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Daily Current Affairs: September 2, 2021

अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य

अमेरिका के अफगानिस्तान युद्ध का अंत

चर्चा में क्यों?

  • अफगास्तान में अमेरिका ने अपना युद्ध अभियान समाप्त कर दिया है। 31 अगस्त 2021 को अफगानिस्तान से सभी अमेरिकी सैनिकों की वापसी हो गई है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • एस सेंट्रल कमांड के कमांडर जनरल केनेथ मैकेंज़ी ने पुष्टि की कि अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान से अपनी वापसी पूरी कर ली है अमेरिका की अंतिम इवेक्यूशन फ़्लाइट हामिद करज़ई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से 31 अगस्त की मध्यरात्रि (स्थानीय समयानुसार) को रवाना हुई।
  • जनरल मैकेंजी ने कहा, “आज रात की वापसी सैन्य कार्रवाई के अंत का प्रतीक है। साथ ही यह 11 सितंबर 2001 के तुरंत बाद अफ़ग़ानिस्तान में शुरू हुए लगभग 20 साल के मिशन का अंत भी है।”
  • 9/11 यानी 11 सितंबर 2001 को दुनिया को सबसे बड़ा आतंकी हमला झेलने के करीब एक माह बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान में आतंकवाद को पनाह देने वाले तालिबान के खिलाफ युद्ध छेड़ा था।
  • दरअसल, दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका के वजूद को चुनौती देने वाले इस हमले में 3 हजार से ज्यादा लोगों की जानें गई थीं।
  • अमेरिका ने इस हमले के मास्टरमाइंड औऱ अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन (Al Qaeda Osama Bin laden) को सौंपने का हुक्म तालिबान को दिया था। लेकिन सत्ता के गुरूर में तालिबान ने अमेरिका को उसे नहीं सौंपा बल्कि उसे पनाह दी।
  • जवाब में अमेरिका ने 7 अक्टूबर 2001 को अफगानिस्तान पर हमला कर दिया। अमेरिकी अगुवाई में नाटो सेनाओं ने ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम के तहत तालिबान के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया।
  • यह अमेरिका या उसकी सेना का किसी भी देश के खिलाफ सबसे लंबा और सबसे खर्चीला संघर्ष था। इससे पहले वियतनाम युद्ध महज 5 माह चला था।

2020- दोहा (Doha) में शांति समझौता

  • अमेरिका और तालिबान के बीच कतर की राजधानी दोहा में 29 फरवरी 2020 को एक शांति समझौता हुआ। इसके तहत अमेरिका 1 मई 2021 से अपने सैनिकों की वापसी पर राजी हुआ। तालिबान ने अफगानिस्तान की सरजमीं से किसी आतंकी संगठन को मदद न करने का भरोसा दिया।

14 अप्रैल -बाइडेन ने की वापसी की घोषणा

  • अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन (US President Joe Biden ) ने 14 अप्रैल 2021 को घोषणा की कि अमेरिकी सैनिकों की 1 मई से अफगानिस्तान से वापसी शुरू हो जाएगी और 11 सितंबर तक पूरी होगी।
  • अमेरिका ने अफगानिस्तान से अपने नागरिकों, एजेंटों और मददगार अफगानी लोगों को निकाला। करीब 1 लाख 20 हजार लोगों को 15 दिन में सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।

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चक्रवाती तूफ़ान आइडा

चर्चा में क्यों?

  • अमेरिका के लुइसियाना प्रांत में चक्रवाती तूफ़ान (हरीकेन) आइडा (Ida) ने दस्तक दी है।
  • मैक्सिको की खाड़ी में उठा यह चक्रवाती तूफ़ान जब ज़मीन से टकराया तब 240 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ़्तार से हवाएं चल रही थीं।
  • आइडा तूफ़ान को एक प्रकार से शहर की बाढ़ से रक्षा की एक परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है।
  • दरअसल, साल 2005 में कैटरीना चक्रवाती तूफ़ान के बाद 1,800 लोग मारे गए थे।
  • इसके बाद शहर की बाढ़ से सुरक्षा के लिए कई अहम क़दम उठाए गए थे।

क्या होते हैं उष्णकटिबंधीय चक्रवात?

  • उष्णकटिबंधीय चक्रवात एक तीव्र चक्रवाती तूफान है जो गर्म उष्णकटिबंधीय महासागरों में उत्पन्न होता है।
  • कम वायुमंडलीय दबाव, तेज़ हवाएं और भारी बारिश इसकी विशेषताएं हैं।
  • इन चक्रवातों की विशेषताओं में एक चक्रवातों की आंख (Eye) में साफ आसमान, गर्म तापमान और कम वायुमंडलीय दबाव का क्षेत्र होता है।
  • इस प्रकार के तूफानों को उत्तरी अटलांटिक और पूर्वी प्रशांत में हरिकेन (Hurricanes) तथा दक्षिण-पूर्व एशिया एवं चीन में टाइफून (Typhoons), दक्षिण-पश्चिम प्रशांत और हिंद महासागर क्षेत्र में उष्णकटिबंधीय चक्रवात (Tropical Cyclones) और उत्तर-पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में विली-विलीज़ ( Willy-Willies) कहा जाता है।
  • उत्तरी गोलार्द्ध में इनकी गति घड़ी की सुई की दिशा के विपरीत अर्थात् वामावर्त (Counter Clockwise) और दक्षिणी गोलार्द्ध में दक्षिणावर्त (Clockwise) होती है।

उष्णकटिबंधीय तूफानों के बनने की आवश्यक दशाएं

  • 27 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वाली एक बड़ी समुद्री सतह।
  • कोरिओलिस बल की उपस्थिति।
  • ऊर्ध्वाधर/लम्बवत हवा की गति में छोटे बदलाव।
  • पहले से मौज़ूद कमज़ोर निम्न-दबाव क्षेत्र या निम्न-स्तर-चक्रवात परिसंचरण।
  • समुद्र तल प्रणाली के ऊपर विचलन (Divergence)।

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निधन

चंदन मित्रा

  • वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व राज्यसभा सांसद चंदन मित्रा का 1 सितंबर 2021 को निधन हो गया।
  • वे 66 साल के थे और लंबे समय से उनकी तबीयत खराब थी।

सिद्धार्थ शुक्ला

  • अभिनेता सिद्धार्थ शुक्ला का 2 सिंतंबर 2021 को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया है।
  • वह टीवी शो बिग बॉस-13 के विजेता थे। बालिका वधू से वह घर-घर में लोकप्रिय हो गए थे। वे 40 साल के थे।

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समारोह/सम्मेलन

बिम्सटेक कृषि सम्मेलन

चर्चा में क्यों?

  • आर्थिक संगठन बिम्सटेक (बे ऑफ बंगाल इनीशियेटिव फोर मल्टी-सेक्टोरल टेक्नीकल एंड इकोनॉमिक कोओपरेशन) ने सदस्य देशों के बीच कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में परस्पर भागीदारी बढ़ाने और सहयोग को गहरा करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • काठमांडू में वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए आयोजित बिम्सटेक कृषि विशेषज्ञों के अपने संबोधन में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक त्रिलोचन महापात्र ने विश्व स्तर पर कृषि और खाद्य प्रणालियों में हो रहे बदलावों के बारे में बात की।
  • बिम्सटेक सदस्य देशों ने कृषि में मास्टर और पीएचडी कार्यक्रमों के लिए छात्रवृत्ति के छह स्लॉट की पेशकश करने और बीज क्षेत्रों के विकास सहित क्षमता विकास और प्रशिक्षण के लिए अन्य पहलों की पेशकश करते हुए भारत की व्यापक भागीदारी की सराहना की।
  • म्यामां सरकार में योजना विभाग में उप महानिदेशक थांडा की, बैठक की सह-अध्यक्षता कर रहे थे।
  • बैठक में बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार और थाईलैंड के कृषि मंत्रालयों के विशेषज्ञों ने भाग लिया।

बिम्सटेक क्या है?

यह एक क्षेत्रीय बहुपक्षीय संगठन है तथा बंगाल की खाड़ी के तटवर्ती और समीपवर्ती क्षेत्रों में स्थित इसके सदस्य हैं जो क्षेत्रीय एकता का प्रतीक हैं।

इसके 7 सदस्यों में से 5 दक्षिण एशिया से हैं, जिनमें बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल और श्रीलंका शामिल हैं तथा दो- म्याँमार और थाईलैंड दक्षिण-पूर्व एशिया से हैं।

बिम्सटेक न सिर्फ दक्षिण और दक्षिण पूर्व-एशिया के बीच संपर्क बनाता है है बल्कि हिमालय तथा बंगाल की खाड़ी की पारिस्थितिकी को भी जोड़ता है।

इसके मुख्य उद्देश्य तीव्र आर्थिक विकास हेतु वातावरण तैयार करना, सामाजिक प्रगति में तेज़ी लाना और क्षेत्र में सामान्य हित के मामलों पर सहयोग को बढ़ावा देना है।

स्थापना

  • वर्ष 1997 में बैंकॉक घोषणा के माध्यम से यह संगठन अस्तित्व में आया।
  • प्रारंभ में इसका गठन चार सदस्य राष्ट्रों के साथ किया गया था जिनका संक्षिप्त नाम ‘BIST-EC’ (बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका और थाईलैंड आर्थिक सहयोग) था।
  • वर्ष 1997 में म्याँमार के शामिल होने के बाद इसका नाम बदलकर ‘BIMST-EC’ कर दिया गया।
  • वर्ष 2004 में नेपाल और भूटान के इसमें शामिल होने के बाद संगठन का नाम बदलकर “बे ऑफ़ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी सेक्टरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक को-ऑपरेशन” कर दिया गया।

उद्देश्य

  • क्षेत्र में तीव्र आर्थिक विकास हेतु वातावरण तैयार करना।
  • सहयोग और समानता की भावना विकसित करना।
  • सदस्य राष्ट्रों के साझा हितों के क्षेत्रों में सक्रिय सहयोग और पारस्परिक सहायता को बढ़ावा देना।
  • शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी आदि क्षेत्रों में एक-दूसरे पूर्ण सहयोग।

संपर्क परियोजनाएं

  • कलादान मल्टीमॉडल परियोजना: यह परियोजना भारत और म्यांमार को जोड़ती है।
  • एशियाई त्रिपक्षीय राजमार्ग: म्यांमार से होकर भारत और थाईलैंड को जोड़ता है।
  • बांग्लादेश-भूटान-भारत-नेपाल (BBIN) मोटर वाहन समझौता: यात्री और माल परिवहन के निर्बाध प्रवाह हेतु।

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रक्षा-प्रतिरक्षा

भारत- अल्जीरिया की नौसेनाओं ने किया संयुक्त सैन्य अभ्यास

  • हाल ही में भारत और अल्जीरिया की नौसेनाओं ने समुद्री सहयोग बढ़ाने हेतु अल्जीरियाई तट पर पहले नौसैनिक अभ्यास में भाग लिया।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • अल्जीरिया के साथ नौसैनिक अभ्यास भारत के लिये महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह रणनीतिक रूप से माघरेब क्षेत्र (भूमध्य सागर की सीमा से लगे उत्तरी अफ्रीका के क्षेत्र) में स्थित है और अफ्रीका का सबसे बड़ा देश है।
  • इस अभ्यास में भारतीय नौसेना के जहाज़ आईएनएस तबर ने अल्जीरियाई नौसेना के जहाज़ ‘एज्जादजेर’ के साथ समुद्री साझेदारी अभ्यास में भाग लिया।
  • आईएनएस तबर, रूस में भारतीय नौसेना के लिये बनाया गया तलवार श्रेणी का ‘स्टील्थ फ्रिगेट’ है।

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नियुक्ति/निर्वाचन

पंकज कुमार सिंह

चर्चा में क्यों?

  • राजस्थान कैडर के वर्ष 1988 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पंकज कुमार सिंह को ‘सीमा सुरक्षा बल’ (BSF) का महानिदेशक नियुक्त किया गया है।
  • पंकज कुमार सिंह वर्तमान में ‘सीमा सुरक्षा बल’ के विशेष महानिदेशक के रूप में कार्यरत हैं।
  • सीमा सुरक्षा बल (BSF) की स्थापना भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद भारतीय सीमाओं की रक्षा करने के विशेष उद्देश्य के मद्देनज़र वर्ष 1965 में की गई थी। यह गृह मंत्रालय (MHA) के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत भारत के पांच केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) में से एक है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) के 65 लाख से अधिक रक्षाकर्मी पाकिस्तान और बांग्लादेश की सीमाओं पर तैनात हैं।

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अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य

हिंद महासागर में चीन का नया समुद्री-सड़क-रेल लिंक

चर्चा में क्यों?

  • चीन ने अपनी स्ट्र्रिंग ऑफ पर्ल नीति के तहत भारत की चौतरफा घेरेबंदी तेज करते हुए चीन ने पहली बार भारत का प्रभाव क्षेत्र कहे जाने वाले हिंद महासागर तक अपनी पहली ट्रेन पहुंचा दी है जो सड़क मार्ग से जुड़ी है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • इस रेलवे लाइन के जरिए सामान लेकर यह ट्रेन म्‍यांमार सीमा से पश्चिमी चीन के चेंगदू व्‍यवसायिक हब तक रवाना हुई है। इस रोड-रेललाइन की मदद से चीन की अब सीधी पहुंच बंगाल की खाड़ी तक हो गई है।
  • प्रयोग के तौर पर सामान को चाइना-म्‍यांमार न्‍यू पैसेज के जरिए 27 अगस्‍त को चेंगदू रेल पोर्ट तक लाया गया है।
  • इस ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर में समुद्री-रोड रेल लिंक शामिल है।
  • सिंगापुर से चीन का सामान अंडमान सागर से होते हुए मालवाहक जहाज के जरिए म्‍यांमार के यंगून बंदरगाह तक पहुंचा था। इसके बाद सामान को सड़क के जरिए म्‍यांमार-चीन सीमा पर युन्नान प्रांत के लिकांग तक पहुंचाया गया।
  • इसके बाद सामान को लिकांग से रेलवे के जरिए चेंगदू तक ले जाया गया। इस तरह से चीन अब सिंगापुर से म्‍यांमार के रास्‍ते भी जुड़ गया है।
  • चीन के अनुसार यह हिंद महासागर से दक्षिणी-पश्चिमी चीन को कनेक्‍ट करने का सबसे आसान रास्‍ता है।
  • चीन ने कहा कि इस रास्‍ते के इस्‍तेमाल से एक तरफ यात्रा में 20 से 22 दिन कम लग रहे हैं।

ग्‍वादर बंदरगाह पर घटेगी निर्भरता

  • चीन अभी पाकिस्‍तान के ग्‍वादर बंदरगाह के जरिए हिंद महासागर से जुड़ने पर काम कर रहा है।
  • इससे वह मलक्‍का स्‍ट्रेट में अपने शत्रुओं के घेरे जाने के खतरे से बच जाएगा।
  • ग्‍वादर पोर्ट को सीपीईसी के तहत बनाया जा रहा है। हालां‍कि अगर चीन चेंगदू के लिए म्‍यांमार के रास्‍ते व्‍यापार करता है तो उसका खर्चा ग्‍वादर के मुकाबले कम आएगा।
  • चीन की बंगाल के खाड़ी तक सीधी पहुंच भारत के लिए बड़ा खतरा
  • म्‍यांमार की सीमा से चीन के चेंगदू शहर तक ट्रेन के पहुंचने में मात्र 3 दिन का समय लगता है।
  • यह पश्चिमी चीन को हिंद महासागर से जोड़ने का पहला रास्‍ता है। चीन की रेलवे लाइन अभी म्‍यांमार की सीमा तक आकर खत्‍म हो जाती है।

 अब इसे चीन बंदरगाह तक बढ़ाना चाहता है।

  • चीन म्‍यांमार के सीमाई कस्‍बे चिन श्‍वे हाव को बेल्‍ट एंड रोड परियोजना के जरिए ‘बॉर्डर इकनॉमिक जोन’ के रूप में बदलना चाहता है।
  • विश्‍लेषकों के मुताबिक चीन की बंगाल के खाड़ी तक सीधी पहुंच भारत के लिए बड़ा खतरा है। चीन जिस रास्‍ते से दक्षिणी पूर्वी एशियाई देशों के साथ व्‍यापार करना चाहता है, उसी रास्‍ते में अंडमान निकोबार द्वीप समूह भी आते हैं।
  • चीन के जहाज आगे चलकर बड़े पैमाने में बंगाल की खाड़ी से गुजरेंगे। इससे वे आसानी से भारतीय द्वीपों पर नजर रख सकते हैं।
  • यही नहीं चीन की बढ़ती पहुंच से पूर्वोत्‍तर भारत में भी संकट बढ़ सकता है जहां विद्रोही अक्‍सर हमले करते रहते हैं।

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