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Daily Current Affairs 5 July 2021

नियुक्ति/निर्वाचन

पुष्कर सिंह धामी

चर्चा में क्यों?

  • पुष्कर सिंह धामी को उत्तराखंड का नया मुख्यमंत्री चुना गया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • तीरथ सिंह रावत के त्यागपत्र देने के बाद पुष्कर सिंह धामी को भारतीय जनता पार्टी के विधान मंडल दल का नेता चुना गया।
  • उन्होंने तीन जुलाई 2021 को राज्य के 11 वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की।
  • वह उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले की खटीमा विधानसभा सीट से विधायक हैं।

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तीरथ सिंह रावत

चर्चा में क्यों?

  • उत्तराखंड के 10 वें मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने 2 जुलाई 2021 को अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। वह इसी साल 10 मार्च को ही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने थे।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • वह मात्र चार महीने ही मुख्यमंत्री पद पर रह सके। तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के त्यागपत्र के बाद उन्हें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधानमंडल दल का नेता चुना गया था।

संवैधानिक बाध्यता के कारण छोड़ना पड़ा पद

  • संविधान के मुताबिक पौड़ी गढ़वाल से भाजपा सांसद तीरथ सिंह रावत को 6 महीने के भीतर विधानसभा उपचुनाव जीतना था। तभी वह मुख्यमंत्री रह पाते। इसके लिए उत्तराखंड में दो विधानसभा की सीट वर्तमान में खाली भी हैं लेकिन उत्तराखंड की विधानसभा का कार्यकाल अब एक वर्ष से भी कम बचा है ऐसे में उपचुनाव कराए जाने की संभावना नहीं थी।
  • जनप्रतिनिधित्व क़ानून, 1951 की धारा 151ए में निर्वाचन आयोग को ये अधिकार दिया गया है कि संसद और राज्य विधानसभा की सीटों के खाली होने की स्थिति में छह महीने के भीतर उपचुनाव कराकर उन्हें भरा जाए लेकिन इसमें एक शर्त है कि संसद और राज्य विधानसभा का एक साल या उससे ज्यादा का कार्यकाल बचा हुआ हो।
  • यदि ऐसा नहीं हो तो निर्वाचन आयोग ऐसा करने से मना कर सकता है। उत्तराखंड में भी इसी तरह की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।
  • पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के इस्तीफे के बाद 10 मार्च को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इस तरह वह केवल 115 दिन मुख्यमंत्री के पद पर रहे। वे ऐसे मुख्यमंत्री रहे, जिन्हें विधानसभा में बतौर नेता सदन उपस्थित रहने का मौका नहीं मिला।

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चर्चित स्थान

तिलांचोंग द्वीप

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय तटरक्षक (ICG) बल ने हाल ही में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की राजधानी पोर्ट ब्लेयर से लगभग 350 किलोमीटर दक्षिण में तिलांचोंग द्वीप के करीब समुद्र सात चालक दल के साथ एक परेशानी में पड़ी मछली पकड़ने वाली नौका ‘आरएसएन-टू’ को बचाया।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • भारतीय तटरक्षक (ICG) बल ने समन्वित खोजबीन एवं बचाव अभियान शुरू किया गया और कामोर्ता से आईसीजी जहाज सी-422 को क्षेत्र में खोज का जिम्मा सौंपा।
  • खोजबीन के प्रयासों को और बढ़ाने के लिए आईसीजी जहाज विश्वस्त और डोर्नियर विमान तैनात किए गए। समन्वित तलाशी अभियान के परिणामस्वरूप मछली पकड़ने वाली नौका का समय पर पता लगाया गया।

अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के बारे में जानकारी

  • अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह बंगाल की खाड़ी में स्थित भारत का एक संघ राज्य क्षेत्र है, जिसमें छोटे-बड़े लगभग 576 द्वीप शामिल हैं।
  • इन द्वीपों को दो प्रमुख द्वीपसमूहों में बाँटा गया है – उत्तर में अंडमान द्वीप समूह और दक्षिण में निकोबार द्वीप समूह।
  • अंडमान द्वीप समूह और निकोबार द्वीप समूह 10 डिग्री चैनल द्वारा एक-दूसरे से अलग होते हैं|
  • अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के पूर्व में स्थित अंडमान सागर इसे थाईलैंड और म्यांमार देशों से अलग करता है।
  • भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी ‘बैरन द्वीप’ यहीं स्थित है।
  • अंडमान निकोबार द्वीप समूह के पारिस्थितिकी तंत्र में कठोर या चट्टानी प्रवाल की 555 प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जो पर्यावरणीय दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण हैं।
  • इसके अतिरिक्त, लंबे समय तक मुख्य भूमि से अलगाव के कारण ये द्वीप कई प्रजातियों के उद्भव के लिए हॉटस्पॉट बने, जिसके परिणामस्वरूप सैकड़ों स्थानिक प्रजातियाँ और उप प्रजातियाँ यहाँ विकसित हुई हैं।

जनजातियां

  • अंडमान द्वीप समूह पाँच विलुप्त होने की कगार पर खड़ी जनजातियों का घर है। ये हैं – जरावा, नॉर्थ सेंटीनेलीज़, ग्रेट अंडमानीज़, ओंग और शोम्पेन।
  • इनमें जरावा और नॉर्थ सेंटीनेलीज़ जनजातियाँ, आम लोगों के संपर्क में नहीं आई हैं।
  • नॉर्थ सेंटीनेलीज़ तो बाहर के लोगों के प्रति काफ़ी आक्रामक हैं। इसीलिए उनके द्वीप पर किसी को भी जाने की अनुमति नहीं है।

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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

NEOWISE टेलिस्कोप चर्चा में क्यों?

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपने ‘नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट वाइड-फील्ड इन्फ्रारेड सर्वे एक्सप्लोरर’ (NEOWISE) टेलिस्कोप के कार्यकाल में दो वर्ष का विस्तार किया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • इस विस्तार के पश्चात् नासा का यह ‘नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट’ (NEO) हंटिंग स्पेस टेलीस्कोप जून 2023 तक कार्य करेगा।
  • दिसंबर 2009 में ‘वाइड-फील्ड इन्फ्रारेड सर्वे एक्सप्लोरर’ (WISE) मिशन के रूप में लॉन्च किया गया यह टेलिस्कोप मूलतः अवरक्त तरंगदैर्ध्य के माध्यम से संपूर्ण आकाश का सर्वेक्षण, क्षुद्रग्रहों, सितारों और गहरे अंतरिक्ष में दिखाई देने वाली कुछ आकाशगंगाओं का पता लगाने का कार्य कर रहा था।
  • इसके पश्चात् दिसंबर 2013 में नासा के ग्रह विज्ञान विभाग द्वारा इसे ‘नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट’ (NEO) हंटिंग स्पेस टेलीस्कोप के रूप में पुनरुद्देशित किया गया, जिसका प्राथमिक कार्य सौरमंडल में पृथ्वी के करीब से गुज़रने वाले क्षुद्रग्रहों और धूमकेतुओं की पहचान करना है।
  • अब तक इस टेलिस्कोप ने 1,850 से अधिक ‘नियर-अर्थ ऑब्जेक्टस’ (NEOs) की पहचान की है और उनके बारे में जानकारी प्रदान की है, जिससे हमें अपने निकटतम सौरमंडल को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली है।

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राष्ट्रीय परिदृश्य

आवश्यक रक्षा सेवा अध्यादेश 2021

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में केंद्र सरकार ने आवश्यक रक्षा सेवाओं में संलग्न व्यक्ति द्वारा किसी भी आंदोलन और हड़ताल किये जाने पर पूर्णतः रोक लगाने के लिये एक अध्यादेश जारी किया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • ‘आवश्यक रक्षा सेवा अध्यादेश 2021’ पर गजट अधिसूचना के मुताबिक, ‘कोई भी व्यक्ति, जो अध्यादेश के तहत अवैध हड़ताल का आयोजन करता है अथवा इसमें हिस्सा लेता है, उसे एक वर्ष तक की अवधि के लिये कारावास या 10,000 रुपए तक जुर्माने अथवा दोनों सज़ा से दंडित किया जा सकता है।
  • रक्षा उपकरणों के उत्पादन, सेवाओं और सेना से जुड़े किसी भी औद्योगिक प्रतिष्ठान के संचालन या रखरखाव के साथ-साथ रक्षा उत्पादों की मरम्मत और रखरखाव में कार्यरत कर्मचारी अध्यादेश के दायरे में आएंगे।
  • यह अध्यादेश ऐसे समय में आया है जब आयुध निर्माणी बोर्ड (OFB) के प्रमुख महासंघों द्वारा OFB को निगमित करने के सरकार के फैसले के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की घोषणा की गई है।
  • अध्यादेश के तहत दूसरे लोगों को आंदोलन या हड़ताल में हिस्सा लेने के लिये प्रेरित करना भी एक दंडनीय अपराध होगा। विदित हो कि बीते दिनों केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लगभग 200 वर्ष पुराने आयुध निर्माणी बोर्ड (OFB) के निगमीकरण की योजना को मंज़ूरी दी थी।

अध्यादेश से जुड़े संवैधानिक प्रावधान:

  • संविधान के अनुच्छेद 123 के अनुसार, कार्यपालिका को यह अधिकार प्राप्त है कि कुछ विशेष परिस्थितियों में अध्यादेश जारी कर सकती है।
  • अध्यादेश तभी जारी किया जा सकता है जब संसद या राज्य विधायिका के दोनों सदनों में से कोई एक सदन सत्र में नहीं हो एवं राष्ट्रपति इस बात से संतुष्ट हो कि तत्काल कार्रवाई करना आवश्यक है।
  • हालांकि संसद की कार्यवाही पुन: शुरू होने पर दोनों सदनों द्वारा छह सप्ताह की समय-सीमा में संबंधित अध्यादेश को पारित करना आवश्यक होता है।
  • यदि दोनों ही सदन इसे खारिज करने के पक्ष में मतदान करते हैं अथवा राष्ट्रपति द्वारा इसे वापस ले लिया जाता है तो अध्यादेश समाप्त हो जाता है।
  • यदि संसद कार्यवाही शुरू होने के बाद छह सप्ताह की समय-सीमा में स्थापित किये गए अध्यादेश को पारित नहीं करती है तो अध्यादेश स्वत: समाप्त हो जाएगा।
  • अनुच्छेद 213 के तहत राज्य सरकारों के लिये भी इसी तरह के प्रावधान मौजूद हैं।

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पुरस्कार/सम्मान

कुवेम्पु पुरस्कार 2020

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में उड़िया कवि डॉ. राजेंद्र किशोर पांडा को ‘कुवेम्पु पुरस्कार 2020’ के लिये चुना गया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • वर्ष 1944 में पैदा हुए डॉ. राजेंद्र किशोर पांडा ओडिशा के एक प्रसिद्ध कवि एवं उपन्यासकार हैं।
  • अब तक उनके कुल 16 कविता संग्रह और एक उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं।
  • उन्हें वर्ष 2010 में ‘गंगाधर राष्ट्रीय पुरस्कार’ और वर्ष 1985 में ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था।

कुवेम्पु पुरस्कार

  • यह 20वीं सदी के दिवंगत कन्नड़ कवि ‘कुवेम्पु’ की स्मृति में स्थापित एक राष्ट्रीय पुरस्कार है।
  • यह पुरस्कार प्रतिवर्ष भारतीय संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त किसी भी भाषा के साहित्य में महत्त्वपूर्ण योगदान देने वाले लेखक को दिया जाता है।
  • इस पुरस्कार के तहत विजेताओं को 5 लाख रुपए का नकद पुरस्कार तथा एक रजत पदक एवं एक प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया जाता है।

कौन थे कवि कुवेम्पु’?

  • कुप्पली वेंकटप्पा पुट्टप्पा, जिन्हें उनके उपनाम ‘कुवेम्पु’ के नाम से जाना जाता है, एक भारतीय कवि, नाटककार, उपन्यासकार और आलोचक थे।
  • उन्हें मुख्य तौर पर 20वीं सदी के सबसे महान कन्नड़ कवियों में से एक माना जाता है।
  • वह कन्नड़ भाषा के पहले लेखक थे जिन्हें रामायण के उनके स्वयं के संस्करण ‘श्री रामायण दर्शनम’ के लिये ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

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