”
  • इतिहासकार प्रोफ़ेसर वीडी महाजन अपनी पुस्तक मध्यकालीन भारत में लिखते हैं कि मिहिरभोज प्रतिहार वंश के सबसे शक्तिशाली शासक थे जिन्होंने 836 ईस्वी से लेकर 885 ईस्वी तक शासन किया और कन्नौज पर अपना कब्ज़ा बरक़रार रखा।
  • यह वो समय था जब कन्नौज पर अधिकार के लिए बंगाल के पाल, उत्तर भारत के प्रतिहार और दक्षिण भारत के राष्ट्रकूट शासकों के बीच क़रीब सौ साल तक संघर्ष होता रहा जिसे इतिहास में “त्रिपक्षीय संघर्ष” कहा जाता है।

चंदबरदाई का अग्निकुंल सिद्धांत

  • अग्निकुल सिद्धांत राजपूतों की उत्पत्ति से संबंधित है। इसका उल्लेख चंदवरदायी ने 12 वीं शताब्दी के अन्त में रचित ग्रन्थ ‘पृथ्वीराज रासो’ में किया है।
  • इस सिद्धांत के अनुसार चालुक्य (सोलंकी), प्रतिहार, चहमान तथा परमार राजपूतों की उत्पत्ति आबू पर्वत के अग्निकुण्ड से बतलाई है, किन्तु इसी ग्रन्थ में एक अन्य स्थल पर इन्हीं राजपूतों को “रवि – शशि जाधव वंशी” कहा है।

मिहिर भोज की ऐतिहासिकता

  • उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतों में अरब यात्री सुलेमान का यात्रा वृत्तांत महत्त्वपूर्ण है। इसमें मिहिरभोज (836-885 ईस्वी) को जुज्र अर्थात् गुर्जर बताया गया है।
  • उल्लेखनीय है कि मिहिरभोज 9वीं शताब्दी में गुर्जर प्रतिहार वंश के शासक थे, जिनका साम्राज्य मुल्तान से बंगाल तक एवं कश्मीर से उत्तर महाराष्ट्र तक विस्तृत था।
  • मिहिरभोज ने अपनी राजधानी कन्नौज बनाई थी। ये विष्णुभक्त थे, अत: विष्णु के सम्मान में वाराह एवं प्रभास जैसी उपाधियाँ धारण की थी।
  • मिहिरभोज की उपलब्धियों का वर्णन उनके ग्वालियर प्रशस्ति अभिलेख में किया गया है।
  • इस तरह गुर्जर प्रतिहार वंश भी राजपूतों की ही शाखा थी इसलिए विवाद निरर्थक है।

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भारत एवं विश्व

अमेरिका ने भारत को सौंपी कलाकृतियां

चर्चा में क्यों?

  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हाल की अमेरिका यात्रा के दौरान 157 कलाकृतियों और पुरावशेषों को सौंपा गया।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • 10वीं शताब्दी में बने बलुआ पत्थर में रेवंता का बेस रिलीफ पैनल, 56 टेराकोटा के टुकड़े, कई कांस्य मूर्तियाँ तथा 11वीं और 14वीं शताब्दी से संबंधित तांबे की वस्तुओं का एक विविध सेट भी इस मूर्ति के साथ भारत को सौंपा गया।
  • सौंपी गई वस्तुओं की सूची में 18वीं शताब्दी की तलवार भी शामिल है, जिसमें फारसी में गुरु हरगोबिंद सिंह का उल्लेख है, इसके अतिरिक्त कुछ ऐतिहासिक पुरावशेषों में हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और जैन धर्म से संबंधित मूर्तियाँ भी शामिल हैं।
  • इनमें नटराज की एक कांस्य मूर्ति भी शामिल है।
  • नटराज रूप में भगवान शिव ब्रह्मांडीय नर्तक के रूप में, विशेष तौर पर दक्षिण भारत में कई शैव मंदिरों में धातु या पत्थर की मूर्तियों के रूप में पाए जाते हैं।
  • यह चोल मूर्तिकला का एक महत्त्वपूर्ण भाग है।

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निधन

कमला भसीन

  • महिला अधिकार कार्यकर्त्ता कमला भसीन का हाल ही में 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया है।
  • कमला भसीन का जन्म 24 अप्रैल, 1946 को राजस्थान में हुआ था और उनके पिता डॉक्टर थे।
  • वह ‘संगत-ए फेमिनिस्ट नेटवर्क’ के साथ अपने कार्य के लिये काफी प्रसिद्ध थीं, साथ ही उन्हें उनकी कविता ‘क्यूँकि मैं लड़की हूँ, मुझे पढ़ना है’ के लिये भी जाना जाता है।
  • वर्ष 1976 से वर्ष 2001 तक उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के ‘खाद्य एवं कृषि संगठन’ (FAO) के साथ काम किया।वर्ष 2002 में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से इस्तीफा दे दिया और ‘संगत’ संगठन के साथ बतौर संस्थापक सदस्य और सलाहकार के रूप में कार्य शुरू किया।

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चर्चित स्थान

हेंसन क्रेटर

चर्चा में क्यों?

  • ‘इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन’ ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर मौजूद एक क्रेटर का नाम ‘मैथ्यू हेंसन’ के नाम पर रखा है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • हेंसन क्रेटर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव में ‘स्वेर्ड्रुप’ और ‘डी गेर्लाचे’ क्रेटर्स के बीच स्थित है।
  • इस क्रेटर में ही ‘अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने ‘आर्टेमिस मिशन’ की लैंडिंग की योजना बनाई गई है।

कौन थे मैथ्यू हेंसन ?

  • 8 अगस्त, 1866 को मैरीलैंड में जन्मे मैथ्यू अलेक्जेंडर हेंसन अफ्रीकी अमेरिकी खोजकर्त्ता थे, जिन्होंने प्रसिद्ध अन्वेषक ‘रॉबर्ट ई. पियरी’ के साथ कई अन्वेषण अभियानों में हिस्स्सा लिया, जिनमें वर्ष 1909 में उत्तरी ध्रुव का अन्वेषण अभियान भी शामिल है।
  • इस अभियान के दौरान ‘मैथ्यू हेंसन’ दक्षिणी ध्रुव पर पहुँचने वाले पहले अन्वेषकों में से एक थे।

आर्टिमिस मिशन क्या है?

  • आर्टेमिस चंद्रमा अन्वेषण कार्यक्रम के माध्यम से नासा ने वर्ष 2024 तक पहली महिला और अगले पुरुष को चंद्रमा पर भेजने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
  • इस मिशन का लक्ष्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अंतरिक्ष यात्रियों को उतारना है।
  • आर्टेमिस मिशन के माध्यम से नासा नई प्रौद्योगिकियों, क्षमताओं और व्यापार दृष्टिकोण का प्रदर्शन करना चाहता है जो भविष्य में मंगल ग्रह में अन्वेषण के लिये आवश्यक होंगे।

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स्वास्थ्य एवं पोषण

वर्ष 2022 तक औद्योगिक ट्रांस फैट-मुक्त होगा भारत

चर्चा में क्यों?

  • ‘भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण’ (FSSAI) द्वारा आयोजित हालिया सर्वेक्षण के मुताबिक, भारत वर्ष 2022 तक औद्योगिक ट्रांस फैट-मुक्त बनने की राह पर है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • भारत ने ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ द्वारा निर्धारित अवधि से एक वर्ष पूर्व यानी वर्ष 2022 तक औद्योगिक रूप से उत्पादित ट्रांस वसा से देश को मुक्त करने के लिये औद्योगिक रूप से उत्पादित ट्रांस वसा की सीमा को 2 प्रतिशत से कम करना अनिवार्य किया है।

क्या है ट्रांस फैट?

  • तरल वनस्पति तेलों को अधिक ठोस रूप में परिवर्तित करने तथा खाद्य भंडारण एवं उपयोग अवधि में वृद्धि करने के लिये इन तेलों का हाइड्रोजनीकरण किया जाता है, इस प्रकार संतृप्त वसा या ट्रांस फैट का निर्माण होता है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, ट्रांस वसा का अधिक सेवन (कुल ऊर्जा सेवन का 1% से अधिक) हृदय रोग और मृत्यु दर के बढ़ते जोखिम से जुड़ा है।
  • यह मोटापा, टाइप-2 मधुमेह, चयापचय सिंड्रोम, इंसुलिन प्रतिरोध, बांझपन, कुछ विशेष प्रकार के कैंसर आदि की वृद्धि में भी सहायक है। मई 2018 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2023 तक वैश्विक खाद्य आपूर्ति से औद्योगिक रूप से उत्पादित ट्रांस फैट को खत्म करने के लिये एक व्यापक योजना की शुरुआत की थी।

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