Daily Current Affairs 7-8 September 2020

रक्षा-प्रतिरक्षा

हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी प्रदर्शन वाहन (HSDTV)

चर्चा में क्यों?

  • रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने 7 सितंबर 2020 को हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी प्रदर्शन वाहन (Hypersonic Technology Demonstrator Vehicle, HSDTV) का ओडिशा के व्हीलर द्वीप स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्रक्षेपण स्थल से सफल प्रक्षेपण किया। इसके माध्यम से हाइपरसोनिक स्क्रैमजेट प्रौद्योगिकी का सफल प्रदर्शन किया गया।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • HSDTV को विकसित करने के बाद अब भारत के पास बिना विदेशी मदद के हाइपरसोनिक मिसाइल विकसित करने की क्षमता हो गई है।
  • डीआरडीओ अगले पांच साल में स्‍क्रैमजेट इंजन के साथ हाइपरसोनिक मिसाइल (Hypersonic Missile) तैयार कर सकता है।
  • स्‍क्रैमजेट इंजन ध्वनि की गति से 6 गुना अधिक (माक-6) होने के साथ ही यह आसमान में 20 सेकेंड में लगभग 32.5 किलोमीटर की ऊँचाई तक पहुँच जाता है।
  • इससे अंतरिक्ष में सैटलाइट्स भी कम लागत पर लॉन्‍च किए जा सकते हैं।
  • HSTDV के सफल परीक्षण से भारत को अगली पीढ़ी की हाइपरसोनिक मिसाइल ब्रह्मोस-II तैयार करने में मदद मिलेगी।
  • जहां साधारण मिसाइलें बैलस्टिक तय रास्ते का अनुसरण करती हैं जिस कारण उनके रास्‍ते को आसानी से ट्रैक किया जा सकता है।
  • इससे शत्रु को तैयारी और काउंटर अटैक का मौका मिलता है जबकि हाइपरसोनिक मिसाइल सिस्‍टम कोई तय रास्‍ते पर नहीं चलता। इस कारण शत्रु को इसके रास्ते का अंदाजा नहीं लग सकता।

क्या है हाइपरसोनिक मिसाइल?

  • सुपरसोनिक मिसाइल की गति ध्वनि की गति से तेज़ (माक-1) होती है जबकि हाइपरसोनिक गति सुपरसोनिक से भी कम से कम पांच गुना अधिक की होती है। यानी माक-5 गति।
  • हाइपरसोनिक गति से जा रही वस्तु के आसपास की हवा में मौजूद अणु के मॉलिक्यूल भी टूट कर बिखरने लगते हैं।
  • हाइपरसोनिक मिसाइल की गति ध्वनि की गति से 5 गुना तेज होती है।
  • फिलहाल अमेरिका, चीन और रूस के पास ही ऐसी मिसाइलें हैं।

स्क्रैमजेट तकनीक क्या है?

  • न्यूटन की गति के सिद्धांत का तीसरा सिद्धांत कहता है कि ‘प्रत्येक क्रिया के बदले हमेशा और विपरीत प्रतिक्रिया होती है।’ इसका मतलब ये कि रॉकेट के भीतर जब ईंधन जलाया जाता है और उसकी गैस बाहर निकलती तो इसकी प्रतिक्रिया स्वरूप रॉकेट (व्हीकल) को एक तेज धक्का लगता है जो उसकी स्पीड को बढ़ा देता है इसी को जेट प्रोपल्शन कहते हैं।
  • शुरूआती दौर में जो जेट बने उनमें ऑक्सीजन और हाइड्रोजन मिला कर बने ईंधन को जलाया जाता है और इसके लिए रॉकेट के भीतर ईंधन रखना होता है।
  • स्क्रैमजेट (Scramjet) रॉकेट वायुमंडल से ऑक्सीजन लेता है और अपनी स्पीड बढ़ाता है। इसका लाभ ये होता है कि रॉकेट में दोगुना ईंधन भरने की ज़रूरत नहीं रह जाती।
  • ये तकनीक सबसे पहले सोवियत संघ ने 1991 में इस्तेमाल कर माक की स्पीड हासिल करने का दावा किया।
  • सोवियत संघ के परीक्षण के कई सालों बाद अमरीका ने इस तकनीक का सफल परीक्षण किया जिसके बाद चीन ने इसका सफल परीक्षण किया है।
  • ऐसे में भारत स्क्रैमजेट तकनीक का इस्तेमाल करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया है।

 

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निधन

केशवानंद भारती

चर्चा में क्यों?

  • संविधान के ‘मूल संरचना सिद्धांत’ को निर्धारित करने वाले ऐतिहासिक फ़ैसले के प्रमुख याचिकाकर्ता रहे केशवानंद भारती का 6 सितंबर 2020 निधन हो गया। वे 79 वर्ष के थे।
  • केशवानंद भारती केरल के उत्तरी ज़िले कासरगोड में स्थित इडनीर मठ के प्रमुख थे।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • 47 वर्ष पहले सुप्रीम कोर्ट ने ‘केशवानंद भारती बनाम स्टेट ऑफ केरल’ मामले में एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया था जिसके अनुसार, संविधान की प्रस्तावना के मूल ढांचे को बदला नहीं जा सकता।
  • दरअसल भारती ने केरल भूमि सुधार कानून को चुनौती दी थी जिसपर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के मूल ढांचे का सिद्धांत दिया था हालांकि मूल रूप से भूमि सुधार कानून का केस केशवानंद भारती हार गए थे।

68 दिन तक चली थी सुनवाई

  • केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य मामले पर 68 दिन तक सुनवाई हुई थी और अब तक सुप्रीम कोर्ट में सबसे अधिक समय तक किसी मुकदमे पर चली सुनवाई के मामले में यह शीर्ष पर है।
  • इस मामले की सुनवाई 31 अक्टूबर 1972 को शुरू हुई और 24 मार्च 1973 को फैसला आया।
  • मुख्य न्यायाधीश एस एम सिकरी की अध्यक्षता वाली 13 जजों की बेंच ने यह ऐतिहासिक फ़ैसला सुनाया था।

आधारभूत ढांचे का सिद्धांत

  • 13 जजों की बेंच में से सात जजों ने बहुमत से फ़ैसला दिया कि अनुच्छेद 368 के अंतर्गत ‘संसद की शक्ति संविधान संशोधन करने की तो है लेकिन संविधान की प्रस्तावना के मूल ढांचे को नहीं बदला जा सकता और कोई भी संशोधन प्रस्तावना की भावना के ख़िलाफ़ नहीं हो सकता।’
  • यह मामला इसलिए भी ऐतिहासिक रहा क्योंकि इसने संविधान को सर्वोपरि माना।
  • हालांकि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अभी तक “मूल संरचना” को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है।
  • फिर विभिन्न फैसलों के आधार पर मूल संरचना के तत्वों कि पहचान की जा सकती है। जैसे-

संविधान की सर्वोच्चता

संविधान का धर्मनिरपेक्ष चरित्र

न्यायिक समीक्षा

शक्तियों का विभाजन

संसदीय प्रणाली

कानून का शासन

मौलिक अधिकारों और नीतिनिदेशक सिद्धांतों के बीच का संतुलन

स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव

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रिपोर्ट/ इंडेक्स

स्टेट ऑफ़ यंग चाइल्ड रिपोर्ट

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में मोबाइल क्रेच एनजीओ द्वारा प्रकाशित की गई स्टेट ऑफ़ यंग चाइल्ड रिपोर्ट (State of Young Child Report) को उपराष्ट्रपति वैंकैया नायडू ने जारी किया।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • रिपोर्ट के अनुसार बाल कल्याण के दृष्टिकोण से केरल भारत का शीर्ष राज्य है।
  • यह रिपोर्ट मोबाइल क्रेच नामक एनजीओ द्वारा प्रकाशित की जाती है। जो कि बाल कल्याण के क्षेत्र में पिछले 50 वर्षो से कार्यरत है।
  • इस रिपोर्ट में दो सूचकांकों की भी चर्चा की गई है।

यंग चाइल्ड आउटकम इंडेक्स :-

  • Young Child Outcome Index में बच्चों की स्वास्थ्य ,पोषण का मापन शिशु मृत्यु दर , स्टंटिंग , प्राथमिक शिक्षा हेतु उपस्थिति जैसे मानकों को आधार माना गया है।
  • यह इंडेक्स 2005-06 से 2015-16 की समयावधि के मध्य तैयार किया गया है।
  • इसका मापन 0 से 1 अंक के मध्य होता है।
  • इसमें भारत का औसत स्कोर 0.585 रहा है।
  • केरल 0.858 के स्कोर के साथ शीर्ष राज्य रहा है
  • केरल के बाद क्रमश: अगले स्थानों पर गोवा ,त्रिपुरा ,तमिलनाडु तथा मिजोरम रहे ।
  • राष्ट्रीय औसत से ख़राब प्रदर्शन करने वाले 8 राज्य – असम , मेघालय , राजस्थान , छत्तीसगढ़ , मध्यप्रदेश ,झारखण्ड ,उत्तरप्रदेश तथा बिहार रहे हैं।
  • बिहार का प्रदर्शन सबसे खराब रहा है।

यंग चाइल्ड एनवायरनमेंट इंडेक्स

  • Young Child Environment Index पर्यावरणीय उत्प्रेरकों को बाल कल्याण की दृष्टिकोण से समझने का प्रयास करता है।
  • इस इंडेक्स का मापन गरीबी , स्वास्थ्य कवरेज , शिक्षा स्तर में सुधार ,जलापूर्ति जैसे मानको के आधार पर निर्मित है।
  • इस इंडेक्स में बेहतर प्रदर्शन करने वाले 5 राज्य क्रमशः – केरल , गोवा ,सिक्किम ,पंजाब, तथा हिमांचल प्रदेश हैं।
  • इस इंडेक्स में ख़राब प्रदर्शन करने वाले 8 राज्य – असम , मेघालय , राजस्थान , छत्तीसगढ़ , मध्यप्रदेश ,झारखण्ड ,उत्तरप्रदेश तथा बिहार रहे हैं।
  • बिहार का प्रदर्शन सबसे खराब रहा है।

रिपोर्ट से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

  • भारत में बच्चों की शिक्षा , पोषण ,स्वास्थ्य पर 2018 -19 में प्रति बच्चा 1723 रूपया खर्च किया जाता है परन्तु यह अपर्याप्त है।
  • भारत में 6 वर्ष से कम 158.8 मिलियन बच्चे हैं परन्तु आइसीडीएस मात्र 71.9 मिलियन बच्चों को कवर करता है।

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अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य

क्रा कैनाल परियोजना रद्द

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में थाईलैंड सरकार ने ‘क्रा कैनाल प्रोजेक्ट’ (Kra Canal project) रद्द कर दिया है।

महत्वपूर्ण बिन्दु

  • थाईलैंड ने चीन के साथ क्रा कैनाल ( Kra Canal ) प्रॉजेक्ट को कैंसल कर दिया है जिससे उसे मलक्का स्ट्रेट से रास्ता मिलने में कठिनाई आ सकती है।
  • ‘क्रा कैनाल प्रोजेक्ट’ के तहत दक्षिणी थाईलैंड में स्थित ‘क्रा स्थलडमरूमध्य’(Kra Isthmus) को गहरा करके परिवहन हेतु सुगम बनाया जाना था।
  • इस के तहत यहां 102 किलोमीटर लंबी व 400 मीटर चौड़ी नहर बनाई जानी थी।
  • वर्ष 2015 में इसके लिए थाईलैंड व चीन सरकार ने समझौता किया था।
  • उल्लेखनीय है कि ‘क्रा स्थलडमरूमध्य’ अंडमान सागर के साथ थाईलैंड की खाड़ी को जोड़ती है।

क्यों रद्द किया गया प्रोजेक्ट?

  • शुरुआत में ‘क्रा कैनाल प्रोजेक्ट’ को थाईलैंड सरकार का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट बताया गया था, लेकिन अब थाईलैंड को लगता है कि इस परियोजना से उसे कोई लाभ नहीं है।
  • थाईलैंड की योजना इसे पनामा नहर की तरह यहां एक नहर बनाने की थी, जो दक्षिण चीन सागर को सीधे हिंद महासागर से जोड़ती है। थाईलैंड को लगता है कि मलक्का, सुंडा या लोम्बोक स्ट्रेट के जरिये क्रा कैनाल ज्यादा राजस्व नहीं कमा सकेगी।
  • वहीं चीन किसी भी कीमत पर इस परियोजना को पूरा करना चाहता था, क्योंकि इससे हिंद महासागर तक उसकी पहुंच आसान हो जाती।
  • 102 किलोमीटर लंबी ‘क्रा कैनाल या नहर’ के अस्तित्व में आने के बाद चीन दक्षिण चीन सागर और हिंद महासागर में अपने ठिकानों तक आसानी से पहुंच सकता। अभी उसे इसके लिए 1,100 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है।
  • क्रा प्रोजेक्ट से चीन का इरादा स्ट्रेट ऑफ मलक्का को बायपास करते हुए दक्षिण चीन सागर पर एकाधिकार जमाने का रहा है, ताकि हिंद प्रशांत क्षेत्र में उसे कोई चुनौती नहीं दे पाए।
  • लेकिन थाई सरकार ने इस परियोजना से हाथ पीछे खींचने का मन बनाकर उसके मंसूबों पर पानी फेर दिया है।

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स्वास्थ्य एवं पोषण

किरण हेल्पलाइन

चर्चा में क्यों?

  • भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की निशुल्क मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास हेल्पलाइन नंबर (1800-500-0019) “किरण” का 07 सितंबर, 2020 को वर्चुअल माध्यम से शुभारंभ किया गया।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • ‘किरण’ नामक यह हेल्‍पलाइन मानसिक रूप से बीमार व्‍यक्तियों को राहत और मदद उपलब्‍ध कराएगी। इस हेल्‍पलाइन को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के दिव्‍यांगताग्रस्‍त व्‍यक्तियों के सशक्तिकरण विभाग ने विशेषरूप से कोविड-19 महामारी के कारण बढ़ती हुई मानसिक बीमारी की घटनाओं को ध्‍यान में रखते हुए शुरू किया है।
  • यह हेल्पलाइन नंबर प्रारंभिक स्क्रीनिंग, प्राथमिक चिकित्सा, मनोवैज्ञानिक सहायता, संकट प्रबंधन, मानसिक कल्याण और सकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा देने आदि के उद्देश्य से मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास सेवाओं की पेशकश करता है।
  • ‘किरण’ हेल्पलाइन 13 भाषाओं में किसी भी एक व्यक्ति, परिवार, एनजीओ, डीपीओ, अभिभावक संघ, प्रोफेशनल एसोसिएशन, पुनर्वास केंद्र, अस्पतालों के साथ ही साथ लद्दाख, जम्मू व कश्मीर, आठ उत्तर-पूर्वी राज्य, अंडमान और निकोबार द्वीपपुंज और लक्ष्यदीप सहित पूरे देश में जरूरत में पड़े किसी के लिए भी उपलब्ध होगा।
  • प्रति घंटे 300 लोगों को संभालने की क्षमता के साथ 660 वॉलेंटियर्स नैदानिक और पुनर्वास मनोवैज्ञानिक, 668 वॉलेंटियर मनोचिकित्सकों के साथ-साथ 75 विशेषज्ञ हेल्पलाइन के 25 केंद्रों में शामिल किए जाएंगे।

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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

स्टारलिंक परियोजना

चर्चा में क्यों?

  • अमेरिका की निजी अंतरिक्ष कंपनी स्पेसएक्स ने 3 सितंबर 2020 को अपने स्टारलिंक प्रोजक्ट (Starlink Project) के 12वें बैच की सफल लॉन्चिंग की।
  • इस प्रोजक्ट के तहत 60 सैटेलाइट के 12वें बैच को लोअर अर्थ ऑर्बिट में स्थापित किया गया।

अंतरिक्ष में सैटेलाइट नेटवर्क स्थापित कर रहा है स्पेसएक्स

  • स्टारलिंक प्रोजक्ट के जरिए स्पेसएक्स अंतरिक्ष में एक सैटेलाइट नेटवर्क को स्थापित करने जा रहा है। इससे धरती के दूरदराज के हिस्सों में सस्ता इंटरनेट सर्विस प्रदान किया जाएगा।
  • अगस्त 2020 में ही पहले ही स्पेसएक्स ने इस प्रोजक्ट के 11वें बैच को अंतरिक्ष में स्थापित किया था। जिसके तहत 50 सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में पहुंचाया गया था।

2015 में शुरू हुआ यह प्रोजक्ट

  • स्पेसएक्स ने इस प्रोजक्ट को जनवरी 2015 में शुरू किया था। जिसके तहत अंतरिक्ष में 12000 सैटेलाइट्स को स्थापित कर एक मेगा चेन बनाने की योजना है।
  • हालांकि स्पेसएक्स ने कहा है कि वह भविष्य में इस आंकड़े को बढ़ाकर 42000 करने का लक्ष्य है। स्पेसएक्स ने इस मिशन के तहत सैटेलाइट्स का पहला बैच 23 मई 2019 को लॉन्च किया था।

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आर्थिक- वाणिज्यिक परिदृश्य

कामथ समिति की रिपोर्ट को आरबीआई ने अपनी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी

चर्चा में क्यों?

  • बड़े कॉरपोरेट लोन की रिस्ट्रक्चरिंग की रूपरेखा बनाने के लिए नियुक्त की गई केवी कामथ समिति ने कंस्ट्रक्शन, स्टील, रोड, रियल एस्टेट समेत 26 सेक्टर का चयन रिस्ट्रक्चरिंग योजना के लिए किया है। साथ ही समिति ने रिस्ट्रक्चरिंग की पात्रता तय करने के लिए कुछ मानक निर्धारित कर दिए हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रिपोर्ट को अपनी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • कोरोना संकट के चलते कंपनियों के सामने आई दिक्कतों को खत्म करने के लिए आरबीआई ने पहले 6 महीने का मोराटोरियम दिया था। मोराटोरियम की अवधि समाप्त होने के बाद आरबीआई ने लोन रिस्ट्रक्चरिंग की सुविधा देने की घोषणा की थी।
  • उसी समय बड़े कॉरपोरेट लोन की रिस्ट्रक्चरिंग की रूपरेखा बनाने के लिए जाने-माने बैंकर केवी कामथ की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था।
  • कमेटी ने चुने हुए 26 सेक्टर में कंपनी की लीवरेज, लिक्विडिटी, डेट सर्विसेबिलिटी जैसे मानकों का आकलन करने के लिए पांच किस्म के रेश्यो व उनके थ्रेशहोल्ड तय किए हैं।

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