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Daily Current Affairs 6 July 2021

नियुक्ति/निर्वाचन

आठ राज्यों के राज्यपाल बदले गए

चर्चा में क्यों?

  • राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 06 जुलाई 2021 को एक साथ 04 राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्ति की जबकि 04 राज्यों के राज्यपालों का ट्रांसफर किया गया।

महत्वपूर्ण बिंदु

  1. मंगूभाई छगनभाई पटेल: मध्य प्रदेश के राज्यपाल होंगे।
  2. थावर चंद गहलोत: केंद्रीय मंत्री थे, अब कर्नाटक के राज्यपाल होंगे।
  3. रमेश बैस: त्रिपुरा के गवर्नर थे, अब झारखंड के गवर्नर होंगे।
  4. बंडारू दत्तात्रेय: हिमाचल के गवर्नर थे, अब हरियाणा के राज्यपाल होंगे।
  5. सत्यदेव नारायण आर्य: हरियाणा के राज्यपाल थे, अब त्रिपुरा के गवर्नर होंगे।
  6. राजेंद्र विश्वनाथ आरलेकर: हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल होंगे।
  7. पीएएस श्रीधरन पिल्लई: मिजोरम के राज्यपाल थे, अब गोवा के गवर्नर होंगे।
  8. हरिबाबू कम्भमपति: मिजोरम के राज्यपाल होंगे।

 नए राज्यपाल

* थावर चंद गहलोत: दलित नेता थावरचंद मध्य प्रदेश के नागदा के निवासी हैं। 2014 में नरेंद्र मोदी जब पहली बार प्रधानमंत्री बने तो थावर चंद को सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्री बनाया। तब से अब तक वे इसी पद पर रहे।

*  मंगूभाई छगनभाई पटेल: मंगूभाई पटेल गुजरात विधानसभा के पूर्व सभापति हैं। इससे पहले वो गुजरात राज्य कैबिनेट में भी रहे हैं। वे नवसारी से विधायक रह चुके हैं।

* राजेंद्र विश्वनाथ आरलेकर: आरलेकर 1980 से गोवा में भारतीय जनता पार्टी (BJP)के नेता हैं।

* हरिबाबू कम्भमपति: छात्र नेता के तौर पर उन्होंने अलग आंध्र प्रदेश के लिए ‘जय आंध्र’ आंदोलन में हिस्सा लिया। जय प्रकाश नारायण के साथ भी आंदोलन में शामिल रहे और मीसा के तहत अरेस्ट भी हुए। वे विशाखापटट्‌टनम से सांसद रहे हैं।

भारत में राज्यपालों की नियुक्ति

  • जिस प्रकार केंद्र में राष्ट्र का प्रमुख राष्ट्रपति होता है उसी प्रकार राज्यों में राज्य का प्रमुख राज्यपाल होता है।
  • राज्यपाल राज्य का औपचारिक प्रमुख होता है और राज्य की सभी कार्यवाहियाँ उसी के नाम पर की जाती हैं।
  • राज्य का राज्यपाल केंद्रीय मंत्रिमंडल की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है।
  • राज्यपाल राज्य के मुख्यमंत्री की सलाह से कार्य करता है।
  • सामान्यतः राज्यपाल का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है, परंतु वह इस अवधि से पूर्व भी राष्ट्रपति को इस्तीफा देकर सेवानिवृत्त हो सकता है, हटाया जा सकता है या तबादला किया जा सकता है।

राज्यपाल से संबंधित संवैधानिक प्रावधान

  • भारतीय संविधान का भाग VI देश के संघीय ढाँचे के महत्त्वपूर्ण हिस्से यानी राज्यों से संबंधित है। संविधान के अनुच्छेद 152 से 237 तक राज्यों से संबंधित विभिन्न प्रावधानों का उल्लेख किया गया है।
  • अनुच्छेद 153 के मुताबिक, देश में प्रत्येक राज्य का एक राज्यपाल होगा। साथ ही एक व्यक्ति को दो या दो से अधिक राज्यों के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया जा सकता है।
  • अनुच्छेद 155 के अनुसार, राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
  • संविधान के अनुसार, राज्यपाल राज्य के संवैधानिक प्रमुख और प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है। वह भारतीय राजनीति की संघीय प्रणाली का हिस्सा है तथा संघ एवं राज्य सरकारों के बीच एक पुल का काम करता है।

राज्यपाल पद की पात्रता

  • संविधान के अनुच्छेद 157 और अनुच्छेद 158 में राज्यपाल के पद हेतु आवश्यक पात्रता निर्धारित की गईं है जो निम्नलिखित हैं:
  • वह भारतीय नागरिक हो।
  • उसकी उम्र कम-से-कम 35 वर्ष हो।
  • वह न तो संसद के किसी सदन का सदस्य हो और न ही राज्य विधायिका का।
  • वह किसी लाभ के पद पर न हो।

कुछ मामलों में कार्य करने की स्वायत्तता

  • संविधान का अनुच्छेद 163 राज्यपाल को विवेकाधिकार की शक्ति प्रदान करता है अर्थात् वह स्वविवेक संबंधी कार्यों में मंत्रिपरिषद की सलाह मानने हेतु बाध्य नहीं है।
  • राज्यपाल को निम्नलिखित विवेकाधीन शक्तियाँ प्राप्त होती हैं:
  • यदि किसी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिलता है, तो राज्यपाल मुख्यमंत्री के चयन में अपने विवेक का उपयोग कर सकता है।
  • किसी दल को बहुमत सिद्ध करने हेतु कितना समय दिया जाना चाहिये यह भी राज्यपाल के विवेक पर निर्भर करता है।
  • आपातकाल के दौरान वह मंत्रिपरिषद की सलाह मानने के लिये बाध्य नहीं होता। ऐसे समय में वह राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है और राज्य का वास्तविक शासक बन जाता है।

राज्यपाल की भूमिका

  • प्रत्येक राज्य का राज्यपाल वहाँ लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार के संचालन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ध्यातव्य है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 153 से 162 तक राज्यपाल की भूमिका का वर्णन किया गया है।
  • राज्य के राज्यपाल की भूमिका कमोबेश देश के राष्ट्रपति के सामान ही होती है। राज्यपाल सामान्यतः राज्यों के लिये राष्ट्रपति जैसी भूमिका का निर्वाह करता है।
  • राज्यपाल के कार्यों को मुख्यतः 4 भागों (1) कार्यकारी (2) विधायी (3) वित्तीय (4) न्यायिक में विभाजित किया गया है।

कार्यकारी

  • राज्य का संवैधानिक प्रमुख होने के नाते राज्यपाल को कई महत्त्वपूर्ण कार्य करने होते हैं, इसमें बहुमत प्राप्त दल के नेता को राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त करना तथा राज्य मंत्रिमंडल के गठन में मुख्यमंत्री की सहायता करना आदि शामिल हैं।
  • साथ ही राज्य के महाधिवक्ता तथा राज्य लोक आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति का कार्य भी राज्यपाल द्वारा ही किया जाता है।

विधायी

  • राज्यपाल के पास राज्य की विधानसभा की बैठक को किसी भी आपात स्थिति में बुलाने और किसी भी समय स्थगित करने का अधिकार होता है।
  • उसे दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुलाने का भी अधिकार है।
  • राज्य विधानसभा में पारित किये जाने वाले किसी भी विधेयक को रद्द करने, समीक्षा के लिये वापस भेजने और राष्ट्रपति के पास विचारार्थ भेजने का अधिकार है।
  • इसका अर्थ है कि राज्य विधानसभा में कोई भी विधेयक राज्यपाल की अनुमति के बिना पारित नहीं किया जा सकता।
  • राज्य में आपातकाल के दौरान किसी भी प्रकार का अध्यादेश जारी करने का कार्य भी राज्यपाल का होता है।

वित्तीय

  • राज्यपाल का कार्य यह सुनिश्चित करना भी होता है कि वार्षिक वित्तीय विवरण (राज्य-बजट) को राज्य विधानमंडल के सामने रखा जाए।
  • साथ ही किसी भी धन विधेयक को विधानसभा में उसकी अनुमति के बाद ही प्रस्तुत किया जा सकता है।
  • पंचायतों एवं नगरपालिका की वित्तीय स्थिति की हर पाँच वर्षों बाद समीक्षा करने के लिये राज्यपाल राज्य वित्त आयोग का भी गठन करता है।

न्यायिक

  • राज्यपाल के न्यायिक कार्यों में राज्य के उच्च न्यायालय के साथ विचार कर ज़िला न्यायाधीशों की नियुक्ति, स्थानांतरण और पदोन्नति संबंधी निर्णय लेना शामिल है। वह राज्य न्यायिक आयोग से जुड़े लोगों की नियुक्ति भी करता है।

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खेल परिदृश्य

मिताली राज: अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने वाली महिला क्रिकेटर

चर्चा में क्यों?

  • मिताली राज महिला क्रिकेट में सर्वाधिक अंतरराष्ट्रीय रन बनाने वाली बल्लेबाज बन गईं हैं।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • मिताली राज ने 3 जुलाई 2021 को इंग्लैंड के टांटन में आयोजित एकदिवसीय मैच में 89 गेंदों पर नाबाद 75 रन बनाकर यह उपलब्धि हासिल की।
  • इस मैच में भारत ने इंग्लैंड को चार विकेट से हराया। इस पारी के दौरान मिताली महिला क्रिकेट में सर्वाधिक अंतरराष्ट्रीय रन बनाने वाली बल्लेबाज भी बनीं। मिताली के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अब 10,337 रन हो गए हैं।
  • उन्होंने इंग्लैंड की पूर्व कप्तान चार्लोट एडव‌र्ड्स (10,273) को पीछे छोड़ा।
  • महिला क्रिकेट में केवल इन्हीं दो खिलाड़ियों ने 10,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय रन बनाए हैं।
  • साथ ही मिताली महिला क्रिकेट में सर्वाधिक वनडे मैच जीतने वाली कप्तान भी बन गई। उन्होंने बेलिंडा क्लार्क का रिकार्ड तोड़ा, जिनकी कप्तानी में आस्ट्रेलिया ने 83 वनडे जीते थे।
  • 1999 में 16 साल की उम्र में डेब्यू करने वाली मिताली का क्रिकेट का सफर रिकॉर्ड से भरा रहा है।
  • उन्होंने आयरलैंड के खिलाफ अपने डेब्यू मैच में ही सेंचुरी लगाई थी। इसके बाद 21 साल के क्रिकेटिंग करियर में उन्होंने कई रिकॉर्ड तोड़े और बनाए।
  • वे महिला क्रिकेट में ओवरऑल सबसे पहले 6000 रन बनाने वाली बल्लेबाज भी हैं।

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योजना/परियोजना

निपुण भारतपहल

चर्चा में क्यों?

  • केंद्रीय शिक्षामंत्री ने हाल ही में ‘पठन-पाठन में दक्षता और संख्‍यात्‍मक कौशल की समझ विकसित करने हेतु राष्‍ट्रीय पहल’- ‘निपुण भारत’ का वर्चुअल रूप से उद्घाटन किया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • इस पहल का प्राथमिक उद्देश्‍य बच्‍चों में पठन-पाठन,लेखन एवं संख्‍यात्‍मक कौशल की दक्षता विकसित करना है। ज्ञात हो कि यह पहल देश की नई शिक्षा नीति के अनुरूप है और प्राथमिक शिक्षा के दौरान बच्‍चों में सीखने एवं संख्‍यात्‍मक कौशल की समझ को विकसित करने में काफी मददगार साबित होगी।
  • इस पहल को केंद्र प्रायोजित योजना- ‘समग्र शिक्षा’ के तत्त्वावधान में लॉन्च किया गया है। इस पहल के माध्यम से मुख्य तौर पर क्षमता निर्माण के मूलभूत वर्षों में बच्चों को स्कूली शिक्षा तक पहुँच प्रदान करने, उन्हें शिक्षा में संलग्न रखने, उच्च गुणवत्ता विकसित करने और प्रत्येक बच्चे की प्रगति पर नज़र रखने आदि पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
  • ‘निपुण भारत’ पहल का मूल उद्देश्य 3 से 9 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों की सीखने की ज़रूरतों को पूरा करना है। इस पहल के माध्यम से शिक्षक बुनियादी भाषा, साक्षरता और संख्यात्मक कौशल विकसित करने के लिये प्रत्येक बच्चे पर ध्यान केंद्रित करेंगे तथा उन्हें बेहतर पाठकों व लेखकों के रूप में विकसित करने में मदद करेंगे।
  • इस प्रकार ‘निपुण भारत’ पहल के तहत आधारभूत स्तर पर सीखने के अनुभव को समग्र रूप से एकीकृत, समावेशी, आनंददायक और आकर्षक बनाने की परिकल्पना की गई है।

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आर्थिक एवं वाणिज्यिक परिदृश्य

जीवन बीमा निगम अध्यक्ष की सेवानिवृत्ति आयु में वृद्धि

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में केंद्र सरकार ने ‘भारतीय जीवन बीमा निगम (स्टाफ) विनियम, 1960’ में संशोधन करते हुए ‘भारतीय जीवन बीमा निगम’ के अध्यक्ष की सेवानिवृत्ति की आयु को 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दिया है।

मह्त्वपूर्ण बिंदु

  • भारतीय स्टेट बैंक (SBI) सहित कुछ विशिष्ट अपवादों को छोड़कर अधिकांश सार्वजनिक उपक्रमों के शीर्ष अधिकारियों के लिये सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष ही है।
  • बीते माह केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष के अंत में जीवन बीमा निगम (LIC) के प्रस्तावित ‘प्रारंभिक सार्वजनिक प्रस्ताव’ (IPO) के मद्देनज़र LIC के वर्तमान अध्यक्ष एम.आर. कुमार को नौ माह के कार्यकाल विस्तार की मंज़ूरी दी थी।
  • उल्लेखनीय है कि इस वर्ष अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1.75 लाख करोड़ रुपए के विनिवेश के महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने के लिये वित्तीय वर्ष 2021-22 में ‘जीवन बीमा निगम’ का प्रारंभिक सार्वजनिक प्रस्ताव (IPO) जारी करने की घोषणा की थी।
  • सरकार ने सार्वजनिक प्रस्ताव को सुविधाजनक बनाने के लिये पहले ही ‘वित्त अधिनियम 2021’ के साथ-साथ ‘जीवन बीमा निगम अधिनियम, 1956’ में संशोधन कर दिया है।
  • संशोधन के एक हिस्से के रूप मे सरकार ने लिस्टिंग की सुविधा के लिये LIC की अधिकृत पूंजी को 100 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 25,000 करोड़ रुपए कर दिया है। विदित हो कि वर्तमान में LIC में सरकार की 100 फीसदी हिस्सेदारी है।

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