Daily Current Affairs 9 October 2020

पुरस्कार/सम्मान
शांति का नोबेल पुरस्कार- 2020
चर्चा में क्यों?
वर्ष 2020 के लिए नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा कर दी गई है। इस वर्ष यह पुरस्कार विश्व में भूख के खिलाफ जंग लड़ने वाली संयुक्त राष्ट्र संघ की एजेंसी वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (WFP) को दिया गया है।
महत्वपूर्ण बिंदु
नोबेल शांति पुरस्कार की दौड़ में युवा जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग समेत 300 से भी ज्यादा नाम शामिल थे, लेकिन नोबेल समिति ने दुनिया में भुखमरी मिटाने की मुहिम में जुटी WFP को इस सम्मान से नवाजा।
नोबेल पुरस्कार समिति ने अवॉर्ड का ऐलान करते हुए कहा कि वर्ल्ड फूड प्रोग्राम जिस तरह से भूख के खिलाफ एक बड़ी जंग लड़ रहा है, उससे वह इसका हकदार है।
समिति ने संघर्ष से प्रभावित क्षेत्रों में शांति और युद्ध के हथियार के रूप में भूख के उपयोग को रोकने के लिए किए गए प्रयासों पर WFP की सराहना की।
विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP)
विश्व खाद्य कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र की खाद्य सहायता शाखा है, यह भुखमरी को समाप्त करने के लिए तथा खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विश्व का सबसे बड़ा मानवीय संगठन है। यह संगठन उन लोगों के लिए कार्य करता है जो स्वयं खाद्यान्न का उत्पादन नहीं कर सकते और भोजन प्राप्त करने में असमर्थ हैं।
यह संगठन संयुक्त राष्ट्र विकास समूह का सदस्य है तथा इसकी कार्यकारी समिति का अध्यक्ष है।
इसकी स्थापना 1961 में की गयी थी।
इसका मुख्यालय इटली के रोम में स्थित है। इसके कार्यालय विश्व के 80 देशों में है।
यह संगठन विश्व भर में 75 देशों में प्रतिवर्ष 80 मिलियन लोगों को खाद्य सहायता उपलब्ध करवाता है।
भारत में इसकी उपस्थिति 1963 से है।
WFP खाद्य के अंतिम लक्ष्य के साथ भूख और कुपोषण को खत्म करने का प्रयास करता है।
यह संयुक्त राष्ट्र विकास समूह का सदस्य है और इसकी कार्यकारी समिति का हिस्सा है।

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रसायन का नोबेल पुरस्कार -2020
महत्वपूर्ण बिंदु
रसायन विज्ञान में इस वर्ष 2020 का नोबेल पुरस्कार फ्रांस की विज्ञानी इम्मैन्युअल शार्पेंची (Emmanuelle Charpentier) और अमेरिकी विज्ञानी जेनफिर डाउडना (Jennifer A. Doudna) को जीनोम एडिटिंग का तरीका खोजने के लिए दिया गया है।
दोनों महिला विज्ञानियों ने अहम टूल ‘क्रिस्पर-सीएएस9’ (CRISPR/Cas9) को विकसित किया है। इसे जेनेटिक सीजर्स नाम दिया गया है।
इसका इस्तेमाल जंतुओं, पौधों और सूक्ष्म जीवों के डीएनए को अत्यधिक सूक्ष्मता से बदलने में किया जा सकता है।
यह पहला मौका है जब रसायन विज्ञान के क्षेत्र में दो महिलाओं को एक साथ इस पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की गई है।
इससे पहले अब तक पांच महिलाओं को केमिस्ट्री के लिए नोबेल पुरस्कार मिल चुका है।
मैरी क्यूरी एकमात्र ऐसी महिला हैं जिन्हें फिजिक्स और केमिस्ट्री दोनों के लिए नोबेल पुरस्कार मिला है।
क्या है ‘जीनोम एडिटिंग’?
‘जीनोम एडिटिंग’ एक ऐसी पद्धति है, जिसके जरिये वैज्ञानिक जीव-जंतु के डीएनए में बदलाव करते हैं।
यह प्रौद्योगिकी एक कैंची की तरह काम करती है, जो डीएनए को किसी खास स्थान से काटती है. इसके बाद वैज्ञानिक उस स्थान से डीएनए के काटे गये हिस्से को बदलते हैं। इससे रोगों के उपचार में मदद मिलती है।
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साहित्य का नोबेल पुरस्कार-2020
महत्वपूर्ण बिंदु
वर्ष 2020 का साहित्य का नोबेल पुरस्कार अमेरिकी कवयित्री लुईस ग्लूक (Louise Glück) को दिया गया है।
स्वीडिस एकेडमी ने पुरस्कार की घोषणा करते हुए कहा कि लुईस को उनकी बेमिसाल काव्यात्मक आवाज के लिए यह सम्मान दिया गया है, जो खूबसूरती के साथ व्यक्तिगत अस्तित्व को सार्वभौमिक बनाता है।
लुईस ग्लूक येल यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी की प्रोफेसर हैं। उनका जन्म 1943 में न्यूयॉर्क में हुआ था।
उनकी कविताएं प्राय: बाल्यावस्था, पारिवारिक जीवन, माता-पिता और भाई-बहनों के साथ घनिष्ठ संबंधों पर केंद्रित रही हैं।
2006 में आया उनका संग्रह एवर्नो एक शानदार संग्रह है।
वर्ष 1968 में लुईस ग्लूक का पहला कविता संग्रह ‘फर्स्टबॉर्न’ (Firstborn) प्रकाशित हुआ था।
उनका दूसरा साहित्य संग्रह ‘द हाउस ऑन मार्शलैंड’ (The House on Marshland) वर्ष 1975 में प्रकाशित हुआ।
उनके 12 कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं जिसमें डिसेंडिंग फिगर (Descending Figure), द ट्रायम्फ ऑफ अकिलीस (The Triumph of Achilles), द वाइल्ड आइरिस (The Wild Iris) और द फेथफुल एंड वर्चुअस नाइट (The Faithful and Virtuous Night) शामिल हैं।
नोबेल पुरस्कार के तहत स्वर्ण पदक और एक करोड़ स्वीडिश क्रोनर (लगभग 8.20 करोड़ रुपये) की राशि दी जाती है।
स्वीडिश क्रोनर स्वीडन की मुद्रा है।
2019 में पीटर हैंडका को दिया गया था यह पुरस्कार
साल 2019 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार आस्ट्रियाई मूल के लेखक पीटर हैंडका को दिया गया था। उन्हें यह पुरस्कार इनोवेटिव लेखन और भाषा में नवीनतम प्रयोगों के लिए दिया गया था। वहीं 2018 का साहित्य का नोबेल 57 साल की पोलिश लेखक टोकार्चुक को जीवन की परिधियों से परे एक कथात्मक परिकल्पना करने के लिए दिया गया था।
2 बार स्थगित हो चुका है साहित्य का नोबेल पुरस्कार
वर्ष 1901 से शुरू हुए नोबेल पुरस्कार के 119 साल के इतिहास में दो बार साहित्य का नोबेल पुरस्कार स्थगित किया जा चुका है। 1943 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इसे पहली बार स्थगित किया गया था।
दूसरी बार इसे 2018 में इस स्वीडिश एकेडमी की ज्यूरी मेंबर कटरीना के पति और फ्रांसीसी फोटोग्राफर जेन क्लोड अरनॉल्टपर यौन शोषण के आरोप लगने के कारण स्थगित किया गया था।

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निधन
रामविलास पासवान
महत्वपूर्ण बिंदु
केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री रामविलास पासवान का 74 वर्ष की उम्र में 8 अक्टूबर 2020 को नई दिल्ली में निधन हो गया। लंबे समय से उनका स्वास्थ्य ख़राब था ।
उनका जन्म 5 जुलाई 1946 को बिहार के खगड़िया में हुआ था।
उन्होंने 1969 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीता था। इसके बाद 1977 में सांसद बने। तब से वह नौ बार लोकसभा और एक बार राज्य सभा सांसद चुने जा चुके हैं।
उन्होंने 1969 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीता था। इसके बाद 1977 में सांसद बने। तब से वह बिहार की हाजीपुर लोकसभा सीट से नौ बार लोकसभा और एक बार राज्य सभा सांसद चुने जा चुके हैं।
1989 के बाद से पीवी नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह की दूसरी यूपीए सरकार को छोड़ वो हर प्रधानमंत्री की सरकार में मंत्री रहे।
वह विश्वनाथ प्रताप सिंह , एचडी देवगौड़ा, आईके गुजराल, अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी को मिलाकर छ: प्रधानमंत्रियों की कैबिनेट में शामिल रहे।
रामविलास पासवान वर्ष 2000 में जनता दल (यूनाइटेड) से टूटकर लोक जनशक्ति पार्टी (LJP)नामक पार्टी बनाई।
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पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
‘स्टॉकहोम समझौते’ के समर्थन में सात रसायन प्रतिबंधित
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में स्वास्थ्य एवं पर्यावरण के लिये हानिकारक सात रसायनों को प्रतिबंधित करते हुए ‘स्टॉकहोम समझौते’ के समर्थन को हाल ही में मंजूरी दे दी है।
महत्वपूर्ण बिंदु
इन सात प्रतिबंधित रसायनों को स्टॉकहोम समझौते के तहत स्थायी कार्बनिक प्रदूषक (POPs) के तौर पर सूचीबद्ध किया गया है।
मंत्रिमंडल ने घरेलू नियमों के तहत विनियमित की गई प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से पीओपी के संबंध में अपनी शक्तियां विदेश मंत्रालय और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को सौंपी है।
उल्लेखनीय है कि स्टॉकहोम समझौता एक वैश्विक संधि है, जो मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण को पीओपी से बचाने के लिये है।
पीओपी की पहचान उन रसायनिक तत्वों के रूप में की गई है जो पर्यावरण में मौजूद हैं, जीवों में जैविक रूप से संचित होते जाते हैं, मानव स्वास्थ्य/ पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं तथा पर्यावरण में लंबे समय तक टिके रहने की इनमें विशेषता होती है।
पीओपी के कारण कैंसर हो सकता है, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र, रोग प्रतिरक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंच सकता हैं और प्रजनन के विकार हो सकते हैं तथा बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास पर भी इसका असर पड़ सकता है।
भारत ने अनुच्छेद 25(4) के मुताबिक 13 जनवरी 2006 को स्टॉकहोम समझौते की अभिपुष्टि की थी। सुरक्षित वातावरण प्रदान करने और मानव स्वास्थ्य खतरों को दूर करने की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पर्यावरण (संरक्षण) कानून, 1986 के प्रावधानों के तहत पांच मार्च 2018 को ‘दीर्घकालिक जैविक प्रदूषकों के विनियमन’ को अधिसूचित किया था।
इन रसायनों के उत्पादन, व्यापार, उपयोग, आयात और निर्यात को प्रतिबंधित कर दिया गया है, जो स्टॉकहोम समझौते के अंतर्गत पीओपी के रूप में पहले से ही सूचीबद्ध हैं-
क्‍लोरडीकोन (Chlordecone)
हेक्‍साब्रोमोडीफिनाइल (Hexabromobiphenyl)
हेक्‍साब्रोमोडीफिनाइल इथर और हेप्टाब्रोमोडीफिनाइल (कमर्शियल पेंटा-बीडीई) [Hexabromodiphenyl ether and Hepta Bromodiphenyl Ether (Commercial octa-BDE)]
टेट्राब्रोमोडीफिनाइल इथर और पेंटाब्रोमोडीफिनाइल [Tetrabromodiphenyl ether and Pentabromodiphenyl ether (Commercial penta-BDE)]
पेंटाक्‍लोरोबेंजीन (Pentachlorobenzene)
हेक्‍साब्रोमोसाइक्‍लोडोडीकेन (Hexabromocyclododecane)
हेक्‍साक्‍लोरोबूटाडीन (Hexachlorobutadiene)
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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
डीएनए बारकोडिंग के प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए समझौता
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय कैबिनेट ने ‘भारतीय प्राणि सर्वेक्षण’ (ZSI) और कनाडा के गैर लाभकारी संगठन ‘इंटरनेशनल बारकोड ऑफ लाइफ’ (IBOL) के बीच MOU को मंजूरी दे दी है।
महत्वपूर्ण बिंदु
जेडएसआई और आईबीओएल ने डीएनए बारकोडिंग के प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए यह समझौता किया है।
डीएनए बारकोडिंग प्रजातियों की त्वरित एवं सटीक पहचान का तरीका है जिसमें मानक जीन क्षेत्रों के लघु हिस्से का अनुक्रमण अर्थात सीक्वेन्सिंग की जाती है।
एमओयू से जेडएसआई वैश्विक स्तर के कार्यक्रमों जैसे बायोस्कैन और ग्रह जैव विविधता मिशन में हिस्सा ले सकेगा।
उल्लेखनीय है कि आईबीओएल डीएनए बारकोड उद्धरण पुस्तकालयों, अनुक्रमण सुविधाओं, सूचनात्मक प्लेटफार्मों, विश्लेषणात्मक प्रोटोकॉल और जैव-विविधता की सूची एवं मूल्यांकन के लिये आवश्यक अंतर्राष्ट्रीय सहयोग स्थापित करके जैव विविधता विज्ञान को परिवर्तित करने की इच्छा के साथ विश्व के देशों का एक अनुसंधान गठबंधन है।
इसकी स्थापना वर्ष 2008 में हुई थी।
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नियुक्ति
दिनेश कुमार खारा
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने दिनेश कुमार खारा को भारतीय स्टेट बैंक का चेयरमैन नियुक्त किया है।
उन्हें रजनीश कुमार के स्थान पर नियुक्त किया गया है।
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार दिनेश कुमार खारा का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा।
भारतीय स्टेट बैंक के वरिष्ठतम प्रबंध निदेशक दिनेश कुमार खारा के नाम की सिफारिश बैंक बोर्ड ब्यूरो ने की थी।
परंपरा के अनुसार SBI के चेयरमैन की नियुक्ति बैंक में सेवारत प्रबंध निदेशकों के समूह से की जाती है।
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एम. ए. गणपति नागर
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय मंत्रिमंडल की नियुक्‍ति समिति ने नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) के महानिदेशक पद पर एम ए गणपति की नियुक्‍त‍ि को मंजूरी दी है। वे इस पद पर 29 फरवरी 2024 तक अपनी सेवानि‍वृत्ति या अगले आदेश तक रहेंगे।
गणपति वर्ष 1986 बैच के उत्‍तराखंड संवर्ग के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी हैं।
नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो की स्थापना पांडे समिति की सिफारिशों पर जनवरी 1978 में नागर विमानन महानिदेशालय में एक प्रकोष्ठ के रूप में हुई थी।
01 अप्रैल, 1997 को नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो की पुन:स्थापना नागर विमानन मंत्रालय में एक स्वतंत्र विभाग के रूप में हुई।
नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो के मुख्य उत्तरदायित्व में भारत में अंतर्राष्ट्रीय तथा घरेलू हवाई अड्डों पर नागरिक उडानों के संबंध में मानकों तथा उपायों का निर्धारित करना शामिल है।
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आर्थिक एवं वाणिज्यिक परिदृश्य
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने की ओपन मार्केट ऑपरेशंस की घोषणा
चर्चा में क्यों?
कोरोनावायरस महामारी के कारण मंदी से जूझ रही अर्थव्यवस्था में सुविधाजनक स्तर पर नकदी बनाए रखने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 9 अक्टूबर 2020 को ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO) के तहत 20,000 करोड़ रुपए की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद बिक्री करने की घोषणा की।
महत्वपूर्ण बिंदु
क्या है ओएमओ?
ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) के तहत भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) सरकारी प्रतिभूतियों और ट्रेजरी बिल की खरीद और बिक्री करता है।
आरबीआई देश की अर्थव्यवस्था में नकदी की आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए ओपन मार्केट ऑपरेशन करता है।
आरबीआई जब अर्थव्यवस्था में नकदी की आपूर्ति बढ़ाना चाहता है तो वह बाजार में सरकारी प्रतिभूतियों को खरीदता है।
जब उसे अर्थव्यवस्था में नकदी की आपूर्ति घटाने की जरूरत महसूस होती है तो वह बाजार में सरकारी सिक्योरिटी बेचता है।
इससे सिस्टम में तरलता (नकदी) घट जाती है।
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