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Daily Current Affairs: October 7, 2021

पुरस्कार/ सम्मान

2021 के लिए रसायन का नोबेल पुरस्कार

  • रसायन विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए इस साल का प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार जर्मन वैज्ञानिक बेंजामिन लिस्ट (Benjamin List) और स्काटिश मूल के अमेरिकी वैज्ञानिक डेविड डब्ल्यूसी मैकमिलन (David W.C. MacMillan) को दिया गया है।

इसलिए मिला नोबेल पुरस्कार

  • स्टाकहोम (स्वीडन) में स्थित नोबेल पुरस्कार समिति के अनुसार इन दोनों वैज्ञानिकों को यह पुरस्कार “असममित ऑर्गेनोकैटलिसिस के विकास के लिए (for the development of asymmetric Organocatalysis ) दिया जा रहा है।

खोज ने फार्मास्युटिकल रिसर्च में दिया बड़ा योगदान

  • इन दोनों वैज्ञानिकों ने मॉलिक्यूलर कंस्ट्रक्शन के लिए एक सटीक और नया उपकरण विकसित किया है। इस उपकरण का फार्मास्युटिकल रिसर्च पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ा है।
  • उत्प्रेरक (कटैलिसीस) केमिस्ट के लिए मौलिक उपकरण हैं, लेकिन शोधकर्ता लंबे समय से मानते थे कि सिद्धांत रूप में, केवल दो प्रकार के उत्प्रेरक उपलब्ध थे। इनमें से पहला धातु और दूसरा एंजाइम था।
  • सन 2000 में बेंजामिन लिस्ट और डेविड मैकमिलन ने एक दूसरे से स्वतंत्र तीसरे प्रकार के कैटलिसीस का विकास किया। इसे असममित ऑर्गेनोकैटलिसिस कहा जाता है और यह छोटे कार्बनिक अणुओं पर बनता है।
  • पिछले दो दशकों में नए उत्प्रेरकों का उपयोग कई तरीकों से किया गया है, जिसमें नए फार्मास्यूटिकल्स बनाने और सौर कोशिकाओं में प्रकाश को पकड़ने वाले अणुओं का निर्माण शामिल है।
  • नोबेल पुरस्कार कमेटी के अनुसार दोनों वैज्ञानिकों ने रासायनिक अणुओं को एक साथ कैसे रखा जाए, इस बारे में सोचने का एक बिल्कुल नया तरीका शुरू किया।
  • नोबेल पुरस्कार के तहत स्वर्ण पदक, एक करोड़ स्वीडिश क्रोनर (तकरीबन 8.20 करोड़ रूपये) की राशि दी जाती है।

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रिपोर्ट/इंडेक्स

‘2021 भारत के लिए शिक्षा रिपोर्ट की स्थिति: शिक्षक नहीं, कक्षा नहीं

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में यूनेस्को ने ‘2021 भारत के लिए शिक्षा रिपोर्ट की स्थिति: शिक्षक नहीं, कक्षा नहीं’ रिपोर्ट जारी की।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • रिपोर्ट के अनुसार देश में लगभग 1 लाख स्कूल ऐसे हैं जहां पूरी जिम्मेदारी केवल एक शिक्षक के कंधों पर है।
  • देश में 16 लाख यानी 19 प्रतिशत शिक्षकों के पद अभी रिक्त हैं, इनमें से 69 फीसदी रिक्तियां ग्रामीण इलाकों में हैं।
  • एक लाख से अधिक रिक्तियों वाले तीन राज्य हैं। इनमें से उत्तर प्रदेश में शिक्षकों के 3 लाख पद, बिहार में 2.2 लाख और पश्चिम बंगाल में 1.1 लाख पद रिक्त हैं।
  • यूनेस्को की रिपोर्ट में इन तीनों राज्यों को सबसे खराब मानकों वाले राज्यों का दर्जा दिया गया है।
  • बिहार की 89 प्रतिशत रिक्तियां ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा 80 फीसदी और पश्चिम बंगाल में 69 फीसदी है।

1.1 लाख स्कूलों में केवल एक शिक्षक, एमपी में सबसे ज्यादा

  • रिपोर्ट बताती है कि शिक्षकों की वर्तमान कमी को पूरा करने के लिए भारत को 16 लाख अतिरिक्त शिक्षकों की जरूरत है।
  • आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PFLS) के 2018-19 डाटा की गणनाओं के आधार पर रिपोर्ट में बताया गया है कि सभी राज्यों में एक लाख 10 हजार 971 स्कूलों में केवल एक शिक्षक है।
  • इनमें 69 प्रतिशत स्कूल ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। अरुणाचल और गोवा जैसे राज्यों में ऐसे स्कूलों की संख्या अधिक है।
  • यूनेस्को की इसरिपोर्ट के अनुसार अरुणाचल प्रदेश में एक शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या 22 प्रतिशत है।
  • वहीं, गोवा में 08 फीसदी, तेलंगाना में 15.71 फीसदी, आंध्र प्रदेश में 14.4, झारखंड में 13.81 और उत्तराखंड में 13.64 प्रतिशत है।
  • वहीं, मध्यप्रदेश में यह आंकड़ा 08 और राजस्थान में 10.08 प्रतिशत है।

लिंग अनुपात संतुलित

  • लिंग अनुपात कुल मिलाकर संतुलित रहा है। महिला शिक्षकों की संख्या करीब 50 प्रतिशत है। हालांकि, अंतरराज्यीय और शहरी-ग्रामीण असंतुलन बना हुआ है। असम, झारखंड व राजस्थान में 39 फीसदी शिक्षिकाएं हैं। त्रिपुरा में यह आंकड़ा 32 प्रतिशत है। चंडीगढ़ में यह संख्या सबसे ज्यादा 82 फीसदी है। इसके बाद गोवा (80), दिल्ली (74) और केरल (78) आते हैं।
  • इस रिपोर्ट के अनुसार शहरी क्षेत्रों में ग्रामीण क्षेत्रों के मुकाबले महिला शिक्षकों का अनुपात अधिक है। ग्रामीण इलाकों में जहां 28 फीसदी प्राइमरी स्कूल शिक्षक महिलाएं हैं।
  • वहीं, शहरी इलाकों में यह आंकड़ा 69 प्रतिशत है। माध्यमिक शिक्षा के स्तर की बात करें तो देश के ग्रामीण इलाकों में महिला शिक्षकों की संख्या जहां 24 फीसदी पर है। वहीं, शहरी इलाकों में 53 फीसदी शिक्षिकाएं हैं।

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 “द स्टेट ऑफ क्लाइमेट सर्विस 2021: वाटर

चर्चा में क्यों?

  • संयुक्त राष्ट्र ने अपनी नई रिपोर्ट ‘The State of Climate Services 2021: Water’ में दुनिया पर मंडराते जल संकट पर गंभीर चेतावनी जारी की है।

WMO की वाटर रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

  • जलवायु परिवर्तन से बाढ़ और सूखे जैसे पानी से संबंधित खतरे बढ़ जाते हैं।
  • जलवायु परिवर्तन से पानी की कमी से प्रभावित लोगों की संख्या में भी वृद्धि होगी।
  • वर्ष, 2018 में दुनिया भर में 6 बिलियन लोगों के पास प्रति वर्ष कम से कम एक महीने पानी की अपर्याप्त पहुंच थी।
  • यह संख्या वर्ष, 2050 तक पांच अरब से अधिक होने की उम्मीद है.
  • यह स्थिति और खराब होती जा रही है क्योंकि पृथ्वी पर केवल 5 प्रतिशत पानी ही उपयोग योग्य ताजा पानी उपलब्ध है।
  • पिछले दो दशकों की तुलना में वर्ष, 2000 के बाद से बाढ़ से संबंधित आपदाओं में 134 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। हालांकि, इसी अवधि के दौरान सूखे की संख्या और अवधि में 29 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
  • अफ्रीका में, लगभग दो अरब लोग पानी की कमी वाले देशों में रहते हैं। उन्हें पीने के लिए सुरक्षित पानी और साफ-सफाई की कमी का सामना करना पड़ता है।

सूखे से होने वाली मौतें

  • WMO की इस वाटर रिपोर्ट में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है कि, सूखे (अकाल) से संबंधित अधिकांश मौतें अफ्रीका में हुई हैं।
  • इस प्रकार, अफ्रीकी क्षेत्र में सूखे के लिए अधिक मजबूत एंड-टू-एंड चेतावनी प्रणाली की आवश्यकता है।
  • एशिया में बाढ़ से संबंधित अधिकांश मौतें और आर्थिक नुकसान देखे जाते हैं।

बढ़ते तापमान का प्रभाव

  • इस वाटर रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ते तापमान के परिणामस्वरूप वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर वर्षा काल में परिवर्तन हो रहा है। इससे वर्षा के पैटर्न के साथ-साथ कृषि मौसम में भी बदलाव आएगा।

WMO की सिफारिशें

  • WMO ने यह सिफारिश की है कि, देशों को अपने एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन और सूखा एवं बाढ़ के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली में निवेश बढ़ाना चाहिए। WMO ने सभी देशों से बुनियादी हाइड्रोलॉजिकल वैरिएबल के लिए डाटा एकत्र करने की क्षमता में अंतर को दूर करने का भी आग्रह किया है।

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योजना-परियोजना

पीएम मित्र योजना

चर्चा में क्यों?

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कपड़ा उद्योग के लिए मित्र (MITRA) योजना को स्वीकृति प्रदान की है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • इस योजना के तहत अगले पांच सालों में कुल 4,445 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
  • इसके तहत 7 मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल (PM MITRA) पार्क स्थापित करने को मंजूरी दी गई है।
  • इस योजना से सात लाख लोगों को प्रत्यक्ष और 14 लाख को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है।
  • पीएम मित्र का विकास पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के जरिये किया जाएगा, यानी सरकार निजी कंपनियों के साथ मिलकर पीपीपी के तहत परियोजनाओं को पूरा करेगी।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 5F के तहत ये टेक्सटाइल पार्क बनाए जाएंगे। सरकार मेगा इंटिग्रेटेड टेक्सटाइल पार्क बनाने पर जोर दे रही है, जहां कपड़े तैयार करने से लेकर उनकी मार्केटिंग, डिजाइनिंग और एक्सपोर्ट सभी एक ही जगह से हो सके।
  • सारी बुनियादी सुविधाएं एक जगह होने से टेक्सटाइल सेक्टर को बड़ी तादाद में एक ही रोजगार देने और एक्सपोर्ट मार्केट में अपनी पैठ बनाने में मदद मिलेगी।

वस्त्र उद्योग से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

  • कपड़ा और परिधान उद्योग देश के समग्र सामाजिक और आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • कपड़ा और वस्तु उद्योग का समग्र जी.डी.पी. में 2 प्रतिशत तथा 2020 में जी.वी.ए. में कुल उत्पादन में11 प्रतिशत योगदान रहा है जिससे लगभग 10.5 करोड़ लोगों को कुल प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है।
  • यह क्षेत्रा देश में कृषि के पश्चात् सबसे बड़ा नियोजक है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस क्षेत्रा में काम करने
  • वाले कामगारों में एक बड़ा भाग महिलाओं का है तथा यह महिला सशक्तिकरण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है तथा इस प्रकार देश में समग्र सामाजिक विकास में भी योगदान करता है।
  • भारत का स्थान कपड़ा और वस्त्र उत्पादों के निर्यातक के तौर पर चीन, जर्मनी, बांग्ला देश, वियतनाम तथा इटली के बाद छठे स्थान पर आता है।

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पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी

हैलाग्स ग्लेशियर

चर्चा में क्यों?

  • ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण दुनिया भर में ग्लेशियर हर साल पिघल रहे हैं। वैज्ञानिकों ने कई उपाय सुझाव जैसे कार्बन उत्सर्जन में कमी, पेड़ों की कटाई कम करने वगैरह।
  • लेकिन ज्यादा असर नहीं हुआ तो स्वीडन के वैज्ञानिकों के दल ने हैलाग्स ग्लेशियर को पिघलने से बचाने के लिए कपड़े से ही ढक दिया। आश्चर्यजनक नतीजे आए।
  • गर्मियों के चार महीने के दौरान ग्लेशियर ढका रहा तो लगभग साढ़े तीन मीटर ऊंचाई तक की बर्फ नहीं पिघली। वैज्ञानिकों ने ऊन और मक्के के स्टार्च से बने कपड़े का इस्तेमाल बर्फ को ढकने के लिए किया था।
  • जबकि स्वीडन के सबसे ऊंचे कैबनिकैसे में इसी दौरान लगभग दो मीटर तक बर्फ पिघल गई। वैज्ञानिक एरिक हस का कहना है कि इसके द्वारा हम लोगों में जागरूकता फैलाने चाहते हैं कि ग्लोबल वॉर्मिंग से ग्लेशियरों को बचाया जाए।

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चर्चित पु्स्तक

द मिनिस्ट्री फॉर द फ्यूचर

चर्चा में क्यों?

  • बेस्टसेलिंग साइंस-फिक्शन लेखक किम स्टेनली रॉबिन्सन की कुछ समय पहले “द मिनिस्ट्री फॉर द फ्यूचर” नाम से पुस्तक लिखी थी।
  • इसमें भारत के एक काल्पनिक दृश्य का वर्णन है कि घातक गर्मी का डोम प्रांतीय शहर की लगभग पूरी आबादी को नेस्तानाबूद कर देता है।
  • इस किताब की कल्पना के दो साल बाद अब प्रोसिडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में एक शोध प्रकाशित हुआ है।
  • इसके अनुसार धरती पर जलवायु परिवर्तन से होने वाली जानलेवा गर्मी का सामना करने वाले आधे से ज्यादा लोग भारत में हैं।
  • भारत के 50 में से 17 शहर भीषण गर्मी से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
  • दुनिया में सबसे ज्यादा गर्मी झेलने वाले शहरों में दिल्ली दूसरे नंबर पर है। पहले स्थान पर बांग्लादेश की राजधानी ढाका है।

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