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 Daily Current Affairs: October 12, 2021

अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार -2021

  • महान वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में स्वेरिग्स रिक्सबैंक (Sveriges Riksbank) द्वारा दिए जाने वाला अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार 2021 के लिए तीन अमेरिकी अर्थशास्त्रियों को दिया जा रहा है।

ये तीन अर्थशास्त्री हैं-

  • प्रोफेसर डेविड कार्ड (David Card): कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले, यूएसए
  • प्रोफेसर जोशुआ डी एंग्रिस्ट (Joshua Angrist): मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT), कैम्ब्रिज, यूएसए
  • प्रोफेसर गुइडो डब्ल्यू इम्बेन्स (Guido Imbens):स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी, यूएसए
  • पुरस्कार की राशि का 50 प्रतिशत भाग डेविड कार्ड को दिया गया है और दूसरा आधा हिस्सा संयुक्त रूप से एंग्रिस्ट और इम्बेन्स में बांटा जाएगा।
  • डेविड कार्ड कनाडाई मूल के अमेरिकी हैं, वहीं जोशुआ एंग्रिस्ट अमेरिकी मूल के औऱ गुइडो इम्बेन्स डच मूल के अमेरिकी हैं।

क्यों दिया गया नोबेल पुरस्कार?

  • रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज के अनुसार प्रोफेसर डेविड कार्ड को “श्रम अर्थशास्त्र में उनके अनुभवजन्य योगदान के लिए” यह पुरस्कार दिया गया है।
  • डेविड कार्ड ने प्राकृतिक प्रयोगों ( Natural experiments, ) का उपयोग करते हुए न्यूनतम मजदूरी, आप्रवास और शिक्षा के श्रम बाजार प्रभावों का विश्लेषण किया है।
  • 1990 के दशक की शुरुआत से उनके अध्ययन ने पारंपरिक ज्ञान को चुनौती दी, जिससे नए विश्लेषण और अतिरिक्त अंतर्दृष्टि (insight) प्राप्त हुई।
  • जबकि प्रोफेसर जोशुआ और गुइडो डब्ल्यू इम्बेन्स को “कारण संबंधों के विश्लेषण में उनके पद्धतिगत (Methodical) योगदान के लिए” यह पुरस्कार दिया गया है।
  • एकेडमी के अनुसार इस वर्ष के पुरस्कार विजेताओं ने हमें श्रम बाजार के बारे में नई अंतर्दृष्टि प्रदान की है और दिखाया है कि प्राकृतिक प्रयोगों से कारण और प्रभाव के बारे में क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है।
  • उनका दृष्टिकोण अन्य क्षेत्रों में फैल गया है और अनुभवजन्य अनुसंधान में क्रांतिकारी बदलाव आया है।

अर्थशास्त्र के नोबेल के बारे में

  • अधिकारिक रूप से यह पुरस्कार अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार स्वेरिग्स रिक्सबैंक प्राइज़ इन इकोनॉमिक साइंसेज़ इन मेमोरी ऑफ़ अल्फ्रेड नोबेल (Sveriges Riksbank Prize in Economic Sciences in Memory of Alfred Nobel) के तौर पर जाना जाता है।
  • इस प्रतिष्ठित पुरस्कार की स्थापना वर्ष 1968 में स्वेरिग्स रिक्सबैंक (Sveriges Riksbank) जो कि स्वीडन का केंद्रीय बैंक है द्वारा की गई थी।
  • जबकि फिजियोलॉजी/मेडिसिन, भौतिकी, रसायन, साहित्य और शांति के लिए पुरस्कार पहली बार वर्ष 1901 में प्रदान किये गए थे।
  • इसकी पुरस्कार राशि 10 मिलियन स्वीडिश क्रोनर (लगभग 8.33 करोड़ रुपए) है।
  • 2019 में यह पुरस्कार भारतीय-अमरीकी अर्थशास्त्री अभिजीत विनायक बनर्जी को उनकी पत्नी एश्तर डूफलो और सहयोगी माइकल क्रेमर के साथ वैश्विक ग़रीबी से लड़ने के अध्ययन पर संयुक्त रूप से दिया गया था।
  • जबकि 2020 में यह अमेरिकी अर्थशास्त्री पॉल मिल्ग्राम (Paul Milgrom) एवं रॉबर्ट विल्सन (Robert Wilson) को वाणिज्यिक नीलामी (Commercial Auctions) के क्षेत्र में कार्य करने के लिये अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।

नोबेल पुरस्कारों की पृष्ठभूमि

  • ये पुरस्कार डायनामाइट के आविष्कारक वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में दिये जाते हैं।
  • 10 दिसंबर, 1901 को स्टॉकहोम और क्रिस्टीनिया (अब ओस्लो) में पहली बार नोबेल पुरस्कार दिये गए।
  • नोबेल पदक हस्तनिर्मित होते हैं तथा 18 कैरेट सोने से बने होते हैं।
  • अर्थशास्त्र के लिये नोबेल पुरस्कारों की शुरुआत वर्ष 1968 में हुई थी।
  • नोबेल पुरस्कार में नोबेल पदक, उपाधि और पुरस्कार राशि की पुष्टि करने वाला एक दस्तावेज़ होता है।
  • 2020 में पुरस्कार राशि पिछले वर्षों से बढ़कर 10 मिलियन स्वीडिश क्रोनर हो गई जो लगभग 1.1 मिलियन डॉलर के बराबर है।
  • सभी पुरस्कार नोबेल सप्ताह के दौरान स्टॉकहोम (स्वीडन) में दिए जाते हैं, जो 2021 में 6-12 दिसंबर तक चलता है।

रिपोर्ट/इंडेक्स

वैश्विक बहुआयामी गरीबी पर नयी विश्लेषण रिपोर्ट

चर्चा में क्यों?

  • भारत में छह बहुआयामी गरीबों में पांच निम्न जनजातियों या जातियों से हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा हाल ही में जारी की गयी वैश्विक बहुआयामी गरीबी पर नयी विश्लेषण रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आयी है।

रिपोर्ट के महत्वपूर्ण बिंदु

  • संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक ( Global Multidimensional Poverty Index ) तथा गरीबी पर ऑक्सफोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल की रिपोर्ट में इसका उल्लेख किया है।
  • भारत में छह बहुआयामी गरीबों में छह में से पांच निम्न जनजातियों या जातियों से हैं। अनुसूचित जाति कुल जनसंख्या का 4 प्रतिशत है और वह सबसे अधिक निर्धन है तथा 12.9 करोड़ में 6.5 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी में रह रहे हैं। वे भारत में बहुआयामी गरीबी में रह रहे लोगों का छठा भाग हैं।
  • अनुसूचित जनजाति के बाद अनुसूचित जाति समूह आता है जो कुल आबादी का 3 प्रतिशत हैं। उनकी संख्या 28.3 करोड़ हैं जिनमें से 9.4 करोड़ बहुआयामी गरीबी में जीवन-यापन कर रहे हैं।
  • रिपोर्ट के अनुसार अन्य पिछड़ा वर्ग कुल जनसंख्या का 2 प्रतिशत है । उनकी संख्या 58.8 करोड़ है जिनमें 16 करोड़ बहुआयामी गरीबी में गुजर-बसर कर रहे हैं। वैसे तो उनमें गरीबी कम है लेकिन उसकी तीव्रता अनुसूचित जाति की तुलना में समान ही है।
  • कुल मिलाकर, भारत में भारत में छह बहुआयामी गरीबों में पांच ऐसे परिवारों में रहते हैं जिनके मुखिया अनुसूजित जनजाति, अनुसूचित जाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से है।
  • वैश्विक रूप से जिन 3 अरब बहुआयामी गरीबों पर यह अध्ययन किया गया, उनमें दो तिहाई यानी 83.6 करोड़ लोग ऐसे घरों में रहते हैं जहां महिला सदस्यों ने छह साल की स्कूली पढाई पूरी की है।
  • इन 6 करोड़ लोगों में ज्यादातर उपसहारा अफ्रीका (36.3 करोड़), दक्षिण एशिया (35 करोड़) में रहते हैं।
  • भारत में 7 करोड़, पाकिस्तान में 7.1 करोड़, इथियोपियों में 5.9 करोड़, चीन में 3.2 करोड़ बाग्लादेश में तीन करोड़ में हैं।
  • इस रिपोर्ट के अनुसार जिन पांच देशों में सबसे अधिक गरीब है उनमें भारत में (2015/16) 38.1 करोड़, नाईजीरिया में (2018) 9.3 करोड़, पाकिस्तान में (2017/18) 8.3 करोड़, इथियोपिया में 7 करोड़, कांगो गणराज्य में (2017/18) 5.6 करोड़ हैं।

क्या है बहुआयामी गरीबी?

  • ‘ऑक्सफोर्ड पॉवर्टी एंड ह्यूमन डवलपमेंट इनीशिएटिव’ के अनुसार, बहुआयामी गरीबी के निर्धारण में लोगों द्वारा दैनिक जीवन में अनुभव किये जाने वाले सभी अभावों को समाहित किया जाता है।
  • ये वो गरीब एवं वंचित लोग हैं जो जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय गिरावट से सबसे अधिक पीड़ित हैं, यही वजह है कि वे एक ‘दोहरा बोझ’ उठाते हैं।
  • वे पर्यावरण में गिरावट, वायु प्रदूषण, स्वच्छ पानी की कमी और अस्वस्थ स्वच्छता की स्थिति के प्रति कमज़ोर/ भेद्य हैं जिन्हें पर्याप्त पोषण या उचित आवास सुविधाएँ भी प्राप्त नहीं हैं।
  • इसके निर्धारण में खराब स्वास्थ्य, शिक्षा की कमी, जीवन स्तर में अपर्याप्तता, काम की खराब गुणवत्ता, हिंसा का खतरा तथा ऐसे क्षेत्रों में रहना जो पर्यावरण के लिये खतरनाक होते हैं जैसे कारकों को शामिल किया जाता है।

वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI):

  • वैश्विक ‘बहुआयामी गरीबी सूचकांक’ 107 विकासशील देशों की बहुआयामी गरीबी मापने की अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली है
  • इसे ‘ऑक्सफोर्ड गरीबी और मानव विकास पहल’ (OPHI) और ‘संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम’ (UNDP) द्वारा वर्ष 2010 में विकसित किया गया था।
  • इसे प्रतिवर्ष जुलाई माह में संयुक्त राष्ट्र के सतत् विकास पर ‘उच्च-स्तरीय राजनीतिक फोरम’ (HLPF) में जारी किया जाता है।

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राज्य परिदृश्य

दिल्ली: देश के मेंटरयोजना

चर्चा में क्यों?

  • दिल्ली सरकार ने हाल ही में सरकारी स्कूलों में पढ़नें वाले छात्रों के लिए ‘देश के मेंटर’ स्कीम को लांच किया।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • योजना के तहत मेंटर को रोजाना सिर्फ 10-15 मिनट स्कूल के बच्चों से फोन पर बात करनी होगी।

कौन बन सकता है मेंटर?

  • इस प्रोग्राम के तहत मेंटर बनने के लिए कुछ योग्यताएं होनी चाहिए। उक्त व्यक्ति की उम्र 35 साल से कम होनी चाहिए।
  • साथ ही वह किसी अच्छे विश्वविद्यालय से पढ़ा हुआ हो या युवा प्रोफेशनल हो या आंत्रप्रन्योर हो और खुद का कारोबार करता हो या फिर खेल/लेखन/गायन/कला क्षेत्र में कुछ अच्छा कर रहा हो।

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खेल परिदृश्य

फ्रांस पहली बार बना नेशंस लीग का विजेता

चर्चा में क्यों?

  • फ्रांस ने नेशंस लीग के फाइनल में पिछड़ने के बाद स्पेन को 2-1 से हराया। इसके साथ ही फ्रांस लीग का दूसरा विजेता बन गया।

2019 में पुर्तगाल पहला चैंपियन था।

  • स्पेन के कप्तान सर्जियो बस्केट्स को प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया।
  • बेल्जियम के लुकाकू, नॉर्वे के हालैंड और स्पेन के टोरेस ने सबसे ज्यादा 6-6 गोल किए।

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पुरस्कार/सम्मान

22वां लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय पुरस्कार

चर्चा में क्यों?

  • उप-राष्ट्रपति वैंकैया नायडू ने प्रख्यात पल्मोनोलॉजिस्ट और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया को उत्कृष्टता के लिए 22वां लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया।
  • लाल बहादुर शास्त्री प्रबंधन संस्थान द्वारा प्रदान किए जाने वाले इस पुरस्कार में पांच लाख रुपये की राशि, स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है।

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आर्थिक एवं वाणिज्यिक परिदृश्य

त्रिशुल और गरुड़ रेलगाड़ियां

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय रेलवे ने दक्षिण मध्य रेलवे (एससीआर) पर पहली बार दो लंबी दूरी की मालगाड़ियों “त्रिशूल” और “गरुड़” का सफलतापूर्वक संचालन किया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • आम मालगाड़ियों के मुकाबले इनमें तीन गुना अधिक वैगन हैं। इस प्रकार की मालगाड़ियों से ज्यादा से ज्यादा माल ढुलाई की जा सकती है।
  • मालगाड़ियों की सामान्य संरचना से दोगुनी या कई गुना बड़ी, लंबी दूरी की यह रेल महत्वपूर्ण खंडों में क्षमता की कमी की समस्या का एक बहुत प्रभावी समाधान हैं।
  • त्रिशूल दक्षिण मध्य रेलवे की पहली लंबी दूरी की रेल है जिसमें तीन मालगाड़ियां, यानी 177 वैगन शामिल हैं।
  • एससीआर भारतीय रेल पर पांच प्रमुख माल ढुलाई वाले रेलवे में से एक है। विशाखापत्तनम-विजयवाड़ा-गुडूर-रेनिगुंटा,बल्लारशाह-काजीपेट-विजयवाड़ा, काजीपेट-सिकंदराबाद-वाडी, विजयवाड़ा-गुंटूर-गुंतकल खंडों जैसे कुछ मुख्य मार्गों पर एससीआर थोक माल के यातायात का संचालन करता है।
  • चूंकि इसके अधिकांश माल यातायात को इन प्रमुख मार्गों से होकर गुजरना पड़ता है, इसलिए एससीआर के लिए इन महत्वपूर्ण सेक्शनों में उपलब्ध प्रवाह क्षमता को अधिकतम करना आवश्यक है।

रेलवे को होंगे ये लाभ

  • लंबी दूरी की इन रेलों के माध्यम से परिचालन में भीड़भाड़ वाले मार्गों पर पथ की बचत, शीघ्र आवागमन समय, महत्वपूर्ण सेक्शन में प्रवाह क्षमता को अधिकतम करना, चालक दल में बचत करना जैसे लाभ शामिल हैं। इन उपायों के माध्यम से भारतीय रेल अपने मालवाहक ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करने में मदद करती है।

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रक्षा-प्रतिरक्षा

मालाबार का दूसरा चरण

चर्चा में क्यों?

  • क्वाड देशों (भारत-ऑस्ट्रेलिया-जापान- अमेरिका) के बीच मालाबार नौसैन्य अभ्यास का दूसरा चरण 12 अक्टूबर से बंगाल की खाड़ी में शुरू हो गया।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • चार दिन तक चलने वाले इस नौसैन्य युद्धाभ्यास में भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के युद्धपोत, लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर भाग लेंगे। इस अभ्यास का पहला चरण अगस्त के अंत में पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में गुआम में हुआ था।
  • इसमें अमेरिका भी एक लाख टन से अधिक वजनी निमित्ज़ श्रेणी का सुपर एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात करेगा।
  • यूएसएस कार्ल विंसन इस बार अपने 90 लड़ाकू विमानों के साथ आएगा।

प्रशांत क्षेत्र में बाहरी दबदबे कम करना है उद्देश्य

  • इंडो-पैसिफिक में आक्रामक और विस्तारवादी चीन के लिए रणनीतिक चुनौती बने मालाबार नौसैन्य अभ्यास के दो चरणों के बीच कई सैन्य और गैर-सैन्य समझौते भी हुए हैं।
  • सबसे पहले अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के बीच नए त्रिपक्षीय औकस (AUKAS) सैन्य समझौते की घोषणा 15 सितंबर को की गई थी, जिसके तहत ऑस्ट्रेलिया धीरे-धीरे पारंपरिक हथियारों और अन्य लड़ाकू क्षमताओं के साथ कम से कम आठ परमाणु-संचालित पनडुब्बियों का अधिग्रहण करेगा ताकि भारत-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते नौसैनिक दबदबे का मुकाबला किया जा सके।
  • मालाबार के दो चरणों के बीच भारत ने सितंबर में ऑस्ट्रेलिया के साथ ‘ऑसइंडेक्स’ और इस महीने की शुरुआत में जापान के साथ ‘जिमेक्स’ द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास किया, ताकि इंटरऑपरेबिलिटी को और बढ़ावा दिया जा सके।
  • 30 सितम्बर को भारतीय नौसेना और रॉयल ऑस्ट्रेलियाई नौसेना ने भारत-प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए आपसी सहयोग को और बढ़ाने के उद्देश्य से बातचीत के लिए अपनी तरह के पहले समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
  • मालाबार का दूसरा चरण इस साल अपने 25वें संस्करण में है, जिसमें सतह-विरोधी, हवा-विरोधी और पनडुब्बी-रोधी अभ्यास शामिल हैं।

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